Surya Gochar 2026: सूर्य का मेष राशि में गोचर होते ही इन 4 राशियों के खुलेंगे बंद किस्मत के ताले, जानें अपना भी हाल

Sun Transit in Aries: ज्योतिष शास्त्र में जिस सूर्य को नवग्रहों का राजा माना गया है, उसका वैदिक काल से बहुत ज्यादा महत्व माना जाता रहा है. सूर्य के मेष राशि के जिस गोचर करने को मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है, उसका 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

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Mesh Sankranti 2026: सूर्य के राशि परिवर्तन का 12 राशियों पर प्रभाव
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Mesha sankranti effects on 12 zodiac sign: नवग्रहों के राजा सूर्य देवगुरु बृहस्पति की राशि बृहस्पति की राशि मीन से निकल कर मंगल की राशि मेष में 14 अप्रैल 2026 को गोचर करने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का यह राशि परिवर्तन मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है. सूर्य के द्वारा पूरे एक वर्ष तक 12 राशियों में भोग करने के बाद एक बार फिर से मेष राशि मे प्रवेश करना ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व रखता है, खास तौर पर तब जबकि मेष सूर्य की उच्च राशि हो. आइए मेष संक्रांति का देश-दुनिया समेत 12 राशियों पर क्या असर पड़ेगा, इसे जाने-माने ज्योतिषविद् पं. कृष्ण गोपाल मिश्र से विस्तार से जानते हैं. 

मेष संक्रांति का भारत पर क्या पड़ेगा असर?

ज्योतिष के अनुसार सूर्य जिस समय मेष राशि में प्रवेश करता है, उसे समय, लग्न और ग्रहों की स्थिति पूरे वर्ष भर प्रभाव डालती है. सूर्य 14 अप्रैल 2026 को प्रातः 9:32:25 बजे मेष राशि में प्रवेश करेगा. जिस समय सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा उस समय मिथुन लग्न उदित होगा. लग्न में बृहस्पति, तृतीय भाव में केतु, नवम भाव में चंद्रमा और राहु, दशम भाव में बुध मंगल एवं शनि तथा एकादश भाव में सूर्य एवं शुक्र है.

उपरोक्त ग्रहों को अगर देखा जाए तो तृतीय भाव का केतु एवं लग्न में बृहस्पति की मजबूत स्थिति है जो कि अपने ही नक्षत्र में बैठा है. इससे यह तय होता है कि लखनऊ से पश्चिमोत्तर भारत, जैसे दिल्ली, कश्मीर, पंजाब आदि क्षेत्रों में 29 अप्रैल 2026 से 17 जून 2026, 4 अक्टूबर 2026 से 26 अक्टूबर 2026, 25 दिसंबर 2026 से 13 जनवरी 2026 के दौरान यहां तनाव देखने को मिल सकता है. विशेष रूप से यहां पर शासन व्यवस्था संबंधी दिक्कतें, धार्मिक उन्माद या फिर सरकार के विरोध में कुछ अशांति जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है. 

शेष पूरे देश में उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल का एरिया, पूरा बिहार, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई समेत पूरे देश के लिए सामान्य रूप से इस संक्रांति की ग्रह स्थिति काफी अनुकूल कही जाएगी. हालांकि उपयुक्त तारीखों में भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान से कुछ तनाव देखने को मिल सकता है. उपरोक्त तारीखों को छोड़ दिया जाए तो पूरे साल में बाजार में तेजी देखने को मिलेगी.

मेष संक्रांति का 12 राशियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

मेष 

इस दौरान आपके भीतर काफी ऊर्जा देखने को मिलेगी. विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण बढ़ेगा. किसी प्रेम संबंध से भी प्रभावित हो सकते हैं. आमदनी में रूकावटों का सामना करना पड़ सकता है. बीच-बीच में आय से ज्यादा व्यय आपके तनाव का कारण बन सकता है. इस वर्ष खुद को चोट-चपेट से बचाना है. वाहन आदि के प्रयोग में सावधानी बरतें. जिन्हें रक्तचाप की दिक्कत है, उन्हें विशेष सावधानी बरतना चाहिए. शनि को संतुलित करने के लिए बृहस्पति के बीज मंत्र - 'ॐ बृं बृहस्पते नमः' का नित्य प्रातः पद्मासन में बैठकर 108 बार जाप करें.

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वृषभ 

यह संक्रांति आपके लिए उत्साहवर्धन एवं शुभ समाचारों का संकेत दे रही है. निश्चित तौर पर विद्यार्थियों के लिए यह समय अच्छा साबित होगा. मेडिकल फील्ड से जुड़े हुए लोगों के लिए काफी अच्छा समय है. राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े हुए व्यक्तियों के लिए अच्छे अवसर प्राप्त होंगे. निर्माण कार्य अथवा व्यवसाय क्षेत्र से जुड़े हुए व्यक्तियों के लिए भी अच्छे सफलता के अवसर मिलेंगे. खाने-पीने में लापरवाही ना करें. बीच-बीच में अत्यधिक एसिडिटी परेशान कर सकती है. भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त करने के लिए शनि के बीज मंत्र - 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का पद्मासन में बैठ करके एक माला नित्य प्रात: जब करें.

