- कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने भारत-अमेरिका समझौते को अंतिम नहीं बल्कि एक अंतरिम व्यापार समझौता बताया है
- दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षरित समझौते के दस्तावेज सार्वजनिक न होने पर चिदंबरम ने सवाल उठाए हैं
- उन्होंने धारा 232 की जांच से जुड़ी जानकारी सरकार द्वारा छुपाने की आलोचना की और पारदर्शिता की मांग की
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने आज तर्क दिया कि भारत और अमेरिका के बीच जो समझौता हुआ है, वह कोई समझौता नहीं, बल्कि एक अंतरिम समझौता है, जिसे "द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement)" के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. एनडीटीवी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित किसी भी समझौते के दस्तावेज के सार्वजनिक न होने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "हमें केवल व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक संयुक्त बयान ही उपलब्ध कराया गया है... मैं केवल संयुक्त बयान के आधार पर ही राय दे सकता हूं और संयुक्त बयान को पढ़कर मैं कह सकता हूं कि यह अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ है."
'ये अंतिम समझौते का मार्ग'
चिदंबरम ने यह भी कहा कि धारा 232 की जांच से संबंधित जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है. तो इन दस्तावेजों और जांच के विवरण के बिना आप संयुक्त बयान से क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं? मैं केवल इसी निष्कर्ष पर पहुंच सकता हूं कि यह एक अंतरिम समझौते का ढांचा है, जो संभावित रूप से अंतिम समझौते का मार्ग प्रशस्त कर सकता है.
'सरकार क्यों कतरा रही है?'
जब उनसे पूछा गया कि वे सरकार से क्या अपेक्षा करते हैं, तो उन्होंने कहा, "सरकार राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी आदेशों का खुलासा करने से क्यों कतरा रही है... सरकार को हमें बताना चाहिए कि वे आदेश क्या हैं." उन्होंने आगे कहा, "सरकार धारा 232 की जांच के बारे में खुलासा करने से क्यों कतरा रही है? शायद सरकार को खुद ही पता नहीं है. अगर सरकार को पता नहीं है, तो उसने संयुक्त बयान क्यों जारी किया?" उन्होंने भारत की "राजनयिक जीत" कहे जाने वाले इस कदम का भी उपहास किया.
'कूटनीतिक जीत कैसे'
चिदंबरम ने कहा, "राजनयिक जीत क्या है? मुझे नहीं पता. जयशंकर ने कहा कि उन्हें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बारे में कुछ नहीं पता. तो अगर विदेश मंत्री को ही नहीं पता और वे स्पष्ट रूप से नहीं बताते... तो मैं इसे कूटनीतिक जीत कैसे मान सकता हूं?" उन्होंने यह भी कहा कि समझौते में मौजूद "असमरूपता" उनके लिए चिंता का विषय है.
'पहले की तुलना में बढ़े'
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि हालांकि भारत ने टैरिफ खत्म करने या कम करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन अमेरिका इसे 18 प्रतिशत पर बनाए रखेगा, जिसे अंतिम समझौते के बाद ही खत्म या कम किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा, "अप्रैल 2025 से पहले टैरिफ क्या थे? यह औसतन दो से तीन प्रतिशत के बीच थे. कुछ वस्तुओं पर यह थोड़ा अधिक हो सकता था... अप्रैल 2025 से पहले के टैरिफ की तुलना में यह एक बहुत बड़ी वृद्धि है." उन्होंने बताया कि यह वृद्धि भारत के सभी प्रमुख निर्यातों पर लागू होगी, जिनमें समुद्री भोजन, चमड़े के उत्पाद और वस्त्र शामिल हैं.













