- नितिन नबीन को 45 वर्ष की उम्र में BJP का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, आज वो अपना पदभार ग्रहण करेंगे.
- नितिन नबीन ने चुनावी राज्यों का दौरा कर अपनी सक्रियता और संगठन मजबूत करने का परिचय पहले ही दे दिया है.
- बीजेपी ने नितिन नबीन के नेतृत्व से पूर्वी भारत को राजनीतिक संदेश दिया और युवाओं को पार्टी में महत्व दिया है.
“मैं 24 घंटे राजनीति करने वालों में से हूं”- BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) जब यह बात अपने कुछ सहयोगियों से कह रहे थे, तब वे कई बातों की ओर इशारा कर रहे थे. एक इशारा तो यह भी था कि भारत की राजनीति के हिसाब से उनकी उम्र चाहे कच्ची हो लेकिन उन्हें राजनीति का कच्चा खिलाड़ी न समझा जाए. दूसरा इशारा या यूं कहें कि राजनीतिक वार राहुल गांधी पर था, जिन्हें कांग्रेस युवा नेता के तौर पर पेश करती है लेकिन BJP उनके विदेश दौरों को लेकर उनकी राजनीति में गंभीरता को लेकर प्रश्न पूछती रहती है.
केवल 45 वर्ष की उम्र में विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल की कमान मिलने से नितिन नबीन जितने हैरान नहीं हैं, उससे कहीं अधिक पार्टी के वे नेता हैरान हैं, जो इस उम्मीद में थे कि शायद उनका नंबर आएगा. लेकिन मोदी-शाह चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं.
नितिन नबीन के अध्यक्ष बनाने के फैसले से बहुतों को चौंकाया
नितिन नबीन के इस फैसले ने बहुत लोगों को चौंकाया. एक ऐसे समय जब यह मान कर चला जा रहा था कि BJP की कमान तीसरी पीढ़ी को मिलेगी, अचानक छलांग लगा कर चौथी पीढ़ी ने कुर्सी पर कब्जा कर लिया. इस तरह संगठन में अचानक वे नेता अपने आप को अप्रांसगिक पाने लगे जो खुद को तीसरी पीढ़ी में गिनते आए हैं.
नबीन को कमान... बीजेपी के कॉर्पोरेट स्टाइल
उम्र और अनुभव में अपने से छोटे नेता के साथ कदमताल करने में शायद कई असहज भी महसूस करेंगे. लेकिन यह वही कॉर्पोरेट स्टाइल है जिसके लिए पिछले एक दशक से BJP जानी जाती है. बोर्ड रूम से अक्सर अनुभवी लोग ठीक वैसे ही खिसका कर बाहर कर दिए जाते हैं जिस तरह चेस बोर्ड से एक के बाद एक मोहरे खिसका कर बाहर किए जाते हैं. BJP ने पीढ़ी का सफलतापूर्वक बदलाव कर यह दिखाया भी है.
बीजेपी के इन फैसलों से समझें पार्टी का कॉर्पोरेट स्टाइल
आप इसे इस तरह देखें- मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में BJP ऐतिहासिक जीत हासिल करती है लेकिन उन्हें दिल्ली लाया जाता है और उन्हीं के मंत्रिमंडल के एक सहयोगी को मुख्यमंत्री बना दिया जाता है. असम में सर्वानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में BJP फिर जीतती है लेकिन हिमंता बिस्वा सरमा को कमान सौंप दी जाती है.
राजस्थान, गुजरात, यूके, सीजी, ओडिशा लंबी है फेहरिस्त
राजस्थान और गुजरात में विधायक दल की बैठक में सबसे पीछे की पंक्ति में बैठे ऐसे नेताओं को राज्य की कमान सौंप दी जाती है जो यह जिम्मेदारी पाकर खुद भी हैरान हो जाते हैं. उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी को चुनाव हारने के बावजूद मुख्यमंत्री बनाए रखा जाता है और छत्तीसगढ़-ओडिशा में ऐसे नाम तय हो जाते हैं जिन्होंने खुद भी इस बारे में नहीं सोचा होगा.
इन सभी राज्यों में ऐसे कई नेता थे, जो खुद को सीएम का दावेदार मान कर बैठे हुए थे लेकिन मोदी और शाह ने अलग फैसला किया. इन फैसलों के मेरिट पर बहस हो सकती है लेकिन ये फैसले इसलिए हुए क्योंकि पिछले एक दशक में BJP का नेतृत्व बेहद ताकतवर हुआ है.
