मोरबी में आवारा कुत्ते का आतंक: 8 साल के मासूम को नोंच-नोंच कर मार डाला

Morbi Dog Attacke case: जेतपुर रोड स्थित एक फैक्ट्री के पास एक खूंखार आवारा कुत्ते ने 8 साल के बच्चे पर हमला कर उसे नोंच-नोंच कर मौत के घाट उतार दिया. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश है.

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मोरबी में आवारा कुत्ते का आतंक: 8 साल के मासूम को नोंच-नोंचकर मार डाला
Saurabh Wastania

Morbi Stray Dog Attacks: गुजरात के मोरबी शहर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. दरअसल, यहां आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक ने एक मासूम की जान ले ली. बताया जा रहा है कि जेतपुर रोड स्थित एक फैक्ट्री के पास एक खूंखार आवारा कुत्ते ने 8 साल के बच्चे पर हमला कर उसे नोंच-नोंच कर मौत के घाट उतार दिया. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है.

मृतक बच्चे की पहचान 8 वर्षीय क्रुणाल कृपाल भाई मालवीय के रूप में हुई है. क्रुणाल के पिता 'टाइटेनियम विट्रीफाइड' फैक्ट्री में श्रमिक के तौर पर काम करते हैं. जानकारी के मुताबिक, बच्चा फैक्ट्री परिसर के पास ही था, तभी अचानक एक आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया. कुत्ता इतना आक्रामक था कि उसने बच्चे को बुरी तरह नोंच डाला. घटना से संबंधित जो वीडियो वायरल होता है, इसमें साफ देखा जा सकता है कि कुत्ता बच्चे को नोच रहा है. तभी वहां एक कार सवार पहुंचते हैं. वह अपनी गाड़ी रोककर बच्चे को बचाने के लिए जाते हैं. तबी इलाके के और भी लोग पहुंच जाते हैं. हालांकि, तब तक कुत्ता बच्चे को बुरी तरह घायल चुका था. लिहाजा, गंभीर चोटों के कारण मासूम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. घटना के बाद बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोरबी सिविल अस्पताल भेजा गया है.

48 घंटों में हमलों की बाढ़, प्रशासन मौन

मोरबी में पिछले 48 घंटों के दौरान आवारा कुत्तों की आतंक की कई घटनाए सामने आई. महज दो दिन पहले ही सानाला रोड और जीआईडीसी (GIDC) क्षेत्र की एक रेजिडेंशियल सोसाइटी में एक ही कुत्ते ने तांडव मचाते हुए 20 से अधिक लोगों को काट लिया था. लगातार हो रहे इन हमलों ने शहर की सार्वजनिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई में जुटा है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं.

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इस दर्दनाक हादसे ने नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है. लिहाजा, चित्रकुट सोसाइटी और औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब "जानलेवा" स्तर पर पहुंच गई है. फैक्ट्री श्रमिकों का कहना है कि उनके बच्चे सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं, क्योंकि उन्हें अक्सर खुले क्षेत्रों में रहना पड़ता है. ऐसे में इन लोगों की मांग है कि आवारा कुत्तों के लिए प्रभावी नसबंदी कार्यक्रम चलाया जाए. साथ ही आक्रामक कुत्तों को रिहायशी और औद्योगिक इलाकों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए. वहीं, मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए. 

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