Masik Krishna Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हर महीने आने वाली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का बेसब्री से इंतजार करते हैं. ये दिन कृष्ण भक्ति, व्रत और पूजा-पाठ के लिए बेहद खास माना जाता है. मई 2026 में इस व्रत की सही तारीख को लेकर लोगों के बीच काफी भ्रम बना हुआ है. कई लोग 9 मई को सही बता रहे हैं, जबकि कुछ 10 मई का जिक्र कर रहे हैं. ऐसे में अगर आप भी कान्हा जी का व्रत रखने वाले हैं, तो सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जान लेना जरूरी है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से श्रीकृष्ण की पूजा करने से घर में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है.
कब मनाई जाएगी मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
मई 2026 में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 9 मई, शनिवार को मनाई जाएगी. इसी दिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पड़ रही है, जिसे व्रत और पूजा के लिए शुभ माना गया है. भक्त इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करेंगे और व्रत रखेंगे.
जानिए इस दिन के शुभ मुहूर्त
9 मई को सूर्योदय सुबह 5:52 बजे और सूर्यास्त शाम 6:53 बजे होगा. चंद्रोदय रात 12:34 बजे बताया गया है. वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा. अमृत काल दोपहर 12:23 बजे से 2:08 बजे तक रहेगा. इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:15 बजे से 5:03 बजे तक रहेगा. इस दौरान पूजा और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है.
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कान्हा जी को क्या चढ़ाएं भोग
भगवान श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री बेहद प्रिय माने जाते हैं. मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त खीर, पंचामृत, माखन, मिश्री और लड्डू का भोग लगाते हैं. पूजा में तुलसी दल शामिल करना भी बहुत शुभ माना जाता है.
आसान तरीके से करें पूजा
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें.
- घर के मंदिर में लड्डू गोपाल को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं.
- फिर चंदन का तिलक लगाकर फूल अर्पित करें.
- देसी घी का दीपक जलाएं और श्रीकृष्ण की आरती करें.
- अंत में माखन-मिश्री या पंचामृत का भोग लगाकर मंत्र जाप करें.
क्यों खास माना जाता है ये व्रत
धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है. कहा जाता है कि श्रद्धा से पूजा करने पर जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. यही वजह है कि हर महीने बड़ी संख्या में भक्त ये व्रत रखते हैं.
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी आरती
।। आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।। [1]
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
।। आरती कुंज बिहारी की... ।। [1, 2]
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
।। आरती कुंज बिहारी की... ।। [1, 2]
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच,
चरन छवि श्री बनवारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
।। आरती कुंज बिहारी की... ।। [1, 2]
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
।। आरती कुंज बिहारी की... ।। [1, 2]
।। इति आरती कुंज बिहारी की ।।














