Shani Pradosh Vrat Ki Puja Kaise Karen: हिंदू धर्म में किसी भी मास की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है. यह व्रत देवों के देव महादेव का आशीर्वाद की कृपा और कामनाओं को पूरा करने के लिए रखा जाता है. इस व्रत का महत्व तब और बढ़ जाता है जब यह शनिवार के दिन पड़ता है और शनि प्रदोष व्रत कहलाता है. फाल्गुन मास में शनि प्रदोष व्रत कब पड़ेगा और इस दिन किस पूजा को करने पर भगवान शिव के संग शनि देवता का आशीर्वाद प्राप्त होगा? शनि प्रदोष व्रत की संपूर्ण पूजा विधि, उपाय और धार्मिक महत्व को आइए विस्तार से जानते हैं.
शनि प्रदोष व्रत कब है? (Shani Pradosh Vrat Date) : 14 फरवरी 2026, शनिवार
शनि प्रदोष की पूजा का शुभ मुहूर्त (Pradosh Kaal Time) : 14 फरवरी 2026 की शाम 06:01 से रात्रि 08:32 बजे तक
कब और कैसे करें शनि प्रदोष की पूजा?
हिंदू मान्यता के अनुसार शनि प्रदोष व्रत की पूजा के लिए प्रदोष काल को सबसे उत्तम माना गया है. आइए शनि प्रदोष व्रत का पूरा पुण्यफल दिलाने वाली पूजा की विधि को स्टेप बाय स्टेप जानते हैं -
- शनि प्रदोष व्रत वाले दिन साधक को सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए.
- तन और मन से पवित्र होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. यदि संभव हो तो प्रदोष व्रत वाले दिन सफेद रंग अथवा उजले रंग के कपड़े धारण करें.
- शिव साधक को प्रात:काल शिव पूजा करने के बाद पूरे दिन शिव का चिंतन-मनन करते हुए अन्य कार्यों को करना चाहिए.
- प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा को प्रदोष काल यानि सूर्यास्त और रात्रि के संधि के समय दोबारा पूरे विधि-विधान से करें.
- प्रदोष काल की पूजा में यदि संभव हो तो देवों के देव महादेव की विधि-विधान से पूजा करने के साथ रुद्राभिषेक भी करें.
- प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा में शिव की प्रिय चीजें जैसे गंगाजल, बेलपत्र, भांग, भस्म, रुद्राक्ष आदि जरूर अर्पित करें.
- प्रदोष काल के समय रुद्राक्ष की माला से शिव मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का श्रद्धा के साथ जप करें.
- प्रदोष व्रत की पूजा के बाद भगवान शिव की आरती अवश्य करें तथा अंत में सभी को प्रसाद बांटकर खुद भी ग्रहण करें.
शनि प्रदोष व्रत का उपाय
- यदि आपकी कुंडली में शनि दोष है और आप उसके चलते तमाम तरह की परेशानियों से घिरे हुए हैं तो आपको शनि प्रदोष व्रत वाले दिन नीचे बताए गये सरल सनातनी उपाय जरूर करने चाहिए.
- शनि प्रदोष व्रत वाले दिन शिव उपासना के साथ शनि देव की विधि-विधान से करें. शनि प्रदोष व्रत वाले दिन शनि देव को सरसों को तेल अर्पित करने के बाद शनि चालीसा, शनि स्तोत्र का पाठ और शनि मंत्र का जाप जरूर करें.
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- शनि प्रदोष व्रत वाले दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं और उसकी परिक्रमा करें.
- शनि प्रदोष व्रत वाले दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार काले तिल के लड्डू, काला कंबल, काले रंग के जूते या चप्पल, लोहे के बर्तन, काली उड़द की दाल और सरसों का तेल का दान करें. इन सभी सामान को एक दिन पहले खरीद कर रख लें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














