- कर्नाटक में डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक संघर्ष जारी है
- डीके शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे हैं
- डीके शिवकुमार की संपत्ति लगभग 1413 करोड़ रुपये है जो उन्हें देश के सबसे अमीर विधायकों में शामिल करती है
कर्नाटक में डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जंग छिड़ी है. कर्नाटक में 2022 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ढाई-ढाई साल सीएम रहने के समझौते को इस सियासी युद्ध की जड़ बताया जा रहा है. हालांकि 79 साल के सिद्धारमैया ने अभी कुर्सी पर पकड़ ढीली करने का रुख नहीं दिखाया है और डीके भी इस पर ताकत दिखाने पर उतर आए हैं. डीके शिवकुमार को देश के सबसे अमीर नेताओं में गिना जाता है.उन्हें कांग्रेस का संकटमोचक भी कहा जाता है. आइए जानते हैं डीके का सियासी सफर...
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष और डिप्टी सीएम
डीके शिवकुमार कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में उप मुख्यमंत्री और जल संसाधन, शहरी विकास जैसे अहम मंत्रालय संभाल रहे हैं. वो 2020 से कर्नाटक कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं. उनकी पदयात्रा और राज्य भर रैलियों को 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की प्रचंड जीत में अहम योगदान रहा था.
शिवकुमार की संपत्ति 1400 करोड़ से ज्यादा
एडीआर रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक की कनकपुर सीट से विधायक डीके शिवकुमार की संपत्ति 1413 करोड़ रुपये के करीब है. वो देश के दूसरे सबसे अमीर विधायक हैं. जबकि महाराष्ट्र में बीजेपी एमएलए पराग शाह की संपत्ति 3400 करोड़ रुपये के लगभग है. 2023 के हलफनामे के अनुसार, शिव कुमार के पास 100 करोड़ की कृषि और गैर कृषि जमीन है. जबकि रिसॉर्ट, फॉर्महाउस और कॉमर्शियल बिल्डिंग मिलाकर 942 करोड़ की एसेट हैं. उनके बंगले की कीमत भी 84 करोड़ रुपये है.जबकि सिद्धारमैया की संपत्ति सिर्फ 52 करोड़ ही है.
DK Shivakumar Wealth
डीके शिवकुमार 27 साल की उम्र में बने पहली बार विधायक
डीके शिवकुमार का जन्म बेंगलुरु में एक संपन्न वोक्कालिगा परिवार में 15 मई 1962 को हुआ था.उनके छोटे भाई डीके सुरेश भी नेता हैं. डीके की दो बेटियां ऐश्वर्या और आभराना हैं और एक बेटा आकाश है. शिवकुमार 18 साल की उम्र में 1980 में छात्र नेता के तौर पर अपनी छाप चोड़ी और 1989 में 27 साल की उम्र में मैसुरु जिले की साथन विधानसभा से कांग्रेस से चुनाव जीतकर सबके चौंका दिया. वो लगातार आठ बार विधानसभा जीत चुके हैं.
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रियल एस्टेट कारोबारी हैं शिवकुमार
शिवकुमार रियल एस्टेट, ग्रेनाइट और एजुकेशन सेक्टर में कारोबार करते हैं. ये उनकी अपनी सियासी हैसियत थी कि कांग्रेस से टिकट न मिलने पर देवेगौड़ा के खिलाफ लड़े और उन्हें हराया.उनके बेटे कुमारस्वामी को भी चुनाव में हराया. जबकि जेडीएस वोक्कालिग समुदाय में काफी जनाधार रखती है.राजनीति में एंट्री के वक्त वो 12वीं पास थी, लेकिन फिर पॉलिटिकल साइंस से एमए किया. वो संस्कृत में भी काफी निपुण हैं.
कांग्रेस के संकटमोचक बने
महाराष्ट्र में जब 2002 में तत्कालीन सीएम विलासराव देशमुख की सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रही थी तो कांग्रेस के विधायकों को बेंगलुरु में शिवकुमार के फॉर्महाउस में एक हफ्टे ठहराया गया. इस तरह कांग्रेस विधायक एकजुट रहे और सरकार बच गई.गुजरात में 2017 के राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी विधायकों को एकजुट रखने की जिम्मेदारी निभाई. गुजरात कांग्रेस के 42 विधायक बेंगलुरु रिसॉर्ट में आकर ठहरे और अहमद पटेल राज्यसभा चुनाव जीत पाए.
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कांग्रेस और जेडीएस गठजोड़ में भूमिका
डीके शिवकुमार को राहुल गांधी और सोनिया गांधी का बेहद करीबी माना जाता है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के बाद जब त्रिशंकु विधानसभा जैसी स्थिति तो कांग्रेस और जेडीएस को करीब लाने में शिवकुमार की बड़ी भूमिका था, क्योंकि तब तक देवेगौड़ा और सिद्धारमैया में ठन चुकी थी.
डीके शिवकुमार पर आय से अधिक संपत्ति का मामला भी चल रहा है. हालांकि उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताया है और इसके खिलाफ अदालती लड़ाई लड़ने की बात कही है.













