- असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के इतिहास का बदला लेने वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी
- ओवैसी ने कहा कि अगर बदला लेना है तो हूणों और अंग्रेजों से लेना चाहिए, जिनसे देश को नुकसान पहुंचा
- अजीत डोभाल ने कहा था कि इतिहास हमें सिखाता है कि युवाओं में अपने अतीत का बदला लेने की भावना होनी चाहिए
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एनएसए अजित डोभाल के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इतिहास का बदला लेना होगा. ये देश ऐसे ही आजाद नहीं हुआ है. हमें अपने अतीत का बदला लेना है और भारत को फिर से महान बनाना है.
इस पर ओवैसी ने कहा कि बदला लेना ही है तो हूण और अंग्रेजों से लीजिए. उनके बदला कौन लेगा. ओवैसी ने तंज भरे अंदाज में पूछा कि हूण कहां से आए थे, किसने गु्प्त सामान्य खत्म किया. पुष्यमित्र शुंग से बदला कौन लेगा. उन्होंने कहा कि इससे पहले जो हो रहा था, तब तक मुसलमान तो आए ही नहीं थे. स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ओडिशा का सबसे बड़ा मंदिर बौद्ध समाज का था, उसका क्या होगा.
बता दें कि 10 जनवरी को दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने संबोधित में कहा था कि आज का स्वतंत्र भारत हमेशा इतना मुक्त नहीं था. हमारे पूर्वजों ने आज़ादी के लिए बड़ी कुर्बानियां दीं. उन्होंने अपमान सहा, बेबसी के दौर देखे. कई लोग फांसी पर चढ़े, हमारे गांव जलाए गए, सभ्यता को नष्ट किया गया, मंदिरों को लूटा गया और हम मूक दर्शक बने रहे.
अजित डोभाल से ओवैसी का सवाल
ओवैसी ने कहा कि अगर बदला लेना है तो अंग्रेजों से लीजिए. जिन्होंने बंगाल के 30 लाख लोगों को भूखा मार दिया था. आप उनसे बदला क्यों नहीं लेंगे. उन्होंने कहा कि हूण सेंट्रल एशिया और चाइना से आए थे. क्या उनसे बदला लेंगे आप. अगर डोभाल साहब बदला लेने की बात कर रहे हैं तो गोडसे का क्या करेंगे, जिसने गांधी जी की हत्या की थी. उससे बदला कौन लेगा.
अजित डोभाल ने देश के इतिहास पर क्या कहा?
अजित डोभाल ने कहा था कि यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि हर युवा के भीतर आग होनी चाहिए. ‘बदला' शब्द आदर्श नहीं, लेकिन एक शक्तिशाली ताकत है. हमें अपने इतिहास का बदला लेना होगा और भारत को उसके अधिकारों, विचारों और विश्वासों के आधार पर फिर महान बनाना होगा.
उन्होंने ये भी कहा था कि भारत एक समय बहुत विकसित सभ्यता थी. हमने किसी का मंदिर नहीं तोड़ा, न ही कहीं लूटपाट की, किसी देश पर हमला भी नहीं किया, जब दुनिया पिछड़ी हुई थी. लेकिन हमने अपनी सुरक्षा के खतरों को नहीं समझा. इतिहास ने हमें सबक दिया जब हम उदासीन रहे. सवाल है- क्या हमने वह सबक सीखा? क्या आने वाली पीढ़ियां उसे याद रखेंगी? अगर वे भूल गईं, तो यह देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी.













