सोलापुर: पब्लिक प्लेस पर मूर्तियों की स्थापना के लिए अब लेनी होगी मंजूरी, जिला प्रशासन का सख्त आदेश

मुर्तियों या इस तरह के कंस्ट्रक्शन के लिए ग्राम स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदार बनाया गया है, ड्रोन निगरानी से अवैध मूर्ति स्थापना की जांच और 24 घंटे में एफआईआर दर्ज की जाएगी.

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महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में अब सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की मूर्ति, स्मारक या ध्वजस्तंभ लगाना पहले की तरह आसान नहीं होगा. जिला प्रशासन ने इस पर पूरी तरह से रोक लगाते हुए आदेश जारी किया है कि बिना किसी पूर्व अनुमति के किया गया ऐसा कोई भी कंस्ट्रक्शन अवैध माना जाएगा.  प्रशासन का कहना है कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और अनाधिकृत तौर से मूर्तियां लगाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने के साथ-साथ सामाजिक और जातीय तनाव पैदा होने का खतरा बना रहता है.

सोलापुर के जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी इस आदेश में साफ किया गया है कि मूर्तियों की स्थापना अब केवल एक कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संभव होगी. इस आदेश को लागू करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जिला और अनुमंडल स्तर पर समन्वय बिठाया गया है. प्रशासन ने यह कदम पिछले एक महीने के दौरान जिले में महापुरुषों की मूर्तियां अवैध रूप से लगाए जाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए उठाया है.

क्यों पड़ी सख्त नियम की जरूरत?

प्रशासन के अनुसार, हाल के दिनों में सोलापुर के विभिन्न हिस्सों में बिना अनुमति के मूर्तियां स्थापित करने की होड़ सी मची थी. ऐसी गतिविधियों से न केवल सरकारी जमीन पर कब्जा होता है, बल्कि संवेदनशील इलाकों में दो समुदायों के बीच टकराव की स्थिति भी पैदा हो जाती है.

जिला प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अब आवेदन जमा करना, भूमि स्वामित्व का प्रमाण देना और स्थानीय निकायों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा.

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इस प्रक्रिया में पुलिस की रिपोर्ट भी शामिल की जाएगी. इसमें यह देखा जाएगा कि संबंधित जगह पर मूर्ति लगाने से कानून-व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा. इसके अलावा, लोक निर्माण विभाग (PWD) जैसी संबंधित एजेंसियों से भी मंजूरी लेना जरूरी होगा. यदि कोई भी संगठन या व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

गांव स्तर के अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही

नए नियमों के अनुसार, अब 'पुलिस पाटिल' और ग्राम स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों पर इसकी सीधी जिम्मेदारी होगी. उन्हें आदेश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में होने वाली ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत उच्च अधिकारियों को दें. अगर कहीं अनाधिकृत निर्माण की कोशिश होती है और उसकी जानकारी समय पर नहीं दी जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

प्रशासन ने अवैध निर्माण को हटाने के लिए एक 'क्विक रिस्पांस' सिस्टम भी तैयार किया है. सूचना मिलने के महज एक घंटे के भीतर राजस्व, पुलिस और विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को संयुक्त रूप से मौके का दौरा करना होगा. स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए अधिकतम चार घंटे के भीतर उस अवैध संरचना को हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी.

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ड्रोन और वीडियोग्राफी से रखी जाएगी नजर

नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए प्रशासन अब आधुनिक तकनीक का सहारा भी लेगा. अवैध रूप से मूर्तियां स्थापित करने वालों की पहचान करने के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी और वीडियोग्राफी की जाएगी. आदेश में साफ निर्देश हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज की जाए.

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