सांप्रदायिक कटुता देश की सबसे बड़ी कमजोरी : पूर्व राष्ट्रपति कोविन्द

पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, 'जब से यह देश अस्तित्व में आया, सांप्रदायिक तनाव खत्म नहीं हुए हैं और मुझे आज भी लगता है कि ये खत्म नहीं होंगे.' उन्होंने कहा कि शुरुआती वर्षों में सौहार्दपूर्ण माहौल को बढ़ावा देने की कोशिश करने वाले कई नेताओं ने कहा कि हम पहले भारतीय हैं और उसके बाद हिंदू या मुस्लिम. लेकिन आंबेडकर उससे बहुत आगे चले गए.

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औरंगाबाद: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को यहां कहा कि सांप्रदायिक कटुता और तनाव शुरू से ही देश के लिए अभिशाप रहे हैं और यह भारत की 'सबसे बड़ी कमजोरी' है. वह डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय में एक समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा, 'आजादी के पहले और जब संविधान का मसौदा तैयार किया जा रहा था, उस दौरान (देश में) सांप्रदायिक कटुता का माहौल था. कभी-कभी मुझे लगता है कि यह हमारे देश की सबसे बड़ी कमजोरी रही है.'

पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, 'जब से यह देश अस्तित्व में आया, सांप्रदायिक तनाव खत्म नहीं हुए हैं और मुझे आज भी लगता है कि ये खत्म नहीं होंगे.' उन्होंने कहा कि शुरुआती वर्षों में सौहार्दपूर्ण माहौल को बढ़ावा देने की कोशिश करने वाले कई नेताओं ने कहा कि हम पहले भारतीय हैं और उसके बाद हिंदू या मुस्लिम लेकिन आंबेडकर उससे बहुत आगे चले गए.

कोविंद ने कहा, 'वह (डॉ. आंबेडकर) कहते थे, हम पहले भारतीय हैं और बाद में भी भारतीय हैं. इस तरह, हम सदा भारतीय हैं.' उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए प्रयास करना चाहिए.

इस अवसर पर, कोविंद ने मराठवाड़ा के पद्म पुरस्कार विजेताओं को भी सम्मानित किया जिनमें शब्बीर सैय्यद, गिरीश प्रभुणे, दादासाहेब विधाते, रमेश पतंगे और प्रभाकर मंडे शामिल हैं. कृषि विशेषज्ञ श्रीरंग लाड को भी सम्मानित किया गया.

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उन्होंने क्षेत्र के दिवंगत पद्म पुरस्कार विजेताओं जैसे पत्रकार फातिमा जकारिया, लेखक वाई एम पठान और गंगाधर पेंटावने के परिवार के सदस्यों को भी सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति प्राचीन है लेकिन यह सबसे अधिक युवाओं की आबादी वाला देश भी है और विकास हासिल करते समय युवाओं की ऊर्जा का उपयोग महत्वपूर्ण है.

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