- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कांग्रेस पर आदिवासियों के विकास में चूक का आरोप लगाया.
- अमित शाह ने इंडिया गेट पर हिडमा के मारे जाने के बाद हुई नारेबाजी को नक्सलवाद का समर्थन बताया.
- उन्होंने राहुल गांधी के नक्सलियों और उनके समर्थकों के साथ कई बार संबंधों का हवाला भी दिया.
सोमवार को लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया. अपने भाषण की शुरुआत में ही उन्होंने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि 75 साल में 60 साल तो शासन आपने (कांग्रेस) किया, आदिवासी अभी तक विकास से क्यों वंचित रहे? आदिवासियों का विकास तो अब नरेंद्र मोदी कर रहे हैं. 60 साल आपने उन्हें घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बना, बैंक की फैसिलिटी नहीं पहुंचने दिया, इसलिए पहले थोड़ा अपनी गिरेबां में झांककर देखो कि दोषी कौन है."
कितने हिडमा मारोगे... नारेबाजी पर भी साधा निशाना
हिडमा के मारे जाने के बाद इंडिया गेट पर हुई नारेबाजी पर अमित शाह ने कहा, "कई जवानों की हत्या के आरोपी हिडमा के मारे जाने के बाद इंडिया गेट पर नारे लगे - “कितने हिडमा मारोगे, हर घर से हिडमा निकलेगा.” राहुल गांधी ने इस वीडियो को स्वयं पोस्ट किया. ये कैसे बच सकते हैं? इन्होंने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलवाद और इस प्रकार की हिंसा का समर्थन किया है.
राहुल कई बार नक्सलियों के हमदर्दों के साथ देखे गएः अमित शाह
गृह मंत्री ने आगे कहा कि राहुल गांधी अपने राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलियों और उनके हमदर्दों के साथ देखे गए हैं. भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सली हैंडल्स और संगठनों ने हिस्सा लिया. 2010 में ओडिशा में लाडो सिकोका के साथ मंच साझा किया, जहाँ सिकोका ने इस मंच से भड़काऊ भाषण दिया और राहुल गांधी को माला भी पहनाई. 2018 में हैदराबाद में गुम्माडी विट्टल राव उर्फ 'गद्दार' से मुलाकात की, जो इस विचारधारा के करीबी माने जाते हैं.
मनमोहन सिंह सरकार की NAC कमेटी के जरिए भी हमला
यूपीए सरकार के समय बनी एडवाइजरी काउंसिल का जिक्र कर अमित शाह ने कहा, मनमोहन सिंह की सरकार में एक NAC (नेशनल एडवाइजरी काउंसिल) बनाई गई. यह एक नया एडवाइजरी काउंसिल था, जिसे एक एक्स्ट्रा-कॉन्स्टीट्यूशनल फोरम के रूप में खड़ा किया गया.
इस फोरम में सोनिया गांधी अध्यक्ष थीं और हर्ष मंदर इसके सदस्य थे. उनके NGO अमन वेदिका में एक नक्सली नेता की पत्नी को जिम्मेदारी दी गई थी, और रिकॉर्ड में यह बात दर्ज है कि वह उन नक्सलियों में शामिल थी, जिन्होंने शहरी क्षेत्रों में अपहरण जैसे मामलों में भाग लिया था.
हर्ष मंदर और उनके NGO का जिक्र कर अमित शाह ने कहा- जब देश के सर्वोच्च सत्ता, केंद्र सरकार के ऊपर एक एक्स्ट्रा-कॉन्स्टीट्यूशनल अथॉरिटी खड़ी की जाती है, और उसके सदस्य यदि नक्सलवाद के समर्थक हों, तो फिर नक्सलियों का हौसला कैसे टूटेगा? यह सब कांग्रेस पार्टी के समय में हुआ था.
पी. चिदंबरम के बयान के जरिए भी हमला
अमित शाह ने पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बयान के हवाले से भी कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा- साल 2010 में गृहमंत्री पी. चिदंबरम जी ने एक वक्तव्य दिया. छत्तीसगढ़ में एक साथ कई जवानों को मार दिया गया. उसके बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में उत्सव मनाया गया. वहाँ नृत्य किया गया, जिसमें पुलिस और सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने पर जश्न मनाया गया और जमीन पर भारत का तिरंगा बिछाकर पैरों के नीचे रखा गया.
अमित शाह ने कहा कि 76 जवानों के मारे जाने के बाद पी. चिदंबरम ने नक्सलियों से कहा कि हम आपसे हथियार डालने के लिए नहीं कह सकते, क्योंकि हम जानते हैं कि आप ऐसा नहीं करेंगे और आप हथियारबंद संघर्ष में विश्वास करते हैं. इनके शासन में देश ऐसे चलता था.
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