बद्रीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, साधु-संतों ने खुशी जाहिर की

नारायणाचार्य शांडिल्य महाराज ने बताया कि हिंदू के पवित्र स्थलों पर मुसलमानों पर पूरी तरह से बैन लगाने का फैसला किया गया है. हम लगभग तीन वर्षों से इसकी वकालत कर रहे हैं. जैसे दूसरे इलाकों में पाबंदियां लगाई गई हैं, वैसे ही संगम क्षेत्र में भी यह होना चाहिए.

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ऋषिकेश:

चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाए जाने पर देशभर के साधु-संतों ने खुशी जाहिर की है. साधु-संतों का मानना है कि इस तरह के फैसले से हमारे मंदिरों की पवित्रता बनी रहेगी. साधु-संतों का तर्क है कि गैर-हिंदू अक्सर हमारी मंदिरों की पवित्रता को भंग करने का काम कर चुके हैं.

बीकेटीसी की घोषणा पर अखिल भारतीय संत समिति (ऋषिकेश) के जनरल सेक्रेटरी केशव स्वरूप ब्रह्मचारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बीकेटीसी ने फैसला लिया है कि केदारनाथ और बद्रीनाथ में गैर-हिंदुओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा. बीकेटीसी ने हमारे मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए बहुत सराहनीय फैसला लिया है, क्योंकि गैर-हिंदू जो भी वहां जाते थे, वे पवित्रता को नष्ट करने का काम करते थे.

उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि भारत में जितने भी हिंदू-सनातनी मंदिर हैं, वहां गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए, जिससे मंदिरों की पवित्रता बरकरार रहे.

मुनि अभय चैतन्य महाराज ने कहा कि यह बहुत अच्छा फैसला है और इसका स्वागत है. उत्तराखंड सरकार को भी तहे दिल से धन्यवाद देना चाहते हैं. गैर-हिंदू पूर्व में हमारे मंदिरों की पवित्रता को भंग करते रहे हैं. ऐसे में अगर एक समिति जागृत हो जाती है तो अन्य मंदिर समितियों को भी संदेश जाएगा कि वे भी इस तरह के फैसले लें.

साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दासी ने कहा कि उत्तराखंड में कुछ इलाकों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, जो बहुत सराहनीय है. मैं इस आदेश का पूरी तरह समर्थन करता हूं और सभी हिंदुओं से अपील करता हूं कि जब भी कट्टरपंथी या चरमपंथी सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश करें, तो पूरे भारत में सभी तीर्थ और धार्मिक शहरों में गैर-हिंदू व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाए.

नारायणाचार्य शांडिल्य महाराज ने बताया कि हिंदू के पवित्र स्थलों पर मुसलमानों पर पूरी तरह से बैन लगाने का फैसला किया गया है. हम लगभग तीन वर्षों से इसकी वकालत कर रहे हैं. जैसे दूसरे इलाकों में पाबंदियां लगाई गई हैं, वैसे ही संगम क्षेत्र में भी यह होना चाहिए.

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