आज है सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत, जानें किस पूजा से मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी और दूर होगा मंगल दोष

Mangla Gauri Vrat 2025: सावन महीने में पड़ने वाले सोमवार की तरह मंगलवार की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि इस दिन मां मंगला गौरी के व्रत एवं पूजन से मंगल दोष से जुड़ी परेशानियां दूर होती है और सुख सौभाग्य प्राप्त होता है. आइए सावन के आखिरी मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि और महत्व के बारे में जानते हैं. 

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मंगला गौरी व्रत पर इस पूजा से दूर होगा कुंडली का मंगल दोष
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Sawan Last Mangla Gauri Vrat: भगवान शिव की पूजा के लिए जिस तरह श्रावण मास के सोमवार की पूजा का महत्व माना गया है, ठीक उसी तरह श्रावण मास के मंगलवार के दिन मां मंगला गौरी की पूजा, व्रत आदि का बहुत ज्यादा पुण्यफल माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव की तरह मां मंगला गौरी भी अपने भक्तों की पूजा से शीघ्र प्रसन्न होकर उनके सभी दु:ख और कष्ट हर लेती हैं. सावन के महीने में पड़ने वाला आज आखिरी मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है, आइए इस व्रत से जुड़ी कथा, पूजा विधि और नियम के बारे में विस्तार से जानते हैं. 

मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व 

सनातन परंपरा में मां मंगला गौरी का व्रत सामान्यत: महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा और उनकी लंबी उम्र की कामना को लिए हुए रखती हैं. वहीं कुंआरी कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी को पाने के लिए माता मंगला गौरी की विधि-विधान से पूजा करती हैं. मां मंगला गौरी के दर्शन और पूजन से कुंडली के मंगल दोष के दुष्प्रभाव दूर हो जाते हैं और जीवन में सब मंगल ही मंगल होता है. 

कैसे करें आज मंगला गौरी की पूजा 

मंगला गौरी माता की पूजा के लिए आज स्नान-ध्यान करके जब आप तन-मन से पवित्र हो जाएं तो सबसे पहले माता का विधि-विधान से व्रत करने का संकल्प लें. इसके बाद यदि माता की मूर्ति या चित्र रखकर लाल रंग के पुष्पों से उनका पूजन करें. माता के पूजन में 16 की संख्या में चीजों को अर्पित करने का अत्यधिक पुण्यफल माना गया है. ऐसे में मात को फल, फूल और श्रृंगार की सामग्री 16 की संख्या में ही चढ़ाएं. इसके बाद माता की कथा का पाठ और अंत में आरती करें. 

मंगला गौरी व्रत की कथा

हिंदू मान्यता के अनुसार किसी समय में एक धर्मपाल नाम के व्यापारी के पास सभी सुख के साधन मौजूद थे और उसका कारोबार खूब फल-फूल रहा था लेकिन उसके पास संतान नहीं थी. जिसे लेकर वह अक्सर दुखी रहता था. कई सालों के बाद उसे पुत्र के रूप में संतान तो मिली लेकिन उसे पता चला की उसका जीवन कम है और बहुत कम उम्र में सांप के काटने से उसका जीवन समाप्त हो जाएगा. उसने अपने पुत्र का विवाह किशोरावस्था में कर दिया.

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उसकी पुत्रवधु मां मंगला गौरी की अननरू भक्त थी और हर मंगलवार को माता का विधिपूर्वक व्रत और पूजन करती थी. मान्यता है कि उसकी पूजा और व्रत से प्रसन्न होकर मां मंगला गौरी ने उसे अखंड सौभाग्य का वरदान दिया और उसके पति की मृत्यु टल गई. इसके बाद उसने सुखद जीवन जिया. 

मंगला गौरी की पूजा का उपाय

हिंदू मान्यता के अनुसार मंगला गौरी व्रत वाले दिन माता को मीठी चीज का भोग लगाने का विधान है. ऐसे में आज मंगला गौरी व्रत वाले दिन आप माता को यादि 16 लाल पेड़े चढ़ाते हैं या फिर सिंहाड़े के आटे से बना हलवा चढ़ाते हैं तो आपको माता का शीघ्र ही आशीर्वाद प्राप्त होगा और जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होगी. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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