नितिन नबीन पर बहुत पहले से थी बीजेपी नेतृत्व की नजर
बहुत साल पहले जब एक बड़े नेता से पूछा गया था कि क्या बिहार में BJP इसलिए छोटा भाई बनने को तैयार रहती है क्योंकि उसके पास सुशील मोदी के जाने के बाद अपना कोई बड़ा चेहरा नहीं है तो उनका जवाब था कि ऐसा नहीं है बल्कि बिहार BJP के पास कई ऐसे नेता हैं जो समय आने पर कमान संभाल सकते हैं. उन्होंने जो नाम गिनाने शुरू किए थे उसमें पहला नाम नितिन नबीन का ही था. जिस तरह उन्हें छत्तीसगढ़ और मिजोरम की जिम्मेदारी दी गई और बिहार चुनाव में भी उनके प्रबंधन का जायजा लिया गया, ये सब बातें उनके पक्ष में गईं.
चुनावी राज्यों का दौरा कर नबीन दिखा चुके तेवर
नितिन नबीन की कहानी अब शुरू हुई है. कुछ लोगों से उन्होंने कहा भी है कि वे निराश नहीं करेंगे. अपने तेवरों का परिचय उन्होंने चुनावी राज्यों का दौरा कर ही दे दिया. पिछले एक महीने में वे पुड्डुचेरी, तमिलनाडु, असम और केरल का दौरा कर आए हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते ही सबसे पहले वे पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे.
तमिलनाडु में नितिन नबीन.
नबीन काल में महाराष्ट्र निकाय चुनाव में मिली जीत
उनके कार्यकारी अध्यक्ष रहते ही महाराष्ट्र में निकाय चुनावों में बीजेपी ने जबर्दस्त कामयाबी हासिल की. वैसे इसमें उनकी कोई बड़ी भूमिका नहीं है, लेकिन इसे एक शुभ संकेत के रूप में देखा गया है. यह संयोग नहीं है कि एकनाथ शिंदे ने दिल्ली के हिन्दी अखबारों में शिवसेना के महाराष्ट्र में BJP के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने के जो विज्ञापन छपवाए उनमें नितिन नबीन का फोटो भी प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के साथ चमक रहा था.
इस साल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव, बंगाल चुनाव सबसे बड़ी चुनौती
बीजेपी इस शुभ नवीन संकेत को लेकर उत्साहित है. पार्टी को लगता है कि इस साल होने वाले पांच विधानसभा चुनावों में जरूर नितिन नबीन के आने से कोई कमाल होगा. खासतौर से असम को लेकर बीजेपी नेता आश्वस्त हैं कि वहां हैट्रिक होना तय है. पश्चिम बंगाल में नितिन नबीन के कायस्थ समुदाय से आने की बात उछाली जाएगी. आखिर कायस्थ राज्य में उस भद्रलोक का हिस्सा हैं जिसकी आबादी 15-20 प्रतिशत तक मानी जाती है. इसलिए नितिन नबीन को बीजेपी बंगाल में भी आगे रखेगी.
नड्डा जैसी ना हो शुरुआत... दबे स्वर में चर्चा
तमिलनाडु, केरल और पुड्डुचेरी में संगठन मजबूत करने और सहयोगियों के साथ बेहतर तालमेल पर जोर दिया जाएगा. दबे स्वर में कुछ नेता कहते हैं कि छह साल पहले जनवरी 2020 में जब जेपी नड्डा अध्यक्ष बने थे, तब उसके अगले ही महीने फरवरी में बीजेपी दिल्ली का चुनाव हार गई थी. इसलिए वे उम्मीद करते हैं कि शायद नबीन बीजेपी की कुछ नवीन ही कहानी लिखें.
नबीन को नेतृत्व सौंप बीजेपी ने युवा नेतृत्व को दिया मौका
2025 में जेन-ज़ी दुनिया के सबसे प्रचलित शब्दों में से एक रहा. भारत के पड़ोसी देशों में जेन जी ने सड़कों पर उतर कर सरकारें बदल दीं. वहीं भारत में बीजेपी ने राजनीति के जेन ज़ी को कमान सौंप कर यह संदेश दिया है कि वह न केवल युवाओं पर भरोसा करती है बल्कि युवा नेतृत्व तैयार भी करती है.
