अमित शाह ने पुणे में किया अजीत डोभाल का सम्मान, बताया कब हुई थी पहली मुलाकात

Ajit Doval Lokmanya Tilak Award: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को पुणे में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें सम्मानित किया.

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अजीत डोभाल का किया गया सम्मानित
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  • भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को पुणे में सम्मानित किया गया है.
  • अमित शाह ने अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया है.
  • लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि के अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
पुणे:

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल पुणे में सम्मानित किया. अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक मेमोरियल ट्रस्ट की तरफ से से प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. अमित शाह ने उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, एक स्मृति चिन्ह, एक चेक और 'गीता रहस्य' किताब की एक प्रति दी है. यह आयोजन स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया था. अजीत डोभाल भारत की सुरक्षा व्यवस्था में सबसे अहम माने जाते हैं. 

इतिहास में शामिल हुआ अजीत डोभाल का नाम 

इस पुरस्कार के साथ ही अजीत डोभाल का नाम देश की उन महानतम हस्तियों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्हें पहले यह सम्मान दिया जा चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी शामिल हैं. तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. दीपक तिलक ने बताया कि डोभाल को राष्ट्र की सुरक्षा में उनके अद्वितीय और साहसिक जीवन भर के योगदान के लिए सर्वसम्मति से चुना गया था. इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार भी मौजूद थे.

कैसे मिले थे अमित शाह और अजीत डोभाल 

अमित शाह ने बताया 'जब मैं गुजरात का गृह मंत्री था, तब मैं अजीत डोभाल से मिला था.देश में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की जांच और उनका खुलासा गुजरात पुलिस ने किया था. जब भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का इतिहास लिखा जाएगा, तो उसमें अजीत डोभाल का योगदान एक स्वर्णिम अध्याय होगा. अजीत डोभाल के योगदान से भारत की मज़बूत विदेश नीति को और भी मजबूती मिली है. 1972 से लेकर आज तक अजीत डोभाल ने कई मोर्चों पर काम किया है. अजीत डोभाल कई सालों तक पाकिस्तान में रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया. विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया. आज अजीत डोभाल सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. उन्होंने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में योगदान दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ अजीत डोभाल ने भारतीय सशस्त्र बलों को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई है.'

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अजीत डोभाल ने कहा कि आज का दिन विशेष है क्योंकि यह लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि है, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी. लोकमान्य तिलक के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं,  उन्होंने लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जगाई. मैं विनम्रतापूर्वक लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार स्वीकार करता हूं. लोकमान्य तिलक स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रदूत थे और उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई. तिलक ने ऐसी चेतना जगाई जिसने स्वतंत्रता संग्राम का मार्गदर्शन किया. अपने बेटे की मृत्यु के बाद भी तिलक ने पुणे नहीं छोड़ा. पुणे की धरती समाज सुधारकों और क्रांतिकारियों की धरती है.'

अजीत डोभाल को मिल चुका है क्रीति चक्र

केरल कैडर के 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी अजीत डोभाल भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले NSA हैं. पुलिस सेवा में रहते हुए पाकिस्तान में अंडरकवर मिशन और मिजोरम में शांति समझौता कराने वाले डोभाल शांतिकाल का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान 'कीर्ति चक्र' पाने वाले देश के पहले पुलिस अधिकारी भी हैं. 81 साल के अजीत डोभाल मूलरूप से उत्तराखंड से आते हैं.

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