Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर भूलकर न करें ये 5 बड़ी गलतियां वरना पुण्य की जगह लगेगा पाप

Vijaya Ekadashi Vrat 2026 Rituals And Rules: सनातन परंपरा में फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है. भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए समर्पित इस तिथि पर पुण्य की प्राप्ति और पाप से बचने के आखिर कौन से गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए, विस्तार से जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

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Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी व्रत की 5 बड़ी गलतियां
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Ekadashi Vrat Se Judi Galtiyan: सनातन परंपरा में एकादशी व्रत को भगवान श्री विष्णु की कृपा बरसाने वाला माना गया है. इस व्रत का धार्मिक महत्व तब और बढ़ जाता है, जब फाल्गुन मास की एकादशी तिथि को रखा जाता है. हिंदू धर्म में इस तिथि को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है, जिसमें विधि-विधान से व्रत और पूजन करने पर साधक को श्री हरि से विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है. एकादशी व्रत को करने के लिए कुछेक नियमों का पालन करना जरूरी होता है, वरना इस व्रत का पुण्यफल नहीं मिलता है और दोष लगने के कारण यह पावन व्रत निष्फल हो जाता है. आइए जानते हैं कि विजया एकादशी व्रत को करते समय किन 5 बड़ी गलतियों से बचना चाहिए. 

1. जिस तरह जीवन में सही दिशा मे काम करने पर कार्य जल्दी सफल होता है, उसी प्रकार एकादशी व्रत की पूजा भी सही दिशा में करने पर शीघ्र ही सफल होती है. ​जैसे कि एकादशी व्रत की पूजा ईशान कोण में पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके करनी चाहिए. यदि आप विजया एकादशी व्रत को रखने जा रहे हैं इसी दिशा को पूजा के लिए चुनें और भूलकर भी दक्षिण दिशा की ओर करके भगवान विष्णु की पूजा करने की गलती न करें. 

2. एकादशी वाले दिन भूलकर भी किसी के लिए बुरा नहीं सोचना चाहिए और न ही शारीरिक या मानसिक तौर पर किसी को प्रताड़ित करना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान श्री विष्णु के व्रत वाले दिन क्रोध से बचते हुए अपने मन को शांत रखना चाहिए, अन्यथा इस पावन व्रत का पुण्यफल साधक को नहीं प्राप्त होता है. 

3. भगवान श्री विष्णु की कृपा बरसाने वाले विजया एकादशी व्रत में नियम-संयम के साथ तन और मन की पवित्रता का बहुत ज्यादा महत्व होता है. यदि आप विजया एकादशी व्रत का पुण्यफल पाना चाहते हैं तो इस दिन पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करें और स्त्री प्रसंग से दूर रहें. 

4. पौराणिक मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत करने वाले साधक को व्रत के दौरान सिर्फ सात्विक चीजों को ही ग्रहण करना चाहिए. ऐसे में विजया एकादशी व्रत का पुण्यफल पाना है तो भूलकर भी इस दिन तामसिक चीजों जैसे मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज आदि का सेवन न करें. मान्यता यह भी है कि एकादशी व्रत में मसूर की दाल, चना की दाल, उड़द की दाल, गाजर, शलजम, पालक आदि भी नहीं खाना चाहिए. 

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5. पौराणिक मान्यता के अनुसार साल भर में पड़ने वाला कोई भी एकादशी व्रत तब तक अधूरा रहता है, जब तक कि उसका विधि-विधान से पारण न किया जाए. यह व्रत तब भी निष्फल हो जाता है जब यह सही समय पर न किया जाए, इसलिए विजया एकादशी व्रत का पुण्यफल पाने के लिए व्रत का शुभ मुहूर्त के भीतर ही पारण करें. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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