Himachal Ke Shaktipeeth: हिमाचल के 5 पावन शक्तिपीठ, जहां दर्शन मात्र से दूर होते हैं सारे दुख

Devi temple in Himachal Pradesh: शक्ति की साधना के लिए देश में तमाम ऐसी पावन पीठ हैं जहां पूरे साल भगवती के भक्त दर्शन और पूजन करने के लिए पहुंचते हैं. हिमाचल प्रदेश के जिन देवी मंदिरों में नवरात्रि के दौरान भक्तों की भारी भीड़ जुटती है, उन पांच शक्तिपीठों के बारे में विस्तार से जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

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हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध देवी मंदिर
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Famus shaktipeeth of himachal pradesh: हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के चक्र से कटने के बाद सती के अंग जहां-जहां गिरे वह स्थान मां भगवती का परम धाम शक्तिपीठ कहलाया. यदि बात करें खूबसूरत पहाड़ों वाले हिमाचल प्रदेश की तो यहां पर शक्ति साधना के तमाम पावन पीठ हैं, जहां पर न सिर्फ नवरात्रि में बल्कि पूरे साल देवी भक्तों का तांता लगा रहता है. यदि बात करें ​हिमाचल प्रदेश के पाच प्रमुख शक्तिपीठों की तो उनमें चिंतपूर्णी, ज्वाला जी, बगलामुखी, कांगड़ा (ब्रजेश्वरी देवी) और चामुंडा देवी का नाम आता है. आइए शक्ति के इन पावन धामों के बारे में विस्तार से जानते हैं.

ज्वालाजी मंदिर

ज्वालाजी मंदिर हिमाचल प्रदेश का एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जहां सती की जीभ गिरी थी. शक्ति का यह चमत्कारिक पीठ हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है. देवी के इस दिव्य पीठ में भक्तों को लगातार बगैर किसी दीया या बाती के 09 ज्वालाएं जलती हुई नजर आती हैं. इन 09 ज्वाला को देवी के 09 स्वरूप के रूप में पूजा जाता है. खास बात ये कि ये ज्वालाएं पानी से बुझाने पर नहीं जलती हैं.

चिंतपूर्णी मंदिर

चिंतपूर्णी मंदिर हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख शक्तिपीठ है, जहां सती के चरण गिरे थे. यह मंदिर चिंतपूर्णी देवी को समर्पित है जो अपने साधक की सभी चिंताओं को दूर करती हैं. यहां पर देवी पिंडी के रूप में पूजी जाती हैं. मां चिंतपूर्णी का पावन धाम हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित है.

ब्रजेश्वरी मंदिर

हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिले में मां ब्रजेश्वरी देवी का पावन धाम है. हिंदू मान्यता के अनुसार शक्ति के इस पावन पीठ पर मां सती का वक्ष गिरा था. माता के भक्त उन्हें बज्रेश्वरी देवी या कांगड़ा देवी के नाम से भी बुलाते हैं. इस मंदिर को "नगरकोट की रानी" भी कहा जाता है. मां ब्रजेश्वरी देवी के पावन धाम पर पूरे साल भक्तों की भीड़ होती है. मान्यता है कि माता के दर्शन मात्र से सारे दुख दूर और कामनाएं पूरी हो जाती हैं.

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चामुंडा देवी मंदिर

मां चामुंडा का पावन धाम हिमाचल प्रदेश के पालमपुर शहर से 19 किमी की दूरी पर स्थित है. चामुंडा शब्द चंड और मुंड शब्द से मिलकर बना है. मां चामुंडा को काली के रूप में पूजा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार मां चामुण्डा की पूजा से जीवन में आने वाली सारी बाधाएं और शत्रु भय दूर होता है. माता का यह पावन धाम बाणगंगा नदी के तट पर स्थित है.

नैना देवी मंदिर

भारत के हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित, नैना देवी मंदिर, शक्ति की अवतार देवी नैना देवी को समर्पित है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां भगवान शिव की पत्नी सती की आंख गिरी थी. देवी के इस मंदिर में पूरे साल भक्तों की भीड़ होती है. माता का मंदिर पहाड़ों पर स्थित है, जहां पर आप रोपवे की मदद से भी जा सकते हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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