बीजेपी नेता कृपा शंकर सिंह के बयान पर मुंबई में क्यों मचा हुआ है बवाल, क्या है उत्तर भारतीय बनाम मराठी का गणित

महाराष्ट्र बीजेपी के उपाध्यक्ष कृपा शंकर सिंह ने मुंबई महानगर क्षेत्र में किसी उत्तर भारतीय को मेयर बनाने की वकालत की है. उनके इस बयान ने मुंबई में उत्तर भारतीय बनाम मराठा की बहस को तेज कर दिया है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
नई दिल्ली:

देश की आर्थिक राजधानी मानी जानी वाली मुंबई में इन दिनों नगर निगम चुनाव की चर्चा है.बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनाव का मतदान 15 जनवरी को कराया जाएगा. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के बयान ने मुंबई महानगर क्षेत्र की राजनीतिक गर्मी में हलचल पैदा कर दी है. बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष कृपा शंकर सिंह ने कहा कि है मुंबई महानगर क्षेत्र में उत्तर भारतीय मेयर बनाएंगे.उनके इस बयान से उत्तर भारतीय बनाम मराठी की बहस एक बार फिर तेज हो गई है. इस बयान को लेकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना और उनके भाई राज ठाकरे की मनसे ने बीजेपी पर हमला बोला है. आइए जानते हैं कि कृपाशंकर सिंह के इस बयान के राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं. 

क्या कहा है कृपा शंकर सिंह ने

महाराष्ट्र बीजेपी के उपाध्यक्ष कृपा शंकर सिंह बुधवार को मीरा-भयंदर में चुनाव प्रचार करने गए थे. इस दौरान उनसे पूछा गया कि राज्य की नगर निगमों में उत्तर भारतीय मेयर क्यों नहीं बन पाते हैं. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा,''हम इतने पार्षद जिताएंगे कि उत्तर भारत का व्यक्ति मेयर बनेगा.'' उन्होंने मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में उत्तर भारतीय मेयर बनाने की बात कही है. उनके इस बयान के बाद से शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे को बीजेपी पर हमला करने का नया मौका मिल गया. मामले के तूल पकड़ता देख कांग्रेस से बीजेपी में आए कृपा शंकर सिंह ने एक वीडियो जारी कर सफाई दी. उन्होंने कहा कि बीजेपी का लक्ष्य महाराष्ट्र में महायुति को जीत दिलाना है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि महायुती 'हिंदू मेयर' चाहता है.

शिवसेना (यूबीटी) और मनसे उनके बयान से संतुष्ट नहीं हुईं. इस गठबंधन ने आरोप लगाया है कि बीजेपी बाहरी लोगों की राजनीति को बढ़ावा दे रही है. विवाद बढ़ता देख बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने कृपाशंकर सिंह के बयान से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह बयान पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं है. उन्होंने कहा कि मुंबई का मेयर कौन बनेगा, इसका फैसला मुख्यमंत्री करेंगे, न कि कोई एक नेता.

महाराष्ट्र की राजनीति में गैर मराठी

मुंबई की राजनीति हमेशा इस सवाल से जुड़ी रही है कि शहर पर किसका अधिकार है. आजादी के बाद संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के तहत मराठी भाषा वाले राज्य की मांग उठी, इसमें मुंबई को राजधानी बनाने की बात थी. इसी सोच से यह धारणा बनी कि मुंबई की राजनीतिक सत्ता मराठी लोगों के हाथ में रहनी चाहिए. यही वजह है कि जब उत्तर भारतीयों को संगठित राजनीतिक ताकत मिलने की बात होती है, तो कुछ लोग इसे मराठी पहचान के लिए खतरा मानते हैं.

Advertisement

1960 के दशक में मराठी युवाओं को संगठित कर शिवासेना ने खुद को मजबूत किया था. मराठी वोटों की राजनीति के तहत पहले उसने दक्षिण भारतीयों को निशाना बनाया और बाद में उत्तर भारतीयों को. यही वजह है कि आज भी जब उत्तर भारतीय अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग करते हैं तो उसे मराठी अस्मिता से जोड़ दिया जाता है. 

बीएमसी में गैर मराठी प्रतिनिधित्व

बीएमसी में पहले गैर-मराठी प्रतिनिधित्व अधिक था. बीएमसी में 1970 के दशक में करीब 45 फीसदी पार्षद गैर-मराठी थे. लेकिन 2017 के चुनाव में यह संख्या घटकर 33 फीसदी रह गई. साल 2017 के चुनाव में शिवसेना को 84 और बीजेपी को 82 सीटें मिली थीं. इस चुनाव में 76 गैर-मराठी उम्मीदवार जीते थे. यह बदलाव गैर मराठी और प्रवासी मतदाताओं के बीच बीजेपी की बढ़ती पहुंच की वजह से हुआ.केंद्र की सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने मुंबई में गैर मराठी नेताओं को आगे बढ़ाया है.इससे प्रवासी समुदायों में राजनीतिक आत्मविश्वास बढ़ा और वे एक अहम वोट बैंक बन गए हैं.

Advertisement

मुंबई की आबादी में हिंदी भाषियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक मुंबई में हिंदी को मातृभाषा बताने वालों की संख्या 2001 के मुकाबले 40 फीसदी से अधिक बढ़ गई. मराठी बोलने वालों की संख्या में थोड़ी गिरावट देखी गई थी. हालांकि आज भी मराठी भाषियों की संख्या मुंबई में सबसे अधिक है. लेकिन हिंदी भाषी तेजी से बढ़ रहे हैं.इसे मुंबई के साथ-साथ उसके आसपास के शहरों में भी देख सकते हैं.इसी वजह से मुंबई महानगर क्षेत्र में उत्तर भारतीयों की बढ़ती राजनीतिक भूमिका चर्चा का विषय हो गया है. 

ये भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव 2026: BSP साफ, विपक्ष हाफ, दांव पर 6 केंद्रीय मंत्री सहित 71 सांसदों का भविष्य
 

Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Baba Ramdev Exclusive: Brij Bhushan पर सवाल, रामदेव ने कहा डिलीट कर दो | Chakravyuh
Topics mentioned in this article