दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन पकड़ेगी रफ्तार, DPR पर फोकस, चेन्नई- बेंगलुरु रेल कॉरिडोर का काम भी जल्द शुरू होगा

Delhi-Varanasi High Speed Rail Corridor: चेन्नई-बेंगलुरु प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण के बाद 300-350 किलोमीटर से अधिक की दूरी लगभग 73 मिनट से लेकर 90 मिनट में पूरी होने की उम्मीद है. वर्तमान में यह 5 से 6 घंटे की यात्रा समय को कम कर देगा

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Delhi-Varanasi High Speed Rail Corridor Latest News: दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन
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  • दिल्ली-बनारस की तरह ही चेन्नई-बेंगलुरु हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का काम जल्द शुरू हो सकता है
  • दोनों कॉरिडोर के DPR में संशोधन किए जा रहे हैं और नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिए गए हैं
  • केंद्र सरकार ने सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण के लिए 16 लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित किया है
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Delhi-Varanasi Bullet Train Project: दिल्ली-वाराणसी की तरह ही अब चेन्नई- बेंगलुरु हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का काम जल्द शुरू हो सकता है. रेल मंत्रालय ने इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी है. रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली-बनारस हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के साथ ही चेन्नई- बेंगलुरु बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की तैयारी है. दिल्ली- बनारस की तरह ही चेन्नई- बेंगलुरु हाई स्पीड रेल कॉरिडोर भी सरकार के प्राथमिकता में हैं. दोनों कॉरिडोर का काम जल्द शुरू करने की योजना है. दिल्ली-बनारस और चेन्नई- बेंगलुरु हाई स्पीड कॉरिडोर का रेलवे डीपीआर बोर्ड को पहले ही सौंपा जा चुका है, लेकिन इसमें कुछ संशोधन होना है, इसलिए इस पर अभी काम चल रहा है.

अधिकारी ने बताया कि दोनों कॉरिडोर के संशोधन डीपीआर को जल्द सौंपने का निर्देश नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) को दिया गया है, साथ ही प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए विशेष अधिकारी की भी लखनऊ और बेंगलुरू में नियुक्ति की गई है.

7 रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने का ऐलान

केंद्र ने इस बार के बजट में सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान किया है. इसके तहत दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे महानगरों को हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन कॉरिडोर के निर्माण पर 16 लाख करोड़ रुपए निवेश का अनुमान जताया है. ऐसे हाईस्पीड रेलवे ट्रैक पर हाई स्पीड ट्रेनें 250 से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी. 

अधिकारी ने बताया कि प्रोजेक्ट की प्रगति को लेकर लगातार रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में कई हाई लेवल बैठकें हो चुकी हैं. पिछले महीने फरवरी में हुई बैठक के दौरान बोर्ड ने एनएचएसआरसीएल को निर्माण कार्य से पहले की तैयारियां तेज करने को कहा था. इसमें भूमि, डिजाइन, टेंडर आदि से जुड़ी प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियों की सूची बनाकर कॉन्ट्रेक्ट डॉक्यूमेंट्स तैयार करने का निर्देश दिया है. साथ ही सभी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए समान तकनीकी मानक तय हों. इसके अलावा सभी परियोजनाओं के लिए तकनीकी रूप से प्रशिक्षित स्टॉफ, कोर टीम बनाने और मुख्यालय तय करने का भी निर्देश दिया गया है. सूत्रों के अनुसार, संभावना है कि दिल्ली-बनारस के लिए लखनऊ और चेन्नई- बेंगलुरु के लिए बेंगलुरू में मुख्यालय बनाया जाएगा,

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हर हफ्ते सौंपनी होगी प्रगति रिपोर्ट 

रेल मंत्रालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी कॉरिडोर की परियोजनाओं के लिए कितना स्टाफ चाहिए, जिसमे रेलवे कर्मचारी भी शामिल हैं उसका भी आकलन होगा. साथ ही हर हफ्ते एनएचएसआरसीएल को प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट बोर्ड को सौंपनी होगी. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी चयन से लेकर स्टाफ की नियुक्ति तक का काम अभी बाकी है. जर्मनी, फ्रांस या रूस किस तकनीक का इस्तेमाल परियोजना में होना है, उस पर रेलवे बोर्ड को मुहर लगानी है.

अर्थव्यवस्था को मिलेगा उछाल

चेन्नई-बेंगलुरु प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण के बाद 300-350 किलोमीटर से अधिक की दूरी लगभग 73 मिनट से लेकर 90 मिनट में पूरी होने की उम्मीद है. वर्तमान में यह 5 से 6 घंटे की यात्रा समय को कम कर देगा, जिससे यात्रा बहुत तेज और सुविधाजनक हो जाएगी. जानकारों का कहना है कि इस रूट पर बुलेट  ट्रेन चलने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और पर्यटन को काफी लाभ होगा, जिसका असर अर्थव्यवस्था की प्रगति के रूप में भविष्य में देखने को मिलेगा.

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