कांग्रेस-DMK में 'तलाक' के बाद बीजेपी क्यों हुई एक्टिव, संसद का नंबरगेम समझ लीजिए

बीजेपी ने संसद में दो तिहाई बहुमत के आंकड़े के लिए अब कई प्लान पर काम करने में जुटी है. पार्टी ऐसे दलों से भी संपर्क साध सकती है जो कभी एनडीए का हिस्सा रही थी.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
बीजेपी का संसद में मिशन दो तिहाई का क्या है प्लान
नई दिल्ली:

तमिलनाडु के राजनीतिक घटनाक्रम की गूंज अब राजधानी दिल्ली में सत्ता के गलियारों में सुनाई देने लगी है. कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने के बाद संसद में कांग्रेस से अलग बैठने की डीएमके की गुजारिश ने सत्तारूढ़ बीजेपी को चौकन्ना कर दिया है. बीजेपी को अब इसमें आगे की संभावनाएं नजर आने लगी हैं. सूत्रों के मुताबिक संसद में एनडीए को डीएमके के समर्थन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. महिला आरक्षण के संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार लोक सभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी थी. हालांकि परिसीमन का पुरजोर विरोध करने में डीएमके सबसे आगे थी. परंतु राजनीति संभावनाओं की कला है जिसमें कुछ भी स्थायी नहीं.

DMK के सामने क्या रास्ता?

एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि क्षेत्रीय दलों के लिए केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर विपक्ष में रहना आसान नहीं होता. खासतौर से डीएमके के लिए परिस्थितियां अधिक चुनौतीपूर्ण हैं क्योंकि उसे एक नई-नवेली पार्टी ने हराया है. टीवीके ने छह दशक से चले आ रहे द्रविड़ दलों के वर्चस्व को समाप्त कर दिया. डीएमके केंद्र में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के साथ रही है. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में डीएमके शामिल थी. बाद में वह यूपीए का भी हिस्सा बनी. ऐसे में उसे फिर से बीजेपी के साथ आने में परेशानी नहीं होनी चाहिए. हालांकि सनातन के मुद्दे पर डीएमके का कड़ा रुख उसे बीजेपी के साथ औपचारिक गठबंधन से रोक रहा है.

दो तिहाई बहुमत से दूर है सरकार 

ऐसे में यह रास्ता भी हो सकता है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर डीएमके केंद्र में सरकार का साथ दे. ठीक वैसे ही जैसे पिछले एक दशक में बीजेडी, YSRCP और BRS देते आए हैं. लोकसभा में डीएमके के 22 सांसद हैं. दो तिहाई का आंकड़ा 362 है जिससे एनडीए 70 दूर है. हाल ही में संविधान संशोधन विधेयक पर पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे. उस समय सदन में 528 सदस्य थे और दो तिहाई का आंकड़ा 352 था. यानी सरकार इस आंकड़े से 54 दूर रह गई थी.

नंबर गेम पर सरकार की नजर 

इसके बाद से सरकार और अधिक सतर्क हो गई है. उसकी नजरें ऐसे दलों पर हैं जो मुद्दों के आधार पर उसे समर्थन दे सकें. विपक्ष के कुछ क्षेत्रीय दलों में विभाजन की संभावना भी टटोली जा रही है. डीएमके के 22 सदस्यों का समर्थन मिलने पर सरकार दो तिहाई के आंकडे के नज़दीक पहुंच सकती है. इससे विपक्ष भी कमजोर होगा. हालांकि एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि डीएमके में विभाजन से लाभ नहीं होगा क्योंकि सरकार को अगर सभी 22 सांसदों का समर्थन मिले तो वह अधिक बेहतर स्थिति है. राज्यसभा में डीएमके के आठ सांसद भी सरकार के लिए मददगार हो सकते हैं.

Advertisement


राष्ट्रपति चुनाव में DMK का मिलेगा साथ?

बीजेपी सूत्रों के अनुसार तमिलनाडु में उसकी सहयोगी AIADMK बिखराव पर है. टीवीके को समर्थन के मुद्दे पर पहले ही दो फाड़ हो चुका है. ऐसे में बीजेपी को उससे रिश्ते तोड़ने में कठिनाई नहीं होगी. वैसे भी एआईएडीएमके के दोनों गुटों को केंद्र के मज़बूत समर्थन की आवश्यकता है. ऐसे में उनके पास अधिक विकल्प नहीं रहेंगे. अगले साल राष्ट्रपति का चुनाव होना है. वैसे तो पश्चिम बंगाल और असम की बड़ी जीत के बाद एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है फिर भी लोकसभा में दो तिहाई बहुमत न होना सरकार के रणनीतिकारों को परेशान कर रहा है. ऐसे में कोशिश यह भी होगी कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी डीएमके का समर्थन सुनिश्चित किया जाए.

Featured Video Of The Day
"जब तक CBI केस नहीं ले लेती, तब तक..."- भोपाल पुलिस कमिश्नर ने क्या बताया?
Topics mentioned in this article