CISF की 'ग्रेट इंडियन कोस्टल साइक्लोथॉन' का कन्याकुमारी में हुआ भव्य समापन

सायक्लोथॉन का उद्देश्य तटीय समुदायों को भारत की तटरेखा से जुड़े विभिन्न सुरक्षा खतरों के बारे में जागरूक करना था, जिसमें तस्करी (जैसे नशीले पदार्थ, हथियार और विस्फोटक सामग्री) जैसी अवैध गतिविधियाँ, घुसपैठ के खिलाफ सतर्कता की आवश्यकता, और इन पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के महत्व के प्रति जन जागरूकता फैलाना था.

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इस साइक्लोथॉन के दौरान 1,200 से अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न चरणों में इसमें भाग लिया
नई दिल्ली:

सीआईएसएफ की अपनी 'सुरक्षित तट, समृद्ध भारत' थीम पर आधारित ऐतिहासिक पहल 'ग्रेट इंडियन कोस्टल साइक्लोथॉन 2025' का शानदार समापन कन्याकुमारी में हुआ. इस अवसर पर प्रतिभागियों ने तटीय क्षेत्रों की सुंदरता, उपयोगिता और महत्व को उजागर किया, साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया. यह साइक्लोथॉन भारत के विस्तृत तटीय क्षेत्र की सुरक्षा में तटीय समुदायों के साथ सामूहिक साझेदारी की शुरुआत का प्रतीक है. इस अभियान ने तटीय सुरक्षा और सतत विकास के लिए एक नई दिशा दिखाई है, जिससे देश के दीर्घ तटरेखा को सुरक्षित और संरक्षित रखने में ठोस मदद मिलेगी.

यात्रा में 125 CISF साइकिल चालक ने लिया था हिस्सा

इस  साइक्लोथॉन को 7 मार्च 2025 को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा राजदित्य चोल सीआईएसएफ क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, तक्कोलम, रानीपेट जिला, तमिलनाडु से वर्चुअल रूप से झंडी दिखाकर शुरू किया गया था. इस चुनौतीपूर्ण यात्रा में 125 CISF साइकिल चालक ने हिस्सा लिया. इसमें 14 महिला बल सदस्य भी शामिल थीं. इन साइकिल चालकों ने कुल 6,553 किमी की दूरी तय की, जो 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से होकर 25 दिनों तक चली.

1,200 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया भाग

इस साइक्लोथॉन के दौरान 1,200 से अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न चरणों में इसमें भाग लिया, जिससे इस पहल के प्रति जनता का मजबूत और व्यापक समर्थन सामने आया. इस साइक्लोथॉन को सीआईएसएफ की तटीय क्षेत्रों में स्थित  विभिन्न इकाइयों के बल सदस्यों  के साथ-साथ अन्य राज्य और केंद्रीय सरकार की एजेंसियों से समर्थन और महत्वपूर्ण सहयोग मिला. देश के प्रमुख तटीय शहरों और महत्वपूर्ण स्थलों, जैसे पारादीप पोर्ट, कोणार्क सूर्य मंदिर, गेटवे ऑफ इंडिया (मुंबई), विशाखापत्तनम, मैंगलोर, चेन्नई, कोचीन तथा पुडुचेरी में भव्य स्वागत और फ्लैग-ऑफ समारोह आयोजित किए गए, जिसने साइक्लोथॉन के संदेश को और अधिक प्रभावशाली और व्यापक रूप से फैलाया.

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इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय निवासियों को "तट प्रहरी" के रूप में सम्मानित करना और उनके अमूल्य योगदान को मान्यता देना था. इस प्रयास का उद्देश्य इन समुदायों को सशक्त बनाना भी था, जिससे वे तटीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में सुरक्षा बलों  की  "आंख और कान" की भूमिका को प्रभावी रूप से निभा सकें और राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा में अहम भूमिका अदा करें.

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सायक्लोथॉन का उद्देश्य तटीय समुदायों को भारत की तटरेखा से जुड़े विभिन्न सुरक्षा खतरों के बारे में जागरूक करना था, जिसमें तस्करी (जैसे नशीले पदार्थ, हथियार और विस्फोटक सामग्री) जैसी अवैध गतिविधियाँ, घुसपैठ के खिलाफ सतर्कता की आवश्यकता, और इन पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के महत्व के प्रति जन जागरूकता फैलाना था. इस साइक्लोथॉन ने सीआईएसएफ, अन्य सुरक्षा एजेंसियों और तटीय समुदायों के बीच संचार और सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इन संवादों ने साझेदारी और साझा जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा दिया है, जो एक मजबूत और लचीले तटीय सुरक्षा ढांचे के निर्माण के लिए आवश्यक है.

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अपनी सुरक्षा केंद्रित उद्देश्य के अलावा, इस साइक्लोथॉन का उद्देश्य भारत के आंतरिक क्षेत्र के समुदायों को देश के मनमोहक तट से जोड़ना भी था. यह तटीय समुदायों की जीवंतता, उनके वनस्पति और जीव-जंतु, तथा उन अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं को उजागर करने का एक अवसर था, जो भारत की तटीय पहचान को परिभाषित करती हैं.

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