देश का सबसे बड़ा डिजिटल हाईवे बनेगा गंगा एक्सप्रेसवे, सड़क के नीचे 'खजाना', मेरठ से प्रयागराज तक हादसा होते ही अलर्ट कर देंगी स्मार्ट 'आंखें'

Ganga Expressway Route: उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे न केवल सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे बनेगा. ये डिजिटल हाईवे के तौर पर टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण भी पेश करेगा. गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को पीएम मोदी करेंगे.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
Ganga Expressway inauguration: गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन
नोएडा:

Ganga Expressway Latest Update: गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में न केवल आर्थिक तरक्की का नया रास्ता बनेगा, बल्कि ये टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी नायाब नजीर बन रहा है. मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी के इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में लाखों टन कचरे का इस्तेमाल हुआ है. साथ ही 18 लाख पेड़ लगाए गए हैं. एक्सप्रेसवे के साथ ही ऑप्टिकल फाइबर, बिजली और गैस पाइपलाइन भी गुजरेंगी, जिससे यूपी सरकार को हर साल अरबों रुपये का फायदा होने वाला है. एक्सप्रेसवे के मेंटेनेंस का खर्च खुद डिजिटल नेटवर्क ही निकल जाएगा.

डिजिटल हाईवे बनेगा गंगा एक्सप्रेसवे

गंगा एक्सप्रेसवे के साथ 2 मीटर चौड़ा यूटिलिटी कॉरिडोर बनाया गया है. इंटरनेट केबल बिछाने या मरम्मत के लिए एक्सप्रेसवे की सड़क को कभी खोदना नहीं पड़ेगा. इस प्री-बिल्ट कॉरिडोर के भीतर ऑप्टिकल फाइबर (OFC), गैस पाइपलाइन, बिजली के तार या कोई और वायर बिछाई जा सकती है. एक्सप्रेसवे के नीचे ये डार्क फाइबर उत्तर प्रदेश के उन 519 गांवों और पिछड़े जिलों के लिए ब्रॉडबैंड हाईवे का काम करेगा,  हर गांव को हाईस्पीड 5G कनेक्टिविटी मिलेगी.इस फाइबर नेटवर्क से एक्सप्रेसवे के किनारे एज डेटा सेंटर (Edge Data Centers) बनाए जा सकते हैं, जो यूपी को बेंगलुरु या हैदराबाद जैसा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर देंगे.

लंबा एनर्जी कॉरिडोर

एक्सप्रेसवे के यूटिलिटी कॉरिडोर में केबल के साथ नेचुरल गैस पाइपलाइन का भी विकल्प है. प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा परियोजना के तहत एक्सप्रेसवे के किनारे बसे गांवों और उद्योगों को सस्ती पीएनजी (PNG) और सीएनजी (CNG) मिल सकेगी.

हादसों पर अलर्ट देंगी स्मार्ट 'आंखें' 

स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग के तहत गंगा एक्सप्रेसवे सेंसर वाली एलईडी लाइटों से लैस है. इसके लिए बिजली और डेटा लाइनें इसी कॉरिडोर में बिछाई गई हैं. हर 2-3 किलोमीटर पर लगे हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरे और सेंसर इसी फाइबर से जुड़े हैं.जमीन के नीचे छिपे डिजिटल फाइबर नेटवर्क से एक्सप्रेसवे का स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (STMS) काम करेगा. जैसे ही कोई गाड़ी रुकती है या कोई हादसा होता है तो स्मार्ट अलर्ट सिस्टम से पलक झपकते ही कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजा जाएगा. एंबुलेंस या पेट्रोलिंग टीम कुछ मिनटों में पहुंच जाएगी. रोड एक्सीडेंट में किसी को हेल्प के लिए इमरजेंसी कॉल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. 

