Mahakaleshwar Jyotirlinga: किसे भस्म करने और किसे बचाने के लिए महादेव बने महाकाल? पढ़ें तीसरे ज्योतिर्लिंग की रहस्यमय कहानी

Shri Mahakal Temple Ujjain : मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) जिले में पृथ्वी के तीसरे ज्योतिर्लिंग के रूप में आखिर क्यों प्रकट हुए महादेव? काल के भी काल कहलाने वाले महाकालेश्वर (Shri Mahakal Temple) से जुड़ा बड़ा रहस्य जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. 

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी
NDTV

Mahakal Ki Kahani Kya Hai: अकाल मृत्यु वो मरे जो कर्म करे चांडाल का, काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का. जी हां, शिव भक्तों की कुछ ऐसी ही आस्था महाकाल से जुड़ी हुई है. पृथ्वी पर जितने भी महादेव से जुड़े पावन धाम हैं, उसमें श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजन करने वालों की बहुत बड़ी संख्या है, क्योंकि इन्हें काल का भी काल माना जाता है. सप्तपुरियों में से एक उज्जैन स्थित यह इकलौता ऐसा ज्योतिर्लिंग हैं जो दक्षिणमुखी है. जिस ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही भोले के भक्तों का मृत्यु तक का भय तक दूर हो जाता है, उसका प्राकट्य पृथ्वी पर आखिर कब और कैसे हुआ था? आइए महादेव का महाधाम कहलाने वाले शिव के तीसरे ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर की पूरी रहस्मयी कथा को जानते हैं. 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की रहस्मयी पौराणिक कथा 

पौराणिक मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में उज्जैन शहर को अवंतिका नगरी के नाम से जाना जाता था. यहां पर अत्यंत ही धर्मनिष्ठ वेदपाठी ब्राह्मण रहता था, जिसकी भगवान शिव पर अगाध आस्था थी. महादेव का यह परम भक्त प्रतिदिन विधि-विधान से शिव पूजन किया करता था. उस ब्राह्मण की तरह उसके चार पुत्र भी भगवान भोलेनाथ की भक्ति में हमेशा लीन रहा करते थे. उसी काल में अवंतिका के पास रत्नमाल पर्वत पर दूषण नाम का बेहद क्रूर राक्षस रहा करता था, लेकिन उसकी शक्ति सीमित थी और वह रत्नमाल की सीमाओं से आगे नहीं बढ़ पा रहा था. 

दूषण को मिला ब्रह्मा जी से त्रिदेव की शक्ति का वरदान 

दूषण ने असीमित शक्तियों को हासिल करने के लिए ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या प्रारंभ की. जब ब्रह्मा जी ने उसके तप से प्रसन्न होकर उससे वरदान मांगने को कहा तो उसने त्रिदेव के समान शक्ति का वरदान मांग लिया. दूषण की मांग सुनकर ब्रह्मा जी हैरान रह गये. फिर उन्होंने उसे त्रिदेव के समान शक्ति प्रदान करते हुए चेतावनी भी दी कि यदि उसने शिव भक्तों को सताया तो उसे बुरा परिणाम झेलना पड़ेगा, लेकिन दूषण उनकी बात को अनसुना कर दिया. 

जब दूषण को ब्रह्मा जी का वरदान प्राप्त हो गया तो वह अपनी असीमित शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए धर्म-कर्म में लीन रहने वालों को अंत करते हुए अपने राज्य का विस्तार करते हुए उस अवंतिका नगरी पहुंच गया, जहां पर वह वेदपाठी ब्राह्मण अपने चार पुत्रों के साथ शिव साधना में लीन रहा करता था. दूषण ने अवंतिका के सभी लोगों को पूजा-पाठ बंद करने का आदेश दिया, लेकिन शिव का परम भक्त अपने पुत्रों के साथ महादेव की पूजा अर्चना करता रहा. जब यह बात दूषण को पता चली तो वह उस ब्राह्मण के पास पहुंचा और उसके पुत्रों को मारने की धमकी दी. 

Advertisement

तब पृथ्वी पर हुआ तीसरे ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य 

दूषण के द्वारा ब्राह्मण पुत्रों को मारने की धमकी भी उस ब्राह्मण पर बेअसर रही और वह देवों के देव महादेव का स्मरण करते हुए शिवलिंग के पास लगातार अपनी साधना करता रहा. जब दूषण ने देखा कि ब्राह्मण पर उसकी बातों का कोई असर नहीं हो रहा है तब अपनी तलवार को लेकर उसके पुत्रों को मारने के लिए आगे बढ़ा, लेकिन उसी समय वहां पर एक भयानक विस्फोट हुआ और पृथ्वी का सीना चीर कर वहां पर महादेव महाकाल के रूप में अवतरित हुए. 

Draupadi Ki Kahani: कुंती के कहने पर नहीं...पार्वती के श्राप ने कराया था द्रौपदी का पांच पतियों से विवाह?

Advertisement

इसके बाद महादेव की गर्जना से तीनों लोक गूंज उठे. महादेव की हुंकार करते समय जो उनके मुख से अग्नि निकली उससे दूषण पलक झपकते ही भस्म होकर राख हो गया. इसके बाद उस ब्राह्मण के चार पुत्रों ने महादेव से अपने भक्तों की रक्षा के लिए उज्जैन में सदा वास करने की प्रार्थना की. मान्यता है कि इसके बाद महादेव उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गये. 

— देखें काल के भी काल कहे जाने वाले महाकाल की महागाथा की वीडियो स्टोरी

Featured Video Of The Day
Bengal Election 2026: बैरकपुर की जंग में किसका बजेगा डंका? जनता किसके संग खड़ी है! Manogya Loiwal