बायोमेट्रिक और फसल नुकसान पर हरियाणा सरकार के खिलाफ आक्रोश, किसानों का चक्का जाम का प्लान

हरियाणा में किसानों ने बायोमेट्रिक सत्यापन, पोर्टल खामियों और फसल नुकसान के मुआवजे की मांग को लेकर हाइवे जाम और चक्का जाम शुरू किया है. मंडियों में अव्यवस्था और देरी के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज होता दिख रहा है.

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  • हरियाणा के किसान संगठनों ने फसल खरीद प्रक्रिया की जटिलता और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली के विरोध में
  • किसान ट्रैक्टर‑ट्रॉली पर अनिवार्य नंबर प्लेट और वाहन ट्रैकिंग नियमों को उलझाने वाला बता रहे हैं
  • बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है, किसानों ने मुआवजे की मांग उठाई है
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हरियाणा के अलग‑अलग शहरों में किसान संगठनों ने हाइवे जाम और चक्का जाम की घोषणा की है. किसानों का कहना है कि सरकार ने फसल खरीद प्रक्रिया को आसान करने के बजाय और भी जटिल बना दिया है, जिससे मंडियों में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. किसानों का सबसे बड़ा विरोध सरकार द्वारा शुरू की गई बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली को लेकर है. किसानों का कहना है कि यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल है और अक्सर काम नहीं करती. इसके कारण मंडियों में फसल बेचने में कई‑कई दिनों की देरी हो रही है. किसानों का आरोप है कि बायोमेट्रिक सिस्टम के कारण गेट पास जारी नहीं हो पा रहे और उन्हें मंडियों के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है.

ट्रैक्टर‑ट्रॉली नियमों से नाराज किसान

किसान ट्रैक्टर‑ट्रॉलियों पर अनिवार्य नंबर प्लेट और अन्य वाहन ट्रैकिंग नियमों को भी “परेशान करने वाला” बता रहे हैं. उनका कहना है कि इन नियमों के कारण किसान और आढ़ती दोनों उलझन में हैं. कई पुराने या नए ट्रॉलियों के पास स्पष्ट नंबर न होने से गेट पास में दिक्कत आ रही है, जिससे फसल की ढुलाई प्रभावित हो रही है. आरोप है कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा. कई किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण ही नहीं हो पाया है, जबकि कुछ का डेटा गलत दिख रहा है. किसानों का कहना है कि बिना पोर्टल रजिस्ट्रेशन के सरकारी एजेंसियां फसल खरीद नहीं कर रहीं, जिससे उन्हें निजी व्यापारियों पर निर्भर होना पड़ रहा है.

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान

किसानों ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से सरसों और गेहूं की फसल को हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई है. किसानों का कहना है कि कई जिलों में फसल को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार ने न तो समय पर गिरदावरी कराई और न ही मुआवजे की कोई ठोस घोषणा की है.

दुष्यंत चौटाला का सरकार पर हमला

पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने पंचकूला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हरियाणा सरकार पर फसल खरीद और मुआवजे को लेकर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि सरकार ने मंडियों में न तो उचित खरीद व्यवस्था की और न ही बारिश से हुए नुकसान पर राहत दी. उन्होंने मुख्यमंत्री के हवाले से जारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि मंडियों में आई 17.37 लाख मीट्रिक टन गेहूं में से अब तक केवल 3.92 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है. दुष्यंत चौटाला ने दावा किया कि किसानों को देय कुल भुगतान करीब 1,030 करोड़ रुपये है, जबकि अब तक केवल 13 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में बायोमेट्रिक सिस्टम और बारदाना जैसी बुनियादी सुविधाओं तक की कमी है.

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हुड्डा का आरोप: खरीद के नाम पर घोटाले

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी राज्य सरकार पर खरीद के नाम पर घोटाले करने का आरोप लगाया. हुड्डा ने कहा कि पोर्टल रजिस्ट्रेशन, गेट पास, बायोमेट्रिक, ट्रैक्टर नंबर और अन्य शर्तें लगाकर किसानों को जानबूझकर उलझाया जा रहा है, ताकि सरकार को फसल खरीद से बचने का मौका मिले. उन्होंने कहा कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान के लिए तुरंत विशेष गिरदावरी और मुआवजा दिया जाना चाहिए.

सरकार का पलटवार

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने फसल खरीद को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए हैं. उनके मुताबिक बायोमेट्रिक प्रणाली और जियो‑फेंसिंग से खरीद में पारदर्शिता बढ़ी है और किसानों के हित सुरक्षित हुए हैं. मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे सरकारी व्यवस्था में सहयोग करें.

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हाइवे जाम से बढ़ी परेशानी

इधर, किसान आंदोलन के चलते कई जगहों पर हाइवे जाम होने से आम लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है. कुछ इलाकों में यातायात वैकल्पिक मार्गों से चलाया जा रहा है. पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं और किसान नेताओं से बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं.

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