Nandi Ki Puja Kaise Kare: हिंदू मान्यता के अनुसार सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है. यही कारण है कि भोले का भक्त इस दिन देवों के देव महादेव को मनाने के लिए शिवालय में जाकर उनकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव की कृपा पाने के लिए उनके गण नंदी की पूजा बेहद जरूरी मानी गई है. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान राम की पूजा में जो हनुमत साधना का महत्व है, वहीं शिव पूजा में नंदी साधना का महत्व माना गया है. इसे ऐसे समझा जा सकता है कि शिव का एक नाम नंदीश्वर भी है. आइए शिव के द्वारपाल कहे जाने वाले नंदी देवता की पूजा विधि और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं.
नंदी देवता की कैसे करनी चाहिए पूजा?
हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी शिवालय में प्रवेश करने पर सबसे पहले जिस नंदी देवता के दर्शन होते हैं, उन्हें सबसे पहले जल अर्पित करें. इसके बाद उनका चंदन से तिलक करने के बाद पुष्प, बेलपत्र और फल आदि अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए नंदी के कान में अपनी मनोकामना को धीमें से कहें. मान्यता है कि नंदी पूजा से जुड़ा उपाय जो लगातार 7 दिनों तक करता है, उसकी मनोकामना शीघ्र ही भगवान शिव पूरा करते हैं.
नंदी की पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी शिवालय में आपके द्वारा की गई पूजा तब तक अधूरी है, जब तक आप भगवान भोलेनाथ के प्रिय गण नंदी की पूजा नहीं करते हैं. भगवान शिव के वाहन नंदी के बारे में मान्यता है कि जब महादेव ने हलाहल विष का पान किया तो उसमें से थोड़ा जमीन पर भी गिर गया था, जिसे उनके परम भक्त नंदी ने भी चाट लिया था. नंदी की इस भक्ति को देखने के बाद महादेव ने उन्हें वरदान किया भक्तगण भोलेनाथ की पूजा से पहले उनका दर्शन और पूजन करेंगे.
नंदी पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
- नंदी के कान में अपनी कामना हमेशा उनकी पूजा करने के बाद ही कहें.
- नंदी भगवान के कानों में अपनी मनोकामना बात बहुत धीमे से कहना चाहिए, ताकि उसे कोई दूसरा न सुन सके.
- हिंदू मान्यता के अनुसार नंदी के कान में कभी किसी दूसरे के अनिष्ट की कामना नहीं करनी चाहिए. दूसरों के लिए बुरा फल मांगने की बजाय हमेशा अपने लिए मंगलकामना करें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














