Ramadan 2026 ramzan kab se shuru hai: इस्लाम के हिजरी कैलेंडर के अनुसार कुल 12 महीने होते हैं, जिसमें 9वां महीना रमजान का माना गया है. इस्लाम में बेहद पाक माने जाने वाले इस महीने में मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग पूरे एक महीने तक नियम-संयम के साथ रोजे रखते हुए खुदा की इबादत करते हैं. इस्लामिक मान्यता के अनुसार इसी पाक महीने में पैगंबर मोहम्मद साहब को अल्लाह से कुरान की आयतें मिली थीं. इस साल रमजान का महीना कब शुरू होगा और कब रखा जाएगा पहला रोजा और कब मनाई जाएगी मीठी ईद? आइए इन सभी बातों को विस्तार से जानते हैं.
कब रखा जाएगा पहला रोजा?
लखनऊ की टीले वाली मस्जिद के शाही इमाम मौलाना सैय्यद फ़ज़लुल्ल मन्नान रहमानी के अनुसार माह-ए-रमजान का निर्धारण चांद पर निर्भर करता है. इसका निर्धारण मुस्लिम कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की 29 या 30 तारीख के चांद से होता है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इस साल 19 फरवरी 2026 को पहला रोजा रखा जाएगा.
कब मनाई जाएगी ईद?
रमजान के अंतिम दिन में ईद का त्योहार मनाया जाता है. इसका निर्धारण भी चांद दिखने पर ही होता है. मौलाना सैय्यद फ़ज़लुल्ल मन्नान रहमानी के अनुसार इस साल मीठी ईद 20 या 21 मार्च को मनाई जा सकती है. ईद उल-फ़ित्र या फिर कहें मीठी ईद के नाम से जाना यह पर्व इस्लामिक कैलेण्डर के अनुसार शव्वाल महीने के पहले दिन मनाया जाता है. यह हिजरी कैलेंडर का दसवां महीना होता है.
बेहद खास हैं रमजान के ये दिन
रमजान महीने का अंतिम शुक्रवार को अलविदा की नमाज पढ़ने का विशेष महत्व माना गया है. होता है. इसी के बाद मीठी ईद का बड़ा पर्व मनाया जाता है. रमजान के महीने में शबे कद्र में रात भर जाग कर इबादत करने का बहुत ज्यादा महत्व होता है. मौलाना फ़ज़लुल्ल मन्नान के अनुसार 21वीं शब, 23वीं शब, 25वीं शब, 27वीं शब और 29वीं शब की रात को रात्रि में जागकर अल्लाह की इबादत करने को कहा गया है. इसमें लोग नमाज पढ़ने के साथ-साथ कुरान की आयतें पढ़ते हैं.
सहरी किसे कहते हैं?
रमजान के पाक महीने में रोजा या फिर कहें उपवास रखने के लिए फज्र की नमाज यानि सूर्योदय से पहले सहरी (Sehri) करने का विधान होता है. रोजा रखने वाले मुसलमान को जो कुछ भी खाना-पीना होता है, वह इस समय ग्रहण कर लेता है. इसके बाद वह पूरे दिन कुछ भी नहीं खाता-पीता है. इस्लाम में सहरी को बरकत वाला काम माना गया है, जिसे करने से रोजा रखने वाले व्यक्ति के शरीर को पूरे दिन ऊर्जा प्राप्त होती है.
इफ्तार किसे कहते हैं?
सहरी के बाद इस्लाम को मानने वाले लोग पूरे दिन नियमबद्ध तरीके से रोजा रखते हैं और सूर्यास्त के समय मगरिब की अजान से पहले रोजा खोलते है. इसे इफ्तार कहा जाता है. इफ्तार में अजान से पहले खाना-पीना होता है. हालांकि इसके बाद भी वह खाना आदि खा सकता है. इफ्तार के समय लोग खजूर, फल या फिर हल्का भोजन लेकर रोजा खोलते हैं.
रमजान में जकात का क्या होता है महत्व?
रमजान के महीने में जकात देना सवाब यानि पुण्य का काम माना गया है. मौलाना सैय्यद फ़ज़लुल्ल मन्नान रहमानी के अनुसार यदि किसी के पास 1000 रुपये हैं तो उसे 250 रुपये किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जकात में देना चाहिए. इस्लामिक मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी को एक रुपये देता है तो उसे उसका 10 गुना ज्यादा यानि 10 रुपये देने का सवाब मिलेगा.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