मिथुन

यह यह संक्रांति आपके लिए काफी शुभ है. दशम भाव में लग्नेश और भाग्येश का युति एक बड़े राजयोग का सूचक है. भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा. पराक्रम स्थान में बुध, शनि एवं मंगल आपके पराक्रम में चार चांद लगाएंगे. साथ ही भाग्य स्थान में मंगल बुध आपके आत्मबल और वर्चस्व को भी बनाए रखेंगे. इस वर्ष किसी प्रॉपर्टी को खरीदने का मजबूत योग बन रहा है. शासन-सत्ता का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा. राजनीति​ज्ञों के लिए वर्ष काफी अनुकूल कहा जाएगा. पदोन्नति, यश, कीर्ति से परिपूर्ण वर्ष हो सकता है. किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति का सहयोग भी प्राप्त होगा, लेकिन भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा. कुछ भावनात्मक संबंध में आपसे गलतियां हो सकती हैं. बीती हुई बातों को बहुत ज्यादा सोचना अच्छी बात नहीं होगी. इस वर्ष का लाभ लेने के लिए आपको शिव की आराधना करनी चाहिए. ॐ नमः शिवाय का 108 बार जाप नित्य पद्मासन में बैठकर करें.

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कर्क

यह संक्रांति आपको अपने स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहने की ओर इशारा कर रही है. राशीश चंद्रमा का अष्टम भाव में राहु के साथ होना स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अच्छा नहीं होता है. हालांकि दशम भाव में सूर्य और शुक्र की युति आर्थिक दृष्टिकोण से पहले की अपेक्षा स्थिति में सुधार होगा. आपके अंदर उर्जा का संचार होगा. लेकिन नवम भाव में मंगल शनि और बुध को देखते हुए आपको क्रोध पर नियंत्रण करना चाहिए. जाने-अनजाने किसी की आलोचना न करें. जिन लोगों को रक्तचाप की समस्या है, वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें. साथ ही मंगल के बीज मंत्र 'ॐ अं अंगारकाय नमः' का 108 बार रोज प्रातः पद्मासन में बैठकर के जाप करना विशेष हितकर होगा.

सिंह

यह संक्रांति सिंह राशि के लोगों की सेहत की दृष्टि से थोड़ी अच्छी नहीं कही जाएगी. राशि से अष्टम भाव में शनि मंगल एवं बुध की युति स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. जिन लोगों को मधुमेह, रक्तचाप एवं थायराइड आदि जैसी समस्या है, वे अपना विशेष ख्याल रखें. हालांकि एकादश भाव का बृहस्पति और भाग्य स्थान में उच्च का सूर्य आर्थिक दृष्टिकोण से प्रगति का भी सूचक है. अपने योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए आपके अंदर संपूर्ण ऊर्जा एवं क्षमता रहेगा. प्रत्येक शनिवार को कोई काली वस्तु का दान करें. साथ ही आपके लिए मंगल के बीच मंत्र का जाप करना काफी हितकर होगा. आप पद्मासन में बैठ करके नित्य एक माला मंगल के बीज मंत्र - ॐ अं अंगारकाय नमः का जाप करें.

कन्या

यह संक्रांति आपके लिए काफी हितकर है. व्यावसायिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और आर्थिक प्रगति भी होगी. राशि से सप्तम मंगल बुध और शनि आपके अंदर अद्भुत ऊर्जा का संचार करेंगे. अष्टम भाव में सूर्य की स्थिति थोड़ी सी खराब है. अत्यधिक एसिडिटी से अथवा अनावश्यक खर्चों से परेशान हो सकते हैं. छठे घर में राहु एवं चंद्रमा कुछ कफजनित समस्याएं उत्पन्न कर सकता है. राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह अवसर कोई विशेष लाभ दे सकता है. आपके लिए नित्य प्रातः गणेश वंदना करना काफी हितकर होगा. साथ में शनि के बीज मंत्र -ॐ शं शनैश्चराय नमः का जप भी करें.