Advertisement

हादसा होते ही खुदबखुद बजेगा अलार्म

गंगा एक्सप्रेसवे का STMS (Smart Traffic Management System) कंट्रोल रूम किसी वार रूम जैसा 24 घंटे काम करेगा. कंट्रोल रूम में एक विशाल वीडियो वॉल (Video Wall) दिखती है, जिस पर सैकड़ों कैमरों की लाइव फीड एक साथ चलती है. एक्सप्रेसवे के हर 2-3 किलोमीटर पर लगे हाई-डेफिनिशन PTZ कैमरे इस वॉल से जुड़े होते हैं. यहां इंजीनियर 24/7 शिफ्ट में इंजीनियर पूरे 594 किमी के एक्सप्रेसवे की रियल टाइम डिजिटल निगरानी करेंगे. कहीं भी ट्रैफिक धीमा होता है तो रेड अलर्ट होगा.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत

स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम AI वीडियो रिकॉर्डिंग की पड़ताल भी करेगा. अगर कोई वाहन गलती से या जानबूझकर गलत दिशा में मुड़ता है तो AI तुरंत अलार्म बजा देगा. कंट्रोल रूम के मॉनिटर पर उस गाड़ी का फ्रेम लाल हो जाएगा. अगर कोई गाड़ी एक्सप्रेसवे पर 2 मिनट से ज्यादा ठहरती है तो AI इसे जोखिम मानते हुए निकटतम हाईवे पेट्रोलिंग यूनिट को जीपीएस (GPS) से लोकेशन भेज देगा. बिना किसी दखलंदाजी के AI हर गाड़ी की स्पीड का आकलन करेगा और उल्लंघन करने पर ऑटोमैटिक ऑनलाइन ट्रैफिक चालान भेज देगा.

Advertisement

ये भी पढ़ें - यूपी में गंगा एक्सप्रेसवे से भी बड़ा एक्सप्रेसवे बनेगा, UP के 22 जिलों से होकर बिहार, नेपाल बॉर्डर तक जाएगा, दिल्ली NCR को भी फायदा

कोयले की राख का इस्तेमाल

कोयले के जलने से निकलने वाली हानिकारक राख (फ्लाई ऐश) को गंगा एक्सप्रेसवे में इस्तेमाल कर इसे वरदान बना दिया. एक्सप्रेसवे निर्माण में लगभग 65 से 70 लाख टन राख का इस्तेमाल हुआ है. ऊंचाहार (रायबरेली), टांडा और दादरी के थर्मल पावर प्लांट ये राख लाई गई. इंजीनियरों ने पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सड़क की नींव को ऊंचा करने के लिए राख का इस्तेमाल किया.इससे करीब 100-120 लाख घन मीटर उपजाऊ मिट्टी को बचाया गया.

ये भी पढ़ें - गंगा एक्सप्रेसवे से 12 जिले नहीं, यूपी का कोना-कोना होगा कनेक्ट, पूर्वांचल-बुंदेलखंड से दिल्ली, हरिद्वार तक तेज रफ्तार

लाखों टन कचरे का यूज कर करोड़ों बचाए

राख मिट्टी से हल्की होती है, लेकिन पानी के साथ मजबूती से चिपकने से सड़क धंसने का खतरा कम हो जाता है. राख के इन पहाड़ों (Ash Dykes) से हवा और पानी को प्रदूषित होती है. इस ग्रीन हाईवे पहल ने लाखों टन कचरे को जमीन के नीचे सुरक्षित तरीके से दबा दिया. कचरे को पावर प्लांट से सीधे साइट तक पहुंचाया गया.राख को सर्विस रोड और कंक्रीट मिक्स कर सीमेंट का 10-15% उपयोग कम कर करोड़ों रुपये बचाए गए.

Advertisement

गंगा एक्सप्रेसवे पर कंक्रीट क्रैश बैरियर 

गंगा एक्सप्रेसवे में रिकॉर्ड 24 घंटे के भीतर 10.3 किलोमीटर लंबा कंक्रीट क्रैश बैरियर (Crash Barrier) बिछाया गया. इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया. हाईवे, एक्सप्रेसवे के घुमावदार मोड़, जोखिम वाली जगहों पर ये क्रैश बैरियर बनाया जाता है. हादसे के वक्त 80 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के वाहनों की टक्कर को रोकने में ये सक्षम होते हैं. जीरो-कट तकनीक से बिना किसी ज्वाइंट के रातोंरात स्लिप-फॉर्म पेवर (Slip-form Paver) मशीनों से ये बैरियर बनाए गए. दिन-रात हजारों मजदूरों ने एक साथ काम करके ये जर्सी बैरियर बनाए.  

Featured Video Of The Day
Syed Suhail | India Heatwave Alert: 'भट्टी' बने देश के 100 शहर, 47°C के करीब पहुंचा पारा! | Summer