Kuldevi Ki Puja Kab Hoti Hai: सनातन परंपरा से जुड़े लोग तमाम तरह की देवी-देवता के साथ अपने कुलदेवी या कुल देवता की पूजा पीढ़ी दर पीढ़ी करते चले आ रहे हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार कुल देवी या देवता के आशीर्वाद से जहां सोचे हुए विशेष या फिर मांगलिक कार्य मनचाहे तरीके से समय पर पूरे होते हैं तो वहीं उनकी उपेक्षा करने पर व्यक्ति को जीवन में तमाम तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है. सनातन परंपरा वंश की वृद्धि और कुल की रक्षा करने वाली देवी की पूजा का आइए धार्मिक महत्व विस्तार से जानते हैं.
कब और कैसे करना चाहिए कुलदेवी की पूजा?
हिंदू मान्यता के अनुसर कुल देवी की पूजा सामान्य रूप से शुक्रवार के दिन की जाती है, जबकि नवरात्रि की अष्टमी-नवमी, किसी भी मास की अमावस्या और पूर्णिमा तिथि को कुलदेवी की पूजा के लिए उत्तम माना गया है. इन दिनों में कुलदेवी की पूजा विधि-विधान से करने पर साधक को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. शुक्रवार को कुलदेवी की पूजा का वार माना जाता है.
ऐसे में इस दिन साधक को संध्याकाल में कुल देवी की पूजा पुष्प, चंदन, रोली, अक्षत, सिंदूर, लाल रंग के वस्त्र, हलवा, पूरी, खीर, चूरमा आदि का भोग लगाकर करनी चाहिए. कुल देवी की पूजा में परिवार के सभी सदस्यों को एकसाथ बैठकर श्रद्धापूर्वक पूजा करना चाहिए. कुलदेवी की पूजा किसी भी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम जैसे सगाई, विवाह, तिलक, जनेउ, मुंडन, गृह प्रवेश आदि करते समय करना चाहिए.
कुलदेवी की पूजा न करने पर क्या आती हैं दिक्कतें?
हिंदू मान्यता के अनुसार जिन लोगों के घर में कुलदेवी की उपेक्षा होती है, उस घर में तमाम तरह की समस्याएं आती हैं. कुलदेवी का अपमान करने वालों को जीवन में तमाम तरह की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. कुलदेवी का कोप झेलने वाले व्यक्ति को मेहनत के बाद भी मनचाही सफलता नहीं मिलती है.
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ऐसे लोगों के कुल की वृद्धि रुक जाती है और वे संतान सुख के लिए तरसते हैं. कुलदेवी के कोप के कारण ऐसे घरों में हमेशा कलह का वातावरण बना रहता है और पारिवारिक प्रेम और सामंजस्य की कमी रहती है. रोजी-रोजगार का संकट पैदा होने लगता है. कुलदेवी की नाराजगी के चलते परिवार के सदस्य तमाम तरह की बीमारियों से ग्रसित रहने लगते हैं.
कुलदेवी को मनाने के लिए क्या करें?
हिंदू मान्यता के अनुसार कुलदेवी का आशीर्वाद हमेशा बना रहे इसके लिए व्यक्ति को न सिर्फ तमाम धार्मिक और मांगलिक अवसरों पर उनका स्मरण और पूजन करना चाहिए बल्कि साल में एक बार कुलदेवी के धाम जाकर उनका विशेष रूप से दर्शन करना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














