- के. अन्नामलाई ने बीजेपी से इस्तीफा दिया और पार्टी छोड़ने की वजह अवसरों की कमी बताई है
- अन्नामलाई ने 2021 में बीजेपी जॉइन की थी और अब सम्मानजनक विदाई का रास्ता चुना है
- अन्नामलाई अपनी नई पार्टी शुरू कर सकते हैं, जो हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर आधारित होगी
के. अन्नामलाई ने बीजेपी से विदाई लेने का मन बना लिया है. वह जल्द ही इस्तीफा सौंप सकते हैं. अन्नामलााई मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह से मिले और पार्टी छोड़ने की वजह बताई. बताया जा रहा है कि अन्नामलाई अपनी नई पार्टी शुरू कर सकते हैं, इसलिए बीजेपी का साथ छोड़ना तय है. इस बीच बीजेपी से अन्नामलाई के इस्तीफे के बारे में एक सूत्र ने एनडीटीवी को बताया, "उन्हें (अन्नामलाई को) लगता है कि भाजपा में उनके लिए कोई अवसर और भविष्य नहीं है." अन्नामलाई बीजेपी से साल 2021 में जुड़े थे. अब अन्नामलाई ने बीजेपी से सम्मानजनक विदाई का रास्ता चुन लिया है.
अन्नामलाई के स्वर्णिम सफर का अंत
के. अन्नामलाई की प्रतिष्ठित राज्यव्यापी यात्रा के रूप में जानी जाने वाली "एन मन, एन मक्कल (मेरी भूमि, मेरे लोग)" यात्रा का शुभारंभ अमित शाह ने 28 जुलाई, 2023 को किया था. 200 दिनों की इस पदयात्रा ने तमिलनाडु के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया और 28 फरवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक विशाल जन संबोधन के साथ समाप्त हुई. उस समय किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि भाजपा में के. अन्नामलाई का स्वर्णिम सफर इतनी जल्दी समाप्त हो जाएगा. तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने मंगलवार दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से अपने इस्तीफे के इरादे पर चर्चा की और सौहार्दपूर्ण विदाई की मांग की.
नई पार्टी शुरू करेंगे अन्नामलाई?
ऐसी चर्चा है कि के. अन्नामलाई अपनी नई पार्टी शुरू करने जा रहे हैं, इसलिए बीजेपी से विदाई ले रहे हैं. 41 वर्षीय अन्नामलाई पहले से ही "वी द लीडर्स" नामक संस्था चला रहे हैं, जो संभवतः उनकी राजनीतिक योजना में तब्दील हो सकती है. अन्नामलाई ने खाकी वर्दी छोड़ राजनीति में कदम रखा था. बीजेपी को भी उनमें काफी स्पार्क नजर आया, जिसकी वजह से उन पर काफी जिम्मेदारी सौंपी गई थी. लेकिन अन्नामलाई ने अब अलग राह पकड़ने का मन बना लिया है. हालांकि, अन्नामलाई ने संकेत दिया है कि उनकी नई सियासी पारी भी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की पर आधारित होगी, जिससे बीजेपी का कोई नुकसान नहीं होगा.
PM मोदी से प्रेरित होकर रखा था राजनीति में कदम
2020 में के. अन्नामलाई ने पुलिस की नौकरी छोड़ कर राजनीति में प्रवेश किया, यह कहते हुए कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित थे. कुछ ही हफ्तों में उन्हें राज्य उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया और एक साल बाद, वे पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख बन गए. 200 दिनों की यह यात्रा उनके लिए लॉन्चपैड से कहीं अधिक उनकी रणनीति को निखारने का आधार बनी. यात्रा के अंत तक, अन्नामलाई राज्य में एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती बन गए, जो अपने जोशीले भाषणों और सत्तारूढ़ डीएमके पर आक्रामक हमलों के लिए जाने जाते थे. के. अन्नामलाई को यात्रा का लाभ उसी साल हुए लोकसभा चुनावों में भी मिला. 2019 के लोकसभा चुनावों में मात्र 3.66 प्रतिशत मतदान से भाजपा का मतदान प्रतिशत 2024 में बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया. लेकिन द्रविड़ पार्टियों के साथ गठबंधन के मुद्दे पर अन्नामलाई की पार्टी से दूरी बढ़ती गई.
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क्यों नाराज हुए अन्नामलाई?
तमिलनाडु में कभी पैर जमाने में नाकाम रही बीजेपी ने एआईएडीएमके के साथ गठबंधन को आगे बढ़ने का अहम हिस्सा माना था. अन्नामलाई इससे असहमत थे और उनका मानना था कि पार्टी को अलग रास्ते पर चलना चाहिए. जयललिता समेत द्रविड़ विचारधारा की हस्तियों के खिलाफ उनकी टिप्पणियों की वजह से एआईएडीएमके बेहद नाराज हो गई और गठबंधन टूट गया. लेकिन 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन फिर हो गया. एआईएडीएमके की शर्त ने बीजेपी में अन्नामलाई के करियर पर विराम लगा दिया. उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और उनकी जगह नैनार नागेंद्रन को नियुक्त किया गया.
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