Hypersensitivity pneumonitis: पक्षियों के बीट से हो सकती है यह बीमारी, जानिए क्या है हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस और इसके लक्षण  

Hypersensitivity pneumonitis: हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस, एक बेहद दुर्लभ बीमारी, जो अंगों में सूजन और उन्हें हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है. इस बीमारी का शिकार वे लोग होते हैं, जिनके घर या अपार्टमेंट के आसपास पक्षियों के घोंसले होते हैं. 

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Hypersensitivity pneumonitis: पक्षियों के बीट से हो सकती है यह बीमारी
नई दिल्ली:

Hypersensitivity pneumonitis: हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस, बेहद दुलर्भ बीमारी है. मोटे तौर पर यह एक तरह की एलर्जी है, जो फेफड़ों में होती है. इस बीमारी के घातक होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे अंगों में सूजन और उसे हमेशा के लिए नुकसान पहुंच सकता है. बता दें कि हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस  को बर्ड फैनसियर (Bird Fancier's) के फेफड़े के रूप में भी जाना जाता है. यह मूल रूप से फेफड़े का रोग (lung disease) है जो पक्षियों की बीट या पंखों के संपर्क में लंब समय तक रहने के कारण होता है. हालांकि बैक्टीरिया (Bacteria), फंगी, एनिमल एंड प्लांट प्रोटीन के साथ दूसरी एलर्जी (allergens) भी हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस का कारण हो सकते हैं.  

आमतौर पर इस बीमारी का शिकार वे लोग होते हैं, जिनके घर या अपार्टमेंट के आसपास पक्षियों के घोंसले होते हैं. हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि इस बीमारी का समय रहते पता चलने पर इलाज किया जा सकता है. अमेरिकन लंग एसोसिएशन (American Lung Association) के अनुसार, यह बीमारी आनुवंशिक रूप से भी फैल सकती है. यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है.

हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस

हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस (Hypersensitivity pneumonitis) के कारण फेफड़ों में सूजन हो जाता है, जिसमें तीव्र और क्रोनिक इंफेक्शन के कारण मरीज हे फीवर और अस्थमा का शिकार हो जाता है. यह बीमारी तब बहुत गंभीर हो जाती है, जब आप बार-बार एलर्जी के संपर्क में आते हैं, इंफेक्शन होता है  जिससे फेफड़े को स्थायी रूप से क्षति पहुंचती है. इसे पल्मोनरी फाइब्रोसिस ( pulmonary fibrosis) भी कहा जाता है. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर यह बीमारी बहुत बढ़ जाती है तो मात्र lung transplantation यानी फेफड़े का प्रत्यारोपण ही एकमात्र इलाज है. 

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लक्षणों को पहचानें

-सांस लेने में परेशानी का होना

-ड्राइ कफ

-छाती में तनाव

-थकान और हमेशा थका-थका लगना

-बुखार

-मांसपेशियों में दर्द

-वजन घटना

-उंगली या पैर की अंगुली का मुड़ना, आदि.

कैसे बचें इस बीमारी से 

इस बीमारी से बचाव ही इसका सबसे अच्छा इलाज है. अगर आप ऐसी जगहों पर काम करते हैं या रहते हैं जहां पक्षियों, लकड़ी, कागज या अनाज हैं तो अच्छी क्वालिटी वाली फेस मास्कर का इस्तेमाल करें. इसके साथ ही हॉट टब, हीटिंग और कूलिंग सिस्टम को साफ-सुथरा रखें या इस्तेमाल करने से पहले साफ कर लें. पंखों से भरे बिस्तर और तकिए के इस्तेमाल से बचना बेहद जरूरी है. और हां अगर आपने कबूतर, तोता या कोई पक्षा पाल रखा है तो उसके पिंजरों को नियमित रूप से साफ करें. सफाई करते समय मास्क जरूर पहनें. 

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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