Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी से जुड़ी 7 बड़ी बातें जो इस व्रत करने वाले साधक को जरूर जाननी चाहिए

Sheetala Ashtami Vrat 2026 Significance: शक्ति साधना के तमाम स्वरूपों में माता शीतला की पूजा, जप और तप का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि देवी दुर्गा का यह दिव्य स्वरूप साधकों को सुख-सौभाग्य के साथ आरोग्य का बड़ा वरदान दिलाता है. बसौड़ा पर माता शीतला की पूजा और व्रत से जुड़ी ऐसी ही 7 बड़ी बातों को जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

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Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
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Sheetala Ashtami Ka Vrat Kyu Rakhte Hai: सनातन परंपरा में शक्ति के विभिन्न स्वरूपों की दुख-दुर्भाग्य को दूर करने और सुख-सौभाग्य को पाने के लिए की जाती है. देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों में से एक शीतला माता की पूजा एवं व्रत के लिए चैत्र मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. पंचांग के अनुसार शीतला अष्टमी का यह पावन पर्व इस साल 11 मार्च 2026 को रखा जाएगा. हिंदू मान्यता के अनुसार​ जिस तमाम देवियां दैत्यों का वध और तमाम तरह की बुराईयों को दूर करने के लिए जानी जाती है, उसी प्रकार शीतला माता अपने भक्तों को तमाम तरह की बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई हैं. आइए शीतला माता की पूजा और शीतला अष्टमी व्रत से जुड़ी 7 बड़ी बातों को जानते हैं.

1. शीतला अष्टमी का व्रत कब रखा जाता है?

शीतला माता की पूजा के लिए समर्पित शीतला अष्टमी (बसौड़ा) का व्रत हर साल होली के आठवें दिन रखा जाता है. इस साल यह व्रत 11 मार्च 2026, बुधवार के दिन रखा जाएगा. 

2. शीतला माता की पूजा क्यों की जाती है?

सनातन परंपरा में शीतला माता को आरोग्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार शीतला माता की पूजा से साधक को चेचक, खसरा जैसे तमाम तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है. 

3. माता की पूजा में लगाएं बासी भोग 

शीतला अष्टमी व्रत वाले दिन चूल्हा नहीं जलता और माता को एक दिन पूर्व बनाया गया भोजन और पकवान भोग के रूप में अर्पित किया जाता है और पूजा के बाद इसी को प्रसाद के रूप खाया जाता है. शीतला अष्टमी पर गरम पानी से स्नान भी नहीं किया जाता है. 

4. कहां है शीतला माता का पावन धाम?

शीतला माता के देश में कई स्थान पर मंदिर है, लेकिन उनमें देश की राजधानी के पास गुरुग्राम स्थित शीतला माता का मंदिर और उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में स्थित कड़ा धाम का बहुत ज्यादा महत्व है. इसी प्रकार राजस्थान के चाकसू कस्बे में भी शीतला माता का प्रसिद्ध मंदिर है. 

5. शीतला अष्टम पर भूलकर न करें ये काम 

हिंदू मान्यता के अनुसार शीतला अष्टमी के भूलकर भी चूल्हा न जलाएं और न ही घर में झाड़ू लगाएं. शीतला अष्टमी पर सुई में तागा नहीं डालने की परंपरा है. हिंदू मान्यता के अनुसार शीतला माता से आरोग्य का वरदान पाने की कामना रखने वाले व्यक्ति को भूलकर भी उनकी सवारी गधे को परेशान नहीं करना चाहिए. 

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6. शीतला अष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व 

हिंदू मान्यता के अनुसार शीतला अष्टमी का विधि-विधान से व्रत करने पर साधक को देवी शीता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह तन और मन से स्वस्थ रहते हुए सुख-सौभाग्य को प्राप्त करता है.

7. शीतला अष्टमी व्रत का आध्यात्मिक महत्व 

हिंदू मान्यता के अनुसार शीतला माता ने अपने एक हाथ में झाड़ू और दूसरे हाथ में शीतल जल धारण किया हुआ है. ऐसे में शीतला अष्टमी का पावन पर्व शक्ति के साधकों को साफ-सफाई के प्रति जागरुक करते हुए निरोगी रहने की सीख देता है. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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