- बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के खुले मंच से ममता बनर्जी प्रशासन की आलोचना का मुद्दा गरमा गया है
- कहा कि बंगाल में राष्ट्रपति के साथ जो हुआ, वह महज अभद्रता नहीं, संस्थागत अनादर है और ...अराजकता है
- प्रशासन ने बड़े मैदान में राष्ट्रपति के कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी. प्रोटोकॉल पालन न करने का भी आरोप है
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की खुले मंच से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रशासन को लेकर की गई तीखी टिप्पणियों का मामला गरमा गया है. बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और पश्चिम बंगाल के सह प्रभारी अमित मालवीय ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा और कहा कि शनिवार को पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के साथ जो कुछ हुआ, वह महज अभद्रता नहीं है, संस्थागत अनादर है और बंगाल में शासन व्यवस्था के अराजकता में डूबने का एक और प्रमाण है.
'ममता सरकार में संवैधानिक ढांचा ध्वस्त'
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति का एक वीडियो शेयर करके लिखा- पश्चिम बंगाल में आज की घटनाएं ममता बनर्जी सरकार के तहत संवैधानिक ढांचे के पूरी तरह से ध्वस्त होने की तरफ इशारा करती हैं. उन्होंने लिखा कि एक दुर्लभ और अभूतपूर्व घटनाक्रम में, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सिलीगुड़ी यात्रा के दौरान तैयारियों और प्रोटोकॉल के अभाव पर खुलकर नाराजगी जताई. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय संथाली सम्मेलन के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसमें खुद राष्ट्रपति मुख्य अतिथि थीं.'
'ये महज अभद्रता नहीं, संस्थागत अनादर'
बीजेपी नेता ने कहा कि जब कोई राज्य सरकार राष्ट्रपति पद की गरिमा का अनादर करने लगती है, तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है बल्कि संवैधानिक मर्यादा और शासन व्यवस्था के पतन को भी उजागर करता है. मालवीय ने आगे कहा कि यह महज अभद्रता नहीं है. यह संस्थागत अनादर है और बंगाल में शासन व्यवस्था की अराजकता में डूबने का एक और प्रमाण है.
राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया
बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने दो दिवसीय पश्चिम बंगाल के तहत शनिवार को 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने दार्जिलिंग पहुंची थीं. उसके बाद वह सिलीगुड़ी उपमंडल के बिधाननगर पहुंचीं. यहां उन्होंने संथाल कॉन्फ्रेंस के लिए दी गई जगह को छोटी बताते हुए अपनी नाराजगी जताई. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ममता बनर्जी प्रशासन पर राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का पालन न करने का भी आरोप लगाया. राष्ट्रपति ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रोटोकॉल है कि राष्ट्रपति के आने पर मुख्यमंत्री, मंत्री और राज्यपाल अगवानी करने आते हैं. राज्यपाल का तो तबादला हो गया है, लेकिन न तो मुख्यमंत्री आईं न ही कोई मंत्री. मुर्मू ने कहा कि मुख्यमंत्री को मेरे साथ होना चाहिए था.
'ममता छोटी बहन जैसी... शायद नाराज हैं'
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मैं बंगाल की बेटी हूं, फिर भी मुझे यहां आने की अनुमति नहीं है. ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, पता नहीं, शायद वह मुझसे नाराज हैं, इसीलिए मुझे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वहां (गोशाईपुर) जाना पड़ा. लेकिन कोई बात नहीं, मुझे इस बात का कोई गुस्सा या नाराजगी नहीं है.”
राष्ट्रपति के कार्यक्रम के लिए नहीं दी अनुमति
दरअसल राष्ट्रपति को मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर उपमंडल में कार्यक्रम को संबोधित करना था, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी. इसके बाद कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा के गोशाईपुर में छोटे मैदान में शिफ्ट किया गया. राष्ट्रपति मुर्मू ने पश्चिम बंगाल प्रशासन पर संथाल कॉन्फ्रेंस में लोगों को आने से रोकने का भी आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन है, लेकिन मैं देख रही हूं कि संथालियों को काउंसिल में आने से रोका जा रहा है. काउंसिल को देखकर लग रहा है कि यह संथाल काउंसिल का सम्मेलन ही नहीं है. मुझे लगता है कि कोई नहीं चाहता कि संथाली एकजुट हो, शिक्षित हो और मजबूत हो, लेकिन मैं जानती हूं कि संथालियों ने इस देश के लिए अपनी जिंदगी को न्यौछावर किया है.














