LoC पर ऐसा क्या हुआ कि पाकिस्तान बॉर्डर के पास दनादन फटने लगीं बारूदी सुरंगें, लगी भीषण आग

भारत-पाकिस्तान के बीच एलओसी पर करीब 700 किलोमीटर लंबी बाड़ लगाई गई है. इसकी सुरक्षा के लिए जगह जगह लैंडमाइंस बिछाई गई हैं.

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  • जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा के पास जंगलों में लगी आग से बारूदी सुरंगें धमाके के साथ फट रही हैं
  • बालाकोट सेक्टर के बसूनी फॉरवर्ड इलाके में लगी आग अब मेंढर सेक्टर के बड़े हिस्से तक फैल चुकी है
  • एलओसी पर करीब 700 किमी लंबी बाड़ के साथ जगह-जगह लैंडमाइंस और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरण लगे हैं
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जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा (LoC) के पास जंगलों में लगी भीषण आग ने सुरक्षा बलों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले दो दिनों से धधक रही इस आग की वजह से सीमा पर बिछाई गई लैंडमाइन (बारूदी सुरंगें) धमाके के साथ फट रही हैं. बताया जा रहा है कि अब तक करीब एक दर्जन लैंडमाइन में ब्लास्ट हो चुका है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप है. 

बालाकोट में लगी थी आग, मेंढर तक फैली

अधिकारियों ने बताया कि ये सोमवार को बालाकोट सेक्टर के बसूनी फॉरवर्ड इलाके में शुरू हुई थी, जो मंगलवार को फैलकर मेंढर सेक्टर के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले चुकी है. नियंत्रण रेखा के पास घने जंगलों में लगी यह आग तेजी से फैलते हुए उन अग्रिम इलाकों तक पहुंच गई है, जहां सेना ने घुसपैठ रोकने के लिए बारूदी सुरंगें बिछाई हुई हैं. आग की वजह से ये लैंडमाइन एक-एक कर फट रही हैं.

700 KM लंबी बाड़, बिछी हैं लैंडमाइंस

भारत-पाकिस्तान के बीच एलओसी पर करीब 700 किलोमीटर लंबी बाड़ लगाई गई है. इसकी सुरक्षा के लिए जगह जगह लैंडमाइंस बिछाई गई हैं. इसके अलावा सेंसर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का भी इस्तेमाल किया जाता है.

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आग पर काबू पाने की कोशिशें जारी

जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से सूखे की स्थिति और बारिश की कमी के कारण जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ गई हैं. खासकर पीर पंजाल के राजौरी और पुंछ जिलों में सूखे मौसम में ऐसी आग लगना आम बात है. 

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि आग या बारूदी सुरंगों में धमाके से अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. सेना और संबंधित विभाग आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बारूदी सुरंगों के फटने का सिलसिला रुक सके.

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एक हफ्ते में दूसरी बार फटीं लैंडमाइंस 

बता दें पिछले एक हफ्ते में पुंछ जिले में आग के कारण लैंडमाइन फटने की यह दूसरी घटना है. पिछले साल भी जनवरी के महीने में इसी तरह की भीषण आग लगी थी और सिलसिलेवार धमाके हुए थे. पिछले महीने अनंतनाग जिले में आग बुझाते समय एक फॉरेस्ट गार्ड को जान गंवानी पड़ी थी.

एलओसी पर इस आग ने सेना के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है. एक तरफ आग बुझाने की कोशिशें की जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बारूदी सुरंगों में धमाकों से बने सिक्योरिटी गैप का फायदा उठाकर घुसपैठ रोकने के भी इंतजाम किए जा रहे हैं. एलओसी पर मल्टी टियर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है.

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