- हिमाचल सरकार ने राज्य की सीमाओं पर प्रवेश करने वाले वाहनों के एंट्री टोल टैक्स में तीस प्रतिशत की वृद्धि की है
- छोटी गाड़ियों के लिए प्रवेश शुल्क 70 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है जो एक अप्रैल से लागू होगा
- स्थानीय लोगों ने सीमावर्ती पांच किलोमीटर क्षेत्र के निवासियों को टैक्स में छूट देने की मांग की है
नंगल/शिमला: हिमाचल सरकार ने राज्य की सीमाओं में प्रवेश करने वाले वाहनों पर लगने वाले एंट्री टोल टैक्स में एक बार फिर इजाफा कर दिया है. इस फैसले से पंजाब और अन्य पड़ोसी राज्यों से आने वाले यात्रियों पर महंगाई की दोहरी मार पड़ी है. नए नियमों के अनुसार, छोटी गाड़ियों को अब प्रवेश के लिए 70 रुपये के बजाय 100 रुपये का भुगतान करना होगा.
1 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें
हिमाचल सरकार द्वारा बढ़ाई गई ये दरें आगामी 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएंगी. विशेष रूप से पंजाब के नंगल से सटे बॉर्डर और अन्य प्रवेश द्वारों पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा. छोटी गाड़ियों के टैक्स में सीधे तौर पर 30% की बढ़ोतरी की गई है, जिससे पर्यटकों के साथ-साथ दैनिक आवाजाही करने वाले स्थानीय लोग भी काफी गुस्से में हैं.
5 किलोमीटर के दायरे में राहत की मांग
नंगल नगर परिषद के पार्षदों और स्थानीय लोगों का कहना है कि हिमाचल बॉर्डर से सटे 5 किलोमीटर के इलाके में रहने वाले लोगों को इस टैक्स से राहत मिलनी चाहिए. पिछले साल नंगल नगर परिषद ने एक प्रस्ताव पास कर सरकार को भेजा था, जिसमें स्थानीय लोगों को छूट देने की बात कही गई थी. फिलहाल वह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है और राहत मिलने के बजाय जनता पर टैक्स का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है.
"जैसे को तैसा" की उठ रही मांग
पंजाब के स्थानीय निवासियों का कहना है कि पड़ोसी राज्य होने के नाते हिमाचल और पंजाब के सीमावर्ती गांवों में आपसी व्यापार और रिश्तेदारियां हैं. लोगों का अक्सर आना-जाना लगा रहता है. अगर हिमाचल सरकार हमें राहत नहीं देती, तो पंजाब सरकार को भी हिमाचल से आने वाली गाड़ियों पर भारी टैक्स लगाना चाहिए. पूरे देश में इस तरह का एंट्री टैक्स कहीं नहीं देखा जाता. जब पंजाब सरकार भी टैक्स लगाएगी, तभी हिमाचल सरकार को जनता के दर्द का एहसास होगा."
कंपनी और ठेकेदारों की चुप्पी
जब इस बढ़ोतरी को लेकर टोल बैरियर पर तैनात कंपनी के कर्मचारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कैमरे पर आने से साफ इनकार कर दिया. कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल आदेशों का पालन कर रहे हैं और इस विषय पर केवल कॉन्ट्रैक्टर (ठेकेदार) ही विस्तृत जानकारी दे सकते हैं.