तुला राशि का वार्षिक राशिफल

राशि से सप्तम सूर्य व शुक्र परिवारिक सुख में वृद्धि करेगा. छठे घर में मंगल, बुद्ध और शनि थोड़ा सा स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें दे सकते हैं. आपको थोड़ा सा क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए. आध्यात्मिक रुचि बनेगी. राशि से पंचम चंद्रमा भावनाओं से उत्पन्न करेगा और संबंधों में अत्यधिक अपेक्षाओं को वृद्धि करेगा. बीती हुई बातों को बहुत ज्यादा मत सोचें. संतान संबंधी दायित्व की पूर्ति हेतु प्रयत्नशील रहेंगे और कोई महत्वपूर्ण कार्य होगा. अचल संपत्ति अथवा प्रॉपर्टी से संबंधित कोई लाभ हो सकता है. राजनीतिक गतिविधियों के लिए काफी अनुकूल समय है. विद्यार्थियों के लिए भी यह समय अच्छा कहा जाएगा, प्रयासरत क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी. आपके लिए हितकर होगा कि आप प्रतिदिन भगवान गणेश की आराधना करें.

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वृश्चिक

यह संक्रांति आपके अंदर क्रोध में वृद्धि कर सकता है. वाहन आदि के प्रयोग में सावधानी बरतना चाहिए चोट लगने की शंका है. मौसम परिवर्तन के कारण गले की दिक्कत उत्पन्न हो सकती है या सर्दी जुकाम परेशान कर सकता है. अपने करीबियों से भी भावनात्मक अपेक्षाओं को लेकर परेशान हो सकते हैं. भविष्य को लेकर बहुत ज्यादा स्ट्रेस न पालें. जो बातें बीत चुकी उसे बार-बार ना सोचे. खर्चो पर नियंत्रण करने की चेष्टा करें. यात्रा में सावधानी बरतें. अच्छा होगा कि आप खुद को सकारात्मक चीजों में व्यस्त रखें और भगवान शंकर की आराधना करें. साथ ही साथ बृहस्पति के बीज मंत्र - ॐ बृं बृहस्पते नमः का पद्मासन में बैठकर के नित्य प्रातः 108 बार जाप करें. 

धनु 

यह संक्रांति थोड़ा सा पारिवारिक वातावरण को लेकर के परेशान कर सकता है. माता के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा. किसी बुजुर्ग व्यक्ति के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा. दांपत्य जीवन में कुछ समस्याएं परेशान कर सकती हैं. राशि से पंचम सूर्य आपके अंदर अद्भुत ऊर्जा का स्रोत बनेगा. आर्थिक दृष्टिकोण से आपके लिए संक्रांति के समय की ग्रह स्थिति आपके लिए काफी अनुकूल है. एक बात का विशेष ख्याल रखें कि दूसरों की आलोचना न करें. साथ ही किसी के साथ रूखा व्यवहार न करें. आपको नित्य प्रातः सूर्य को जल देना चाहिए और साथ में सूर्य के बीज मंत्र का 11 बार उच्चारण करना चाहिए. 

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मकर

यह संक्रांति आपकी प्रगति का सूचक है. परिजनों का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा. इस दौरान निर्माण कार्य हेतु अत्यधिक व्यय के संकेत है. अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने की चेष्टा करें. किसी विपरीत लिंगी से आकर्षण के योग हैं. आपको नित्य प्रातः गणेश वंदना करके ही दिन की शुरुआत करनी चाहिए. साथ में शनि के बीज मंत्र - ॐ शं शनैश्चराय नमः का भी पद्मासन में बैठकर के नित्य प्रात 108 बार का जाप करें.

कुंभ

यह संक्रांति आपके लिए काफी सकारात्मक ऊर्जा लेकर आया है. परिवार में कुछ चीज संगठित होती हुई दिखाई दे रही है. चल-अचल संपत्ति से संबंधित कुछ चिंताएं परेशान कर सकती हैं. परिवार में किसी मांगलिक कार्य को लेकर के प्रयत्नशील हो सकते हैं. उच्च स्तरीय संबंधों का सहयोग प्राप्त होगा. शासन सत्ता का सहयोग प्राप्त होगा. कार्यक्षेत्र में वर्चस्व बढ़ेगा. राजनीतिक युग के लिए बड़ा ही अनुकूल समय कहा जाए. अच्छा होगा कि ज्यादा से ज्यादा देवी की आराधना करें. गायत्री मंत्र का नित्य 108 बार जाप करें. शनि के बीज मंत्र - ॐ शं शनैश्चराय नमः का 108 बार पद्मासन में बैठकर जब करें.

मीन

मेष संक्रांति के बाद आपकी कुछ मानसिक चिंताएं बढ़ेंगी, जिसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. आप बहुत ज्यादा भविष्य को लेकर नकारात्मक विचार मत पालिए. अत्यधिक खर्चों को लेकर परेशान हो सकते हैं. भाई अथवा किसी निकट संबंधी से तनाव हो सकता है. अत्यधिक जिम्मेदारियां को लेकर के मन परेशान होगा. मिथुन के बृहस्पति का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा. मंगल के बीज मंत्र - ॐ अं अंगारकाय नमः एवं बृहस्पति के बीज मंत्र - ॐ बृं बृहस्पते नमः का 108 बार नित्य प्रातः पद्मासन में बैठकर करके जाप करें.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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