- फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में कई हाइड्रोलिक सिस्टम खराब हो गए थे
- मेंटेनेंस रिपोर्ट में हाइड्रोलिक सिस्टम के लो प्रेशर और ऑटोपायलट बंद होने जैसी कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं
- फ्लाइट के पायलट की जांच में यह पाया गया कि वह मारिजुआना के सेवन के लिए पॉजिटिव थे और नींद की दवा ले रहे थे
फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट टर्बुलेंस मामले में नया खुलासा हुआ है. फ्लाइट के कॉकपिट में प्रिंट हुई मेंटेनेंस रिपोर्ट से पता चलता है कि विमान में कई हाइड्रोलिक खराबियां आई थीं. इस फ्लाइट के दौरान विमान अचानक 300 फीट नीचे गिर गया था, जिससे कई यात्री घायल हो गए थे. यह रिपोर्ट 4 अगस्त को सुबह 11:14 बजे, फ्लाइट के दिल्ली में लैंड करने के बाद जारी की गई थी. इसके अलावा यह भी खुलासा हुआ है कि पायलट ने सिर्फ गांजा ही नहीं बल्कि नींद की दवा भी ली थी.
पायलट की जांच में क्या निकला?
इस रिपोर्ट का दूसरा हिस्सा उस पायलट से जुड़ा है, जिसके बारे में सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में फ्लाइट के बाद हुई जांच में वह साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाया गया था. कुछ समय बाद एक और टेस्ट किया गया. मंगलवार को सूत्रों ने बताया कि उसकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई. खास तौर पर, टेस्ट से कथित तौर पर यह पुष्टि हुई कि पायलट ने गांजे का सेवन किया था.
NDTV को मिली एयरलाइन की इंटरनल फ्लाइट सेफ्टी रिपोर्ट के अनुसार, विमान के पायलट सुदीप वशिष्ठ 'नींद न आने की समस्या' के लिए दवा ले रहे थे. पायलट ने अपने बयान में कहा, 'पूरी जानकारी के लिए मैं बताना चाहता हूं कि पिछले कुछ समय से मुझे निजी कारणों से नींद न आने की समस्या हो रही थी, जिसके लिए मेरे फैमिली डॉक्टर ने मुझे दवा दी थी.'
पहले एयर इंडिया ने मानी थी टर्बुलेंस की बात
दो घंटे बाद, दोपहर 1:14 बजे, एयर इंडिया ने एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने इसे उड़ान के दौरान थोड़ी देर के लिए हुई टर्बुलेंस से जुड़ी घटना बताया. एयरलाइन के मुताबिक, इसी वजह से ऊंचाई में अचानक थोड़ा बदलाव आया था. एयरलाइन ने कहा कि कोई गंभीर चोट नहीं आई है और कुछ यात्रियों तथा क्रू सदस्यों को मामूली चोटें आई हैं, जिन्हें एहतियात के तौर पर मेडिकल जांच के लिए एयरपोर्ट की मेडिकल फैसिलिटी में ले जाया गया.
बाद में बदला गया एयरलाइन का बयान
करीब पांच घंटे बाद, शाम 6:55 बजे, एयरलाइन ने अपना पिछला बयान अपडेट किया. इसमें से 'टर्बुलेंस' शब्द हटा दिया गया, लेकिन घटना की गंभीरता को कम करके ही बताया गया.
अपडेट किए गए बयान में कहा गया, 'आज सुबह फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 के साथ उड़ान के दौरान ऊंचाई में अचानक कमी आने की घटना हुई. इस घटना के बाद विमान सामान्य रूप से उड़ता रहा और सुबह 11:07 बजे (IST) दिल्ली में सुरक्षित लैंड कर गया. एयरबस A-320 NEO विमान में 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे. इनमें से 13 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों को चोटें आईं और उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया.' इस बयान में किसी भी हाइड्रोलिक खराबी का जिक्र नहीं किया गया.
मेंटेनेंस रिपोर्ट में क्या सामने आया?
A-320 NEO विमान आमतौर पर तीन अलग-अलग हाइड्रोलिक सिस्टम पर काम करता है, ताकि अगर एक सिस्टम खराब हो जाए तो बाकी दो सिस्टम फ्लाइट कंट्रोल, लैंडिंग गियर और ब्रेक को पावर दे सकें. एयर इंडिया की इस फ्लाइट में सुबह 9:32 बजे तीनों सिस्टम में लो प्रेशर और दो रिजर्वॉयर में कम फ्लूइड लेवल की चेतावनी दिखाई दी.
हाइड्रोलिक सिस्टम ही पायलट को विमान के कंट्रोल सरफेस को संचालित करने में मदद करते हैं. एक साथ कई सिस्टम का प्रभावित होना सिर्फ एक सिस्टम की खराबी से कहीं ज्यादा गंभीर माना जाता है, क्योंकि इससे बैकअप सिस्टम भी प्रभावित हो सकते हैं.
ऑटोपायलट और कंट्रोल सिस्टम में भी दिक्कत
मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब लगभग उसी समय यानी सुबह 9:32 बजे ऑटोपायलट भी बंद हो गया. बाएं और दाएं एलिवेटर कंट्रोल में खराबी का संकेत मिला. एलिवेटर कंट्रोल विमान को ऊपर और नीचे करने में मदद करते हैं.
इसके कुछ ही देर बाद इमरजेंसी एग्जिट गेट से जुड़े दो अलर्ट भी मिले. पहला सुबह 9:33 बजे दाहिनी ओर के अगले दरवाजे के लिए और दूसरी सुबह 9:35 बजे दाहिनी ओर के पिछले दरवाजे के लिए जारी हुए. फिर सुबह 10:16 बजे इंजन-1 के एंटी-आइस सिस्टम में वाल्व प्रेशर से जुड़ी खराबी दर्ज हुई. इसके बाद सुबह 10:52 बजे ऑटोपायलट एक बार फिर डिस्कनेक्ट हो गया.
क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?
यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस तरह की रिपोर्ट में 'वॉर्निंग' का मतलब हमेशा सिस्टम का पूरी तरह फेल हो जाना नहीं होता. आधुनिक विमानों में कई स्तर के बैकअप सिस्टम होते हैं और पायलटों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है. फिर भी हाइड्रोलिक और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी कई चेतावनियों का एक साथ सामने आना ऐसा मामला है, जिसकी मेंटेनेंस और सेफ्टी टीमें बारीकी से जांच करना चाहेंगी. एयर इंडिया के बयान में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि विमान को गंभीर तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा था.
300 फीट नीचे गिरने के समय क्या हुआ?
सूत्रों ने बताया कि जब विमान 300 फीट नीचे गिरा, उस समय वशिष्ठ अपनी सीट पर नहीं थे और को-पायलट विमान उड़ा रहा था. बताया गया कि पायलट और कॉकपिट में रखी चीजें ऊपर की ओर उछल गई थीं. वहीं विमान के पिछले हिस्से में बैठे जिन यात्रियों ने सीट बेल्ट नहीं बांधी थी, उन्हें गंभीर चोटें आईं.
जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है.
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