Swastik Kaise Banaya Jata Hai: दीपावली का त्योहार इस साल 8 नवंबर को मनाया जाएगा. रोशनी और खुशियों के इस पर्व पर लोग अपने घरों को दीयों, रंग-बिरंगी लाइटों और आकर्षक रंगोली से सजाते हैं. वहीं, कई घरों में मेन गेट, पूजा स्थल और तिजोरी के पास शुभता और समृद्धि के प्रतीक के रूप में स्वास्तिक भी बनाया जाता है. हिंदू धर्म में स्वास्तिक को बेहद पवित्र और मंगलकारी चिन्ह माना जाता है. ऐसे में अधिकतर लोग स्वास्तिक बनाने का सही तरीका नहीं जानते हैं, जिसके कारण कई बार चिन्ह गलत बन जाता है. इसी कड़ी में आज हम आपको स्वास्तिक बनाने का सही तरीका बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं...
क्या होता है स्वास्तिक का मतलब?
स्वास्तिक या स्वस्तिक एक संस्कृत शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना है 'सु' जिसका अर्थ है अच्छा, शुभ या मंगल और अस्ति जिसका अर्थ है होना. इसी तरह स्वास्तिक का मतलब होता है शुभ हो कल्याण हो या मंगल होना.
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क्या है स्वास्तिक बनाने का सही तरीका?
1. स्वास्तिक बनाने के लिए साधारण प्लस का निशान बनाने की जगह सबसे पहले बीच में एक बिंदु बनाएं, जिसे ब्रह्म-बिंदु माना जाता है. इसके बाद स्वास्तिक को इसी केंद्र बिंदु से चार अलग-अलग रेखाओं के रूप में बनाना शुरू करें. ध्यान रखें कि कोई भी रेखा एक-दूसरे को बीच से काटे नहीं, बल्कि सभी रेखाएं अलग-अलग दिशा में आगे बढ़ते हूए स्वास्तिक का आकार बनाएं.
2. इसके बाद हर रेखा के सिरे पर 90 डिग्री बनाते हुए छोटी रेखा खींचें, जो घड़ी की दिशा में मुड़ती हो. स्वास्तििक का यही क्लॉकवाइज फॉर्म हिंदू धर्म में पारंपरिक और शुभ माना जाता है.
स्वास्तिक बनाने का सही तरीका क्या है?
3. जब स्वास्तिक की चारों भुजाएं पूरी बन जाएं, तो उनके बीच बने चारों खाली स्थानों में एक-एक बिंदु लगाएं. कुछ धार्मिक परंपराओं में इन चार बिंदुओं के अलावा स्वास्तिक के बिल्कुल मध्य भाग में भी एक बिंदु बनाया जाता है. माना जाता है कि ये बिंदु शुभता, सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होते हैं.
4. एक बात जो अक्सर लोग गलत कर देते हैं, वो ये है कि स्वास्तिक की रेखाओं को बीच में एक-दूसरे के आर-पार खींच देते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा नहीं करना चाहिए. स्वास्तिक की सभी रेखाएं केंद्र बिंदु पर आकर मिलें, लेकिन एक-दूसरे को काटें नहीं. ऐसा इसलिए क्योंकि बीच का भाग ब्रह्म-बिंदु या हृदय का प्रतीक माना जाता है. अगर रेखाएं बीच से एक-दूसरे को काटती हैं, तो स्वास्तिक का उसका आध्यात्मिक अर्थ प्रभावित हो सकता है.
कहां बनाया जाता है स्वास्तिक?
दिवाली पर स्वास्तिक चिन्ह आमतौर पर घर के मुख्य द्वार और रंगोली के साथ बनाया जाता है. कई लोग इसके साथ 'शुभ-लाभ' भी लिखते हैं और माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए उनके चरण चिन्ह भी बनाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संंचार होता है.
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