DRDO के नए आर्मर्ड प्लेटफॉर्म, AAP बना WHAP से आगे, अमेरिकी स्ट्राइकर को देगा टक्कर

बताया जा रहा है कि नया AAPअमेरिकी Stryker को भी कड़ी टक्कर दे सकता है. जानकर तो इसे अमेरिकी स्ट्राइकर से बेहतर मानते है क्योंकि यह पानी मे भी चल सकता है जबकि स्ट्राइकर तो पानी मे चल ही नही सकता हैं .

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नई दिल्ली:

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सेना के लिये दो नये एडवांस्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म पेश किए हैं. इनमें एक ट्रैक्ड और एक व्हील्ड प्लेटफॉर्म शामिल है. इसका मकसद सेना की नई और बदलती जरुरतों को पूरा करना हैं. इन प्लेटफार्म को व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने डिजाइन और विकसित किया हैं. नया एडवांस्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म यानी AAP, पुराने व्हील्डव आर्मर्ड प्लेटफॉर्म WHAP का अपग्रेड वर्जन है. इसे ज्यादा आधुनिक और ताकतवर बनाया गया है. साधारण शब्दों में इसे आप सेना के बीएमपी का एडवांस वर्जन भी कह सकते हैं. यह इन्फैंट्री की आधुनिक बख्तरबंद गाड़ी हैं . बताया जा रहा है कि नया AAPअमेरिकी Stryker को भी कड़ी टक्कर दे सकता है. जानकर तो इसे अमेरिकी स्ट्राइकर से बेहतर मानते है क्योंकि यह पानी मे भी चल सकता है जबकि स्ट्राइकर तो पानी मे चल ही नही सकता हैं .

वैसे यह दोनों प्लेटफॉर्म पूरी तरह देश में डिजाइन और विकसित किए गए हैं. इन्हें आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.आज सेना को ऐसे वाहनों की जरूरत है . जो तेज हों. सुरक्षित हों. यह कई तरह के मिशन में काम आ सके . इसी वजह से DRDO ने ट्रैक्ड और व्हील्ड दोनों वर्जन तैयार किए हैं.इनकी सबसे बड़ी खासियत 30 मिमी का क्रूलेस टरेट है. यह टरेट पूरी तरह स्वदेशी हैं.  इस टरेट में कोई सैनिक नहीं बैठता.इसे रिमोट या ऑटो सिस्टम से चलाया जाता है. इसमें 30 मिमी की तोप लगी है. साथ में 7.62 मिमी मशीन गन भी है.

यह एंटी-टैंक मिसाइल भी दाग सकता है.यह वाहन टैंक, बंकर और हवाई टारगेट पर हमला कर सकता है.इस प्लेटफॉर्म में हाई पावर इंजन दिया गया है. साथ में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन भी है.ये तेज चलते हैं. मुश्किल रास्तों पर भी आसानी से चल सकते हैं. ट्रैक्ड वर्जन पहाड़ और जंगल के लिए बेहतर है. व्हील्ड वर्जन सड़क और मैदान में तेज चलता है. इनमें एम्फीबियस क्षमता भी है.यानी यह पानी में भी चल सकते हैं. हाइड्रो जेट की मदद से नदी पार कर सकते हैं.

सुरक्षा के लिए STANAG लेवल 4 और 5 प्रोटेक्शन दिया गया है. यह भारी गोलीबारी और धमाके से बचाव करता है.इसमें मॉड्यूलर आर्मर है.इसका मतलब है कि इसमें जरूरत के अनुसार सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है.फिलहाल इन प्लेटफॉर्म में करीब 65% स्वदेशी तकनीक है. डीआरडीओ की कोशिश इसे बढ़ाकर 90% करने की योजना है. इनके निर्माण में निजी कंपनियों ने भी योगदान दिया है. टाटा एडवांस सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड इसमें शामिल हैं.कई छोटे उधोगों ने भी इस प्रोजेक्ट में हिस्सा लिया है. इससे देश का रक्षा उद्योग मजबूत हुआ है.WHAP के मुकाबले AAP ज्यादा एडवांस है. इसमें क्रूलेस टरेट और बेहतर सुरक्षा दी गई है. यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह मॉड्यूलर है.

इसे अलग-अलग रोल में इस्तेमाल किया जा सकता है. जैसे इंफैंट्री कॉम्बैट, कमांड पोस्ट और टोही मिशन. ट्रैक्ड और व्हील्ड दोनों के अपने फायदे हैं. व्हील्ड प्लेटफॉर्म तेज और मेंटेनेंस में आसान है. ट्रैक्ड प्लेटफॉर्म कठिन इलाकों में ज्यादा भरोसेमंद है. डीआरडीओ ने सेना की जरूरतों के मुताबिक प्रोटोटाइप रिकॉर्ड तीन साल में तैयार कर लिया हैं . अब इसका सेना ट्रायल करेगी फिर इसे सेना में शामिल कर लिया जाएगा. कुल मिलाकर, नया AAP भारतीय सेना के लिए बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है.यह भविष्य के युद्ध में भारत की ताकत को और बढ़ाएगा.

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