- भारत में 2025 में लगभग हर तीसरे पर्सनल कम्प्यूटर पर ऑफलाइन साइबर अटैक का निशाना बना
- जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारत में 6.46 करोड़ से अधिक साइबर हमलों को रोका गया
- यूएसबी और पेनड्राइव जैसी डिवाइस के माध्यम से किए गए साइबर हमले सबसे अधिक प्रचलित रहे
अगर आप ये सोचते हैं कि आपके कम्प्यूटर से इंटरनेट कनेक्ट नहीं है तो आप साइबर अटैक से बच गए. तो शायद आप गलत है. क्योंकि इंटरनेट नहीं होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपका कम्प्यूटर सेफ है. 2025 में भारत में हर तीन में से एक पर्सनल कम्प्यूटर 'ऑफलाइन साइबर अटैक' का निशाना बना. यह जानकारी साइबर सिक्योरिटी फर्म कैस्परस्काई ने अपनी रिपोर्ट में दी है.
कैस्परस्काई ने बताया कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारत में 6.46 करोड़ से ज्यादा साइबर हमलों की पहचान की गई और उन्हें रोका गया. ये साइबर अटैक मुख्य रूप से यूएसबी और पेनड्राइव जैसी डिवाइस के जरिए किए गए. इन साइबर खतरों के कारण भारत दुनिया के उन टॉप 80 देशों में शामिल हो गया है, जहां सबसे ज्यादा ऑफलाइन साइबर अटैक होते हैं.
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कैस्परस्काई सिक्योरिटी नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, देश में 29.8% यूजर्स इन ऑफलाइन खतरों की चपेट में आए. इनमें 'वर्म्स' या खुद को फैलाने वाले घातक प्रोग्राम और 'फाइल वायरस' के जरिए होने वाले हमले सबसे अधिक रहे.
एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए कैस्परस्काई के एमडी एड्रियन हिया ने कहा, '2025 में हमारे शोधकर्ताओं ने पाया कि हमलावर मैलवेयर डाउनलोड कराने के लिए माइक्रोसॉफ्ट टीम्स और गूगल ड्राइव जैसे लोकप्रिय टूल की नकल कर रहे हैं, ताकि उपयोगकर्ताओं की बैंकिंग जानकारी और संवेदनशील व्यक्तिगत ब्योरा चुराया जा सके.'
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वैश्विक स्तर पर पासवर्ड चुराने वाले यानी गोपनीय जानकारी उड़ाने वाले खतरों में 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, जासूसी करने वाले 'स्पाइवेयर' यानी चुपके से निगरानी रखने वाले सॉफ्टवेयर की घटनाओं में भी 51 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है,
हिया ने विशेष रूप से एशिया प्रशांत क्षेत्र में उन 'मैलिशियस फाइलों' यानी घातक प्रोग्राम में भारी बढ़ोतरी की बात कही है, जिन्हें कंप्यूटर से गोपनीय डेटा यानी निजी जानकारी चुराने के लिए बनाया गया है.














