- केरल की आईटी प्रोफेशनल शरण्या चार दिन तक कर्नाटक के जंगल में रास्ता भटक गई थीं और पानी पीकर जीवित रहीं
- बीजेपी नेताओं ने शरण्या की गुमशुदगी की कहानी पर संदेह जताते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की
- पुलिस ने अभी तक FIR दर्ज नहीं की है लेकिन याचिका के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है
केरल की रहने वाली आईटी प्रोफेशनल जीएस शरण्या ने कर्नाटक में ट्रैकिंग के दौरान चार दिनों तक लापता रहने के दौरान पानी पीकर गुजारा करने की बात कही है. उन पर अब कथित तौर पर लापता होने का नाटक करने के आरोप लग रहे है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. बीजेपी नेताओं की शिकायत के बाद उनके खिलाफ जांच शुरू की गई. दरअसल उनको शरण्या की गुमशुदगी की कहानी पर संदेह था.
36 साल की आईटी प्रोफेशनल शरण्या केरलम के कोझिकोड जिले के नादपुरम की रहने वाली हैं. 2 अप्रैल को वह कर्नाटक के कोडगु की सबसे ऊंची चोटी थाडियांडामोल पर ट्रैकिंग के लिए नकली थीं. उतरते समय वह अपने ग्रुप से अलग हो गईं और रास्ता भटक गईं. उन्होंने ग्रुप तक वापस पहुंचने की कोशिश की, लेकिन घने जंगल में फंसने की वजह से उन्हें चार दिन सिर्फ पानी पीकर गुजाने पड़े, ये कहना है खुद शरण्या का.
बीजेपी नेताओं को कहानी पर शक
कोडागु जिले में बीजेपी की ग्रामीण इकाई ने 7 अप्रैल को नापोकलू पुलिस स्टेशन में लापता शरण्या के मामले को लेकर चिंता जताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में पार्टी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं की वजह से उनको घटना को लेकर संदेह है. उन्होंने पुलिस से बिना किसी राजनीतिक दबाव के मामले की जांच करने की अपील की. बीजेपी नेताओं ने कहा कि उनको लगता है कि शरण्या ने झूठी कहानी बनाकर सरकार को नुकसान पहुंचाया. जनता को स्पष्टता और पारदर्शिता की मांग करने का अधिकार है. उन्होंने पुलिस से मामले की जांच करने और स्पष्टीकरण देने की भी अपील की. बता दें कि इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की है, लेकिन मामले की याचिका के आधार पर जांच करने का फैसला लिया है.
पुलिस को शरण्या की बात पर नहीं हुआ शक
बचाव दल में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने कहा, " रेक्स्यू ऑपरेशन के बाद जब हम उससे मिले और बात की, तो हमारे पास उसकी किसी भी बात पर शक करने का कोई कारण नहीं था. हालांकि, अब जब कुछ शक उठ रहे हैं, तो हम उस पहलू की भी जांच करेंगे. हम घटनाक्रम और उसके दावों की पूरी तरह से पड़ताल करेंगे."
शरण्या ने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने सुबह करीब 8 बजे ट्रेकिंग शुरू की और 10:40 बजे तक चोटी पर पहुंच गईं. वह 12 लोगों के एक ग्रुप के साथ ट्रैकिंग कर रही थीं. उतरने समय वह रास्ता भटक गईं.
शरण्या ने कहा कि चेकपोस्ट पर इंतजार कर रहे होमस्टे मालिक ने उनका फोन बंद होने से ठीक पहले उन्हें फोन किया. तो उन्होंने रास्ता भटकने की बात बताई. साथ ही उनसे अधिकारियों को सूचित करने के लिए भी कहा. उन्होंने मदद के लिए एक दोस्त को भी मैसेज करने की कोशिश की, लेकिन मैसेज भेजने से पहले ही उसका फोन बंद हो गया. फिर चमत्कार की उम्मीद में वहां धारा के पास बैठने के अलावा उनके पास कोई और रास्ता नहीं था. उसके पास 500 मिलीलीटर पानी की एक बोतल थी जिसे उन्होंने धारा से भर लिया.
शरण्या ने कहा कि वह अपने साथ खाना लेकर नहीं गई थीं. वह हर दिन तीन लीटर पानी पीकर ही गुजारा करती रही. शरण्या ने कहा कि जंगल में फंसे रहने के दौरन उनको बहुत ज्यादा डर नहीं लगा. रेक्स्यू टीम के सदस्यों के मुताबिक, लापता होने के चार दिन बाद, 5 अप्रैल को शरण्या को जंगल के एक सुनसान इलाके में स्थानीय लोगों के एक गुट ने देखा. वह ऐसी जगह पर थीं जहां आमतौर पर कोई नहीं जाता.
शरण्या पर आरोप क्या हैं?
जब से शरण्या के लापता होने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है, लोगों को उसकी कहानी पर यकीन नहीं हो रहा है. सोशल मीडिया यूजर्स इसे सिर्फ झूठी पब्लिसिटी बता रहे हैं. उनका कहना है कि चार दिन बिना खाना-पानी के भी वो काफी एनर्जेटिक दिख रही हैं, कुछ गड़बड़ है. लोगों का समय और संसाधन बर्बाद करने के लिए उसकी जांच होनी चाहिए और उस पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए. जंगली जानवरों से घिरे जंगल में उसका जिंदा रहना नामुमकिन था.
वहीं एक अन्य यूजर ने कहा, "उस पर भारी जुर्माना लगाया जाए और अगर प्रावधान हो तो टैक्सपेयर्स के पैसे को बर्बाद करने के लिए उसे जेल में डाल दिया जाए."













