- आम आदमी पार्टी के दस राज्यसभा सांसदों में से सात सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया
- पार्टी के तीन लोकसभा सांसदों को बनाए रखना आम आदमी पार्टी के लिए आगामी समय में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है
- भाजपा के केंद्रीय महामंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से दूर हो गई है
शुक्रवार को आम आदमी पार्टी और उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल के लिए एक बुरी खबर आई.पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी.उन्होंने सामूहिक तौर पर पार्टी छोड़कर बीजेपी में विलय करने का ऐलान किया है.इनमें राघव चड्ढा,संदीप पाठक,स्वाति मालीवाल और अशोक मित्तल जैसे सांसद शामिल हैं.अब अटकलें लगने लगी हैं कि इस बगावत का असर कहीं लोकसभा और पंजाब विधानसभा पर न पड़ जाए.
बचे 3 सांसदों को भी बनाए रखना एक चुनौती
सूत्रों का मानना है कि आम आदमी पार्टी को लोकसभा के अपने तीनों सदस्यों को पार्टी में बनाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाली है.लोकसभा में पार्टी के 3 सांसद हैं.इनमें होशियारपुर से राजकुमार छब्बेवाल,संगरूर सीट से गुरमीत सिंह मीत हायर और आनंदपुर साहिब से मलविंदर सिंह कांग शामिल हैं.सूत्रों ने दावा कि इनमें से कम से कम दो सांसद अगर आने वाले कुछ महीनों में बीजेपी के कैंप में आ जाएं तो हैरानी की बात नहीं होगी.बीजेपी के केंद्रीय महामंत्री तरुण चुग ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से हट गई है और एक एक करके उसके कई नेता अब पार्टी से छुटकारा पाना चाहते हैं.
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले विधायकों में न पड़ जाए फूट!
इतना ही नहीं , पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.2022 में पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था और उसे 90 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल हुई.हालांकि सात सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य में एकजुट है और उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है.अगले साल शुरुआत में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं.ऐसे में जानकर मानते हैं कि तुरंत न सही, लेकिन अगले कुछ महीनों तक पंजाब में अपने कुनबे को समेट कर रखना आम आदमी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा.
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