पैलेट गन मामले में राहुल गांधी के धरने के बाद शिकायत दर्ज, जानिए FIR में क्या लिखा है?

पैलेट गन मामले में दिल्ली पुलिस ने शिकायत दर्ज की है, उसे लेकर कुछ जानकारी भी सामने आई है. यहां जानते हैं कि FIR में क्या-क्या बताया गया है.

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साहिल के साथ राहुल गांधी
ANI

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद मार्थ स्थित डीसीपी कार्यालय के बाहर धरना दिया था, उस धरने के बाद पैलेट गन मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है. कांग्रेस इसे नौजवानों की जीत करार दे रही है. राहुल गांधी ने तो पुलिस कार्रवाई के बाद भी केंद्र पर निशाना साधा है. उनके मुताबिक न्याय मिलने में जो देरी हो रही है, वो चिंता का विषय है. 

FIR में क्या लिखा है?

वैसे अब पैलेट गन मामले में दिल्ली पुलिस ने शिकायत दर्ज की है, उसे लेकर कुछ जानकारी भी सामने आई है. असल में दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 के तहत FIR दर्ज की है। यहां भी BNS की धारा 118 खतरनाक हथियारों से जान-बूझकर चोट या गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है, वहीं धारा 125 दूसरों की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़ी है. अब इन दोनों ही धाराओं को FIR में शामिल किया गया है और की कार्रवाई इसी के तहत होगी.

शिकायतकर्ता साहिल लोचब, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से पढ़ाई कर रहे हैं, का कहना है कि वे 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे. यह प्रदर्शन 2025 की दिल्ली पुलिस परीक्षा में गड़बड़ी और नीट पेपर लीक के खिलाफ था. उनका दावा है कि कनॉट प्लेस के पास लाठीचार्ज और भगदड़ के बीच नीली वर्दी पहने एक व्यक्ति ने पास से उन पर धातु के छर्रे दागे, जो उनकी छाती, बांह और दाहिनी आंख पर लगे.

शिकायतकर्ता साहिल ने क्या बताया?

साहिल के मुताबिक डॉक्टरों ने बताया कि उनकी दाहिनी आंख की रोशनी लौटने की उम्मीद एक फीसदी से भी कम है. एम्स में हुए सीटी स्कैन में उनके शरीर में 200 से ज्यादा छर्रे पाए गए, जो आंख, गर्दन, दिल के पास छाती, जबड़े और बांह में फंसे हैं. इनमें से कुछ छर्रे निकाले नहीं जा सकते और हमेशा के लिए शरीर में ही रह जाएंगे. इलाज के दौरान लेडी हार्डिंग और सफदरजंग होते हुए उन्हें आखिर में एम्स भेजा गया, जहां 22 जुलाई और 1 अगस्त को उनकी आंख की दो सर्जरी हुईं.

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साहिल ने पुलिस से मांग की है कि जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस, पटेल चौक, राजीव चौक मेट्रो और ट्रैफिक पुलिस के सीसीटीवी व ड्रोन फुटेज सुरक्षित रखे जाएं. साथ ही उनकी सर्जरी में निकाले गए छर्रों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए, चारों अस्पतालों से उनके इलाज के कागजात मंगवाए जाएं और लंबे इलाज को देखते हुए मुआवजे पर विचार किया जाए.

जांच की जिम्मेदारी एसआई मोहित वर्मा (नंबर 16210117) को सौंपी गई है, जिन्होंने ही रुक्का तैयार किया था. ड्यूटी ऑफिसर एसआई मारा राम ने कांस्टेबल ज्योति की मदद से सीसीटीएनएस पर एफआईआर दर्ज की. शिकायतकर्ता ने अपना बयान दर्ज कराने और जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है.
 

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पैलेट गन मामला क्या है?

जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन चला था. यहां भी पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था, प्रदर्शकारियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई थी. उसी कार्रवाई को लेकर दावा किया गया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया. विपक्ष ने भी इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया. इसी कड़ी में साहिल के रूप में एक पीड़ित भी सामने आया जिससे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुलाकात की और उसे न्याय दिलवाने की मांग की. 

अब पैलेट गन मामले में पुलिस एक्शन की जांच तो अभी भी जारी है, इस बीच अब साहिल को लगी चोटों को देखते हुए एक अलग FIR दर्ज कर ली गई है. FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने भी मीडिया से बात करते हुए कई मुद्दों पर जोर दिया है.

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस तो FIR दर्ज करना चाहती थी, लेकिन ऊपर वालों ने न्याय पर ब्रेक लगा दिया था. नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस की इस कार्रवाई को न्याय की दिशा में पहला कदम बताया. राहुल गांधी ने कहा कि यह न्याय की दिशा में पहला कदम है। केस दर्ज हुआ है। इनके शरीर में छर्रे (पेलेट्स) हैं; इनकी आंख में तीन छर्रे हैं। आंख से दिखाई नहीं देता है। तीन या चार उसके दिल के पास हैं। इस नौजवान के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। हम आज सुबह या बजे यहां पहुंचे थे। अब जाकर FIR दर्ज हुई है। ये दिल्ली के बीच में पुलिस स्टेशन है यहां न्याय नहीं मिल रहा है।

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कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि सोचिए कि किसी गांव या छोटे शहर के पुलिस स्टेशन में क्या होता होगा। हमने यहां कुछ गलत नहीं किया; हमने बस एक भारतीय नागरिक उसके माता-पिता के लिए न्याय मांगा और उसमें 8 घंटे लग गए। आखिरी मंज़ूरी होम सेक्रेटरी और अमित शाह को देना पड़ा। उसके बाद ही FIR दर्ज हो पाई। आप समझ सकते हैं कि FIR को कौन रोक रहा था। ये पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करना चाहते थे; लेकिन ऊपर से न्याय के ब्रेक लगे हुए हैं।

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