भाजपा के अध्यक्ष 45 तो कांग्रेस के अध्यक्ष 83 साल के
बीजेपी के नेता कहते हैं एक ओर भारत की सबसे पुरानी पार्टी की कमान 83 साल के बुजुर्ग मल्लिकार्जुन खरगे के कंधों पर है तो वहीं विश्व की सबसे बड़ी पार्टी की कमान केवल 45 साल के युवा के हाथों में है. यह केवल संयोग नहीं है कि नितिन नबीन को ऐसे समय अध्यक्ष बनाया गया है जब पिछले साल ही स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले के प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने एक लाख युवाओं को राजनीति में लाने की बात कही थी.
नबीन के जरिए बीजेपी ने पूर्वी भारत को दिया बड़ा संदेश
बीजेपी ने नितिन नबीन के जरिए पूर्वी भारत को भी बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. आज तक बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष देश के पूर्वी हिस्से से नहीं था. बीजेपी यह कहना चाह रही है कि उसका फोकस केवल उत्तर या पश्चिम ही नहीं बल्कि पूर्व भी है. बिहार, बंगाल, ओडिशा, असम और उत्तर-पूर्व जैसे राज्यों में बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है.
अब टीम नबीन पर होगी सबकी नजरें
टीम नबीन पर भी सबकी नजरें होंगी. नितिन नबीन से उम्र और अनुभव में बड़े कई नेताओं को इसमें जगह मिलती है या नहीं यह देखना होगा. कहा गया है कि उनकी टीम में युवाओं और अनुभवी नेताओं का संतुलन होगा. साथ ही क्षेत्रीय संतुलन भी कायम किया जाएगा ताकि आने वाले चुनावों के हिसाब से पार्टी तैयार रहे.
महिलाओं की बड़ी भागीदारी तय
महिलाओं की बड़ी भागीदारी तय है क्योंकि बीजेपी संगठन की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित है. पार्टी की सर्वोच्च निर्णायक संस्था संसदीय बोर्ड में क्या पहले की तरह कद्दावर नेताओं को जगह मिलेगी, या फिर वर्तमान स्वरूप बरकरार रहेगा जिसमें कम चर्चित चेहरों को जगह दी गई है, यह प्रश्न भी हवा में तैर रहा है. क्या प्रदेशों से कई चेहरों को दिल्ली लाया जाएगा, जैसे खुद नितिन नबीन को लाया गया है.
अगला लोकसभा चुनाव नबीन की अगुआई में ही
यह बीजेपी का नबीन अध्याय कहा जा रहा है. अगले लोकसभा चुनाव तक पार्टी के पोस्टरों पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ नितिन नबीन का मुस्कराता चेहरा नजर आने वाला है. यह तय है कि चाहे उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक हो लेकिन इसमें विस्तार देकर अगला लोक सभा चुनाव भी उन्हीं की अगुवाई में लड़ा जाएगा.
- इससे पहले हर साल कई बड़े राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं, जिनमें इस साल के 5 राज्यों के अलावा अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, गोवा, पंजाब और मणिपुर के चुनाव हैं.
- 2028 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव होंगे और 2029 में लोक सभा के साथ आंध्र प्रदेश, ओडिसा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के. इनमें से अधिकांश राज्यों में बीजेपी या तो खुद या फिर सहयोगियों के साथ सत्ता में है. सत्ता में वापसी करना एक बड़ी चुनौती तो है ही.
2029 की लड़ाई सबसे बड़ी चुनौती होगी
साथ ही 2029 में पीएम मोदी के नेतृत्व में लगातार चौथी बार जीतने की चुनौती भी है ताकि इतिहास बनाया जा सके. नितिन नबीन से बीजेपी को यह उम्मीद रहेगी कि वे संगठन की मजबूती पर ध्यान दें ताकि पार्टी इस बड़े लक्ष्य को हासिल कर सकें.
एक बड़े नेता का कहना था कि नितिन नबीन को कमान इसलिए दी गई है ताकि उनके जैसे नेताओं को आगे कर 2047 में विकसित भारत बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके. यह बीजेपी की दूरगामी सोच का परिचायक है. अब देखना होगा कि वे इन अपेक्षाओं पर किस हद तक खरा उतरते हैं.
यह भी पढ़ें - नितिन नबीन निर्विरोध चुने गए BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष, चुनाव से आरक्षण तक... जानें क्या-क्या होंगी चुनौतियां













