Karwa Chauth ki Katha Aarti: आज 29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जा रहा है. इस दिन सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखा है. शाम में पूजा के शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा की जाएगी. साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा. आज पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:38 बजे से 06:56 बजे तक रहेगा. इस अवधि में सभी सुहागिन महिलाएं करवा चौथ की पूजा कर सकती हैं. पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा सुनना या पढ़ना बेहद जरूरी माना जाता है. साथ ही करवा माता की आरती भी बेहद महत्वपूर्ण होती है. माना जाता है कि इस कथा और आरती के बिना करवा चौथ की पूजा अधूरी होती है. यहां पढ़ें करवा चौथ की कथा...
करवा चौथ की कथा | Karwa Chauth Vrat Katha
पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी. बेटी का नाम करवा था. सातों भाई अपनी बहन पर जान छिड़ते थे और उसपर एक आंच नहीं आने देते थे. एक बार करवा अपने मायके आई हुई थी. शाम के समय उसके भाई घर लौटे तो उन्होंने देखा कि उनकी बहन भूख और प्यास से परेशान है. भाइयों ने उसे खाना खाने के लिए कहा, लेकिन करवा ने बताया कि उसने करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा है और वह चंद्रमा को देखकर, अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करेगी.
काफी समय बीत जाने के बाद भी चांद दिखाई नहीं दिया. अब, भाइयों से अपनी बहन की ऐसी हालत देखी नहीं जा रही थी. तब सबसे छोटे भाई ने एक तरकीब निकाली. वह दूर पीपल के पेड़ पर दीपक जलाकर उसे चलनी की आड़ में रख आया. दूर से देखने पर ऐसा लगा, जैसे आसमान में चांद निकल आया हो. इसके बाद उसने करवा से कहा कि चंद्रमा निकल आया है और अब वह भोजन कर सकती है. भाई की बात पर भरोसा करके करवा ने दीपक की रोशनी को चांद समझ लिया. अर्घ्य दिया और भोजन करने बैठ गई.
अब, करवा ने जैसे ही भोजन का पहला कौर मुंह में डाला, उसे छींक आ गई. दूसरे कौर में खाने में बाल निकल आया. तीसरा कौर खाने से पहले ही उसे अपने पति की मृत्यु की खबर मिल गई. यह सुनकर करवा के पैरों तले जमीन खिसक गई. खबर मिलने के बाद करवा की भाभी ने उसे बताया कि ये सब व्रत तोड़ने का नतीजा है. भाभी का कहना था कि बिना चांद देखे व्रत तोड़ने की वजह से ही उसके पति की मृत्यु हुई है.
सच्चाई का पता चलने के बाद करवा ने निश्चय किया कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपनी तपस्या से उन्हें दोबारा जीवित करके रहेगी. वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रही और दिन रात उनकी देखभाल करती रही. समय बीतता गया और अगले साल करवा चौथ का दिन आ गया. इस बार करवा ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया और चांद को अर्घ्य देकर उपवास खोला.
कथा के अनुसार, इतनी कठोर तपस्या देख भगवान गणेश ने करवा के पति के प्राण लौटा दिए. करवा का पति फिर से जीवित हो उठा और जय श्री गणेश, जय श्री गणेश कहने लगा.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिस प्रकार करवा को अपने सुहाग की रक्षा का आशीर्वाद मिला, करवा चौथ का व्रत करने और ये कथा सुनने से उसी प्रकार सभी सुहागिन महिलाओं को भी सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है.
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करवा चौथ की आरती | Karwa Chauth Aarti Lyrcis in Hindi
ओम जय करवा मैया , माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया..
ओम जय करवा मैया।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती..
ओम जय करवा मैया।
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे..
ओम जय करवा मैया।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे..
ओम जय करवा मैया।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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