- समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन बिल में पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं के लिए विशेष कोटा चाहिए
- अखिलेश यादव ने सरकार पर जातिगत जनगणना को टालने और राजनीतिक जल्दबाजी का आरोप लगाया है
- जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाना आवश्यक है, यह समाजवादी पार्टी की प्राथमिकता है
संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को जमकर घेरा. उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सरकार की मंशा और बिल के प्रावधानों को लेकर उन्होंने कई गंभीर सवाल खड़े किए.
पिछड़ों और मुस्लिमों को भी मिले बिल में आरक्षण
अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण का लाभ तभी सार्थक होगा जब इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो. उन्होंने मांग की कि 'आधी आबादी' के इस आरक्षण में पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए.
जनगणना और परिसीमन पर घेराबंदी
अखिलेश यादव ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए इसे एक राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के बहाने जातिगत जनगणना को टालना चाहती है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि पहले देश में जनगणना होनी चाहिए और उसके आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के 'PDA' फॉर्मूले में 'A' का अर्थ अब 'आधी आबादी' भी है. सपा सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि इस बिल के वर्तमान स्वरूप में पिछड़ों के अधिकारों को लूटा जा रहा है.
अखिलेश ने याद दिलाया कि समाजवादी पार्टी महिलाओं को हमेशा आगे रखने की पक्षधर रही है. उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया को उद्धृत करते हुए कहा, "अगर महिला जागरूक है तो पूरा समाज जागरूक है." उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी ही सबसे पहले पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था लेकर आई थी.
नोएडा में सैकड़ों महिलाओं सड़कों पर: अखिलेश
अखिलेश यादव ने बीजेपी की नीतियों और महिला सुरक्षा और सम्मान पर सवाल उठाते हुए कहा, "बीजेपी नारी को केवल एक 'नारा' बनाने की कोशिश करती है, जबकि असलियत में उनके पास महिला मुख्यमंत्री तक नहीं हैं. दिल्ली की चीफ मिनिस्टर पर भी हाफ मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार की नीतियों और 'कमीशनखोरी' की वजह से महंगाई बढ़ी है, जिससे महिलाओं की रसोई सूनी हो गई है. उन्होंने नोएडा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 40 हजार मजदूर सड़कों पर हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है.














