शशि थरूर पर कांग्रेस आलाकमान मेहरबान, केरल में मिली अहम ज़िम्मेदारी 

शशि थरूर काफ़ी समय से अपने बयानों से पार्टी आलाकमान को असहज कर रहे थे और पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों से भी दूरी बनाई हुई थी. कांग्रेस में थरूर की ख़ास अहमियत भी नजर नहीं आ रही थी. ऐसे लग रहा था मानों दोनों तरफ़ से शीत युद्ध चल रहा हो.

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  • कांग्रेस ने शशि थरूर को केरल विधानसभा चुनाव में प्रचार अभियान समिति का सह प्रमुख नियुक्त किया है
  • तिरुवनंतपुरम से चार बार सांसद थरूर को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अहम ज़िम्मेदारी सौंपी है
  • कैंपेन कमिटी में युवा नेताओं के साथ नायर समुदाय के प्रभावशाली नेता थरूर और रमेश चेन्नीथला को जगह मिली है
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नई दिल्ली:

कांग्रेस में शशि थरूर को अहमियत मिलनी शुरू हो गई है. संसद के बजट सत्र में कांग्रेस ने उन्हें सबसे पहले बोलने का मौका दिया और अब थरूर को पार्टी अध्यक्ष खरगे ने केरल विधानसभा चुनाव में अहम ज़िम्मेदारी सौंपी है. तिरुवनंतपुरम से लगातार चार बार के सांसद और कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य थरूर को केरल में कैंपेन कमिटी (प्रचार अभियान समिति) का सह प्रमुख बनाया गया है. अनुभवी नेता रमेश चेन्नीथला को कैंपेन कमिटी का प्रमुख बनाया गया है. दस सदस्यीय कैंपेन कमिटी में चेन्नीथला और थरूर के अलावा सभी युवा नेताओं को जगह दी गई है. 

कांग्रेस संगठन के लिहाज़ से विधानसभा चुनाव में कैंपेन कमिटी प्रमुख को प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल का नेता के बराबर सीएम पद का दावेदार माना जाता है. चेन्नीथला और थरूर दोनों राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली नायर समुदाय से आते हैं जिस पर केरल में तेज़ी से पैर पसार रही बीजेपी की नज़र हैं. ऐसे में कांग्रेस ने इस वोट बैंक पर पकड़ बनाए रखना चाहती है. 

कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और केरल में कांग्रेस विधायक दल के नेता वीडी सतीशन भी नायर हैं. वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सन्नी जोसफ ईसाई हैं. विधानसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र तैयार करने की समिति (मैनिफेस्टो कमिटी) की ज़िम्मेदारी बेनी बेहनन को सौंपी गई है. बेनी ईसाई समुदाय से हैं. 

शशि थरूर काफ़ी समय से अपने बयानों से पार्टी आलाकमान को असहज कर रहे थे और पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों से भी दूरी बनाई हुई थी. कांग्रेस में थरूर की ख़ास अहमियत भी नजर नहीं आ रही थी. ऐसे लग रहा था मानों दोनों तरफ़ से शीत युद्ध चल रहा हो. इस पर जनवरी के आख़िरी हफ्ते में विराम लगा  जब संसद में थरूर की राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दो घंटे लंबी बैठक हुई. इस दौरान थरूर और राहुल गांधी ने गिले शिकवे दूर किए जिसके बाद थरूर ने "ऑल इस वेल" का संदेश दिया. 

अब कांग्रेस आलाकमान थरूर पर मेहरबान है. दो हफ्तों में ही शशि थरूर को केरल में बड़ी ज़िम्मेदारी सौंप कर कांग्रेस ने संदेश दिया है कि उसे थरूर की अहमियत का एहसास है. भले की थरूर की संगठन पर पकड़ ना हो लेकिन आम लोगों के बीच वो काफ़ी लोकप्रिय हैं और बुद्धिजीवी माने जाते हैं. थरूर की इसी लोकप्रियता को कांग्रेस विधानसभा चुनाव में भुनाना चाहती है साथ ही इसमें एकजुटता का संदेश भी छिपा है. 

केरल चुनाव में प्रचार समिति के सह प्रमुख बनाए गए थरूर के पैर में मोच पड़ गई थी. थरूर कुछ दिनों पहले संसद की सीढ़ियों पर फिसल गए थे. इस वजह से वो एक हफ्ते से व्हील चेयर पर संसद आ रहे हैं. लेकिन उनके करीबी लोगों के मुताबिक़ दो हफ़्ते में पूरी तरह ठीक हो जाएंगे और फिर पार्टी के निर्देश के मुताबिक पूरे राज्य में प्रचार करेंगे.केरल में कांग्रेस का मुक़ाबला सीपीएम से है जो राज्य में दस सालों से सत्ता में है. वहीं बीजेपी का उभार भी कांग्रेस के लिए चुनौती है. 

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