- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे
- भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए रक्षा मंत्रालय जल्द मंजूरी दे सकता है
- इस सौदे के तहत भारत सीधे 18 राफेल विमान फ्रांस से खरीदेगा और बाकी 96 विमानों का उत्पादन भारत में होगा
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 फरवरी को आधिकारिक यात्रा पर भारत आ रहे हैं.17 से 19 फरवरी तक रहेंगे. इसमें होरीजोन 247 रोडमैप पर खास तौर पर बात होगी. इंडो पेसीफिक पर दोनों नेताओं का खास फोकस रहेगा. वहीं पीएम मोदी और मैक्रों मुंबई में इंडिया-फ्रांस इनोवेशन ईयर का संयुक्त रूप से उद्घाटन करेंगे. 19 फरवरी को नई दिल्ली में मैक्रों एआई इंपैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे.
114 राफेल डील का क्या होगा
ये यात्रा दोनों देशों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बताई जा रही है. उम्मीद की जा रही है कि मैक्रों की यात्रा के दौरान 114 राफेल विमानों का भारत सौदा कर सकता है. भारत का रक्षा मंत्रालय इस सप्ताह फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की एक बड़ी डील को मंजूरी दे सकता है. विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, यह सौदा भारतीय वायुसेना के लिए किया जा रहा है, जिसकी कुल कीमत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है.
यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से पहले दी जा सकती है. इसके बाद इस सौदे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से भी मंजूरी लेनी होगी.
18 विमान सीधे आएंगे
इस प्रस्ताव के अनुसार, भारत फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 18 राफेल विमान सीधे खरीदेगा. बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे. इनमें से कुछ विमान दो सीट वाले होंगे, जिनका उपयोग पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा. इस डील में आधुनिक तकनीक भारत को देने और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है. इन विमानों के हिस्सों का उत्पादन साल 2028 से शुरू होने की उम्मीद है.
भारत में लड़ाकू विमानों की कमी
भारतीय वायुसेना के बेड़े में पहले से ही दो स्क्वाड्रनों में 36 राफेल विमान शामिल हैं, जिनमें से 'सी' वेरिएंट की अंतिम डिलीवरी दिसंबर 2024 में हुई थी. इसके अलावा भारतीय नौसेना ने भी 'एम' वेरिएंट के 26 राफेल विमानों का ऑर्डर भी दिया गया है, जिनकी कीमत करीब 63,000 करोड़ रुपए है.
नौसेना के ये राफेल विमान आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य विमानवाहक पोत से उड़ान भरेंगे. इस सौदे में विमानों की मरम्मत, रखरखाव, जरूरी सामान और कर्मचारियों की ट्रेनिंग की व्यवस्था भी शामिल है.
राफेल विमानों का इस्तेमाल भारत ने पिछले साल मई में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' में किया था, जिसमें पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे.
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