COVID-19 के कारण दो साल के अंतराल के बाद कांवड़ यात्रा हो रही है
कांवड़ यात्रा के पहले दिन भगवान शिव के भक्त बड़ी संख्या में उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा नदी का पानी लेने पहुंचे.
कांवर यात्रा से जुड़ी पांच बड़ी बात
- COVID-19 के कारण दो साल के अंतराल के बाद कांवड़ यात्रा हो रही है. उत्तराखंड के अधिकारियों को उम्मीद है कि कम से कम 4 करोड़ भक्त (जिन्हें कांवरिया कहा जाता है) उत्तराखंड के दो पवित्र शहरों - हरिद्वार और पड़ोसी ऋषिकेश - में आएंगे.
- उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार ने तीर्थयात्रियों को तीर्थयात्रा के दौरान तलवार, त्रिशूल और लाठी ले जाने पर रोक लगा दी है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जनमेजय खंडूरी ने कहा है कि,"सभी थानों और चौकी प्रभारियों को जिले की सीमाओं पर ही उन्हें जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं."
- राज्य पुलिस ने लगभग दो सप्ताह तक चलने वाले तीर्थयात्रा के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. पुलिस ने कहा कि सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है. साथ ही सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है. लगभग 10,000 पुलिस कर्मियों की तैनाती के साथ हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों को 12 सुपर जोन, 31 जोन और 133 सेक्टरों में विभाजित किया गया है.
- हिंदू कलेंडर में