हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है. इसे विजयादशमी भी कहा जाता है. इस साल दशहरा 20 अक्टूबर, मंगलवार को है. ये दिन अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है और इसलिए देशभर में इसे अलग-अलग रूपों में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और मां दुर्गा ने महिषासुर का अंत किया था. दशहरे पर रावण दहन किया जाता है और कई जगह शस्त्र पूजा भी जाती है. अगर आप भी दशहरे पर शस्त्र पूजा करते हैं तो चलिए आपको बताते हैं शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त और सही विधि.
दशहरे पर शस्त्र पूजा क्यों की जाती है?
देशभर में कई जगह दशहरे पर शस्त्र पूजा की जाती है. शस्त्र पूजा पुराने समय से चली आ रही है. पहले राजा और सैनिक युद्ध में जाने से पहले अपने हथियारों की पूजा करते थे. ऐसा माना जाता था कि शस्त्रों की पूजा करने से युद्ध में जीत मिलती है. हिंदू धर्म के मुताबिक, शस्त्रों को शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. इस दिन लोग अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, वाहनों और मशीनों की पूजा भी करते हैं.
विजयादशमी पर शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक है. इस समय शस्त्र पूजा की जा सकती है.
घर पर शस्त्र पूजा कैसे करें
अगर, आप घर पर शस्त्र पूजा करना चाहते हैं तो सबसे पहले पूजा वाली की जगह साफ करें. इसके बाद शस्त्रों के पास पूजा के लिए रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीपक रखें. भगवान गणेश और मां दुर्गा का स्मरण करके पूजा शुरू करें. इसके साथ ही अपने शस्त्रों पर रोली से तिलक लगाएं. फूल-अक्षत चढ़ाएं और भोग लगाकर प्रसाद बांटे.
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