- पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को महत्वपूर्ण जीत मिली है
- आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन की इस जीत का राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है
- हाल ही में दिल्ली में नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन को भाजपा और संघ परिवार से युवाओं की नाराजगी माना गया था
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को बड़ी जीत हासिल हुई है. आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन की यह जीत अहम है क्योंकि हाल ही में दिल्ली में नीट पेपर लीक के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था. इस आंदोलन को लेकर कहा गया था कि भाजपा और संघ परिवार से यह युवाओं की नाराजगी का संकेत है. लेकिन छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की जीत संघ परिवार के लिए राहत भरा संकेत है. इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के कैंडिडेट अंकित बिधान की जीत हुई है. उनके बाद दूसरे नंबर पर गुरमान सिंह सिद्धू रहे, जो कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के कैंडिडेट थे.
अंकित बिधान हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले हैं और वह पीएचडी शोधार्थी हैं. अंकित बिधान को इस चुनाव में 500 से ज्यादा वोटों से जीत हासिल हुई है. पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास में यह दूसरा मौका है, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को अध्यक्ष पद पर जीत मिली है. इससे पहले पिछले चुनाव में भी एबीवीपी को अध्यक्ष पद पर जीत मिली थी. वह पहला मौका था, जब एबीवीपी को इस तरह पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में टॉप पोस्ट पर जीत मिली थी. बीते कुछ सालों में पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ताकत बढ़ी है.
ऐतिहासिक रूप से पंजाब यूनिवर्सिटी में कांग्रेस का छात्र संगठन NSUI मजबूत रहा है, लेकिन ABVP ने बीते कई सालों में संगठन का विस्तार कर लिया है. एबीवीपी के एक छात्र नेता ने बताया कि हमने बीते कई सालों में पंजाब यूनिवर्सिटी में काफी मेहनत की है और अब हमें इसका फायदा मिल रहा है. छात्र नेता ने कहा कि हमने ऐसे लोगों को अपने संगठन से दूर रखा है, जिनका मकसद सिर्फ राजनीति करना या फिर कैंपस में दबंगई करना रहा है.
छात्र नेता ने बताया- कैसे पंजाब यूनिवर्सिटी में मजबूती हो रही ABVP
छात्र संगठन के नेता ने कहा कि हमने ऐसे कैंडिडेट्स देने की कोशिश की है, जो लगातार छात्र हितों पर फोकस करते हैं और साफ छवि के हैं. इसके चलते छात्रों के बीच एबीवीपी पर भरोसा बढ़ा है. उन्होंने कहा कि हम पूरे साल ही सक्रिय रहते हैं और छात्र हितों से जुड़ी कई गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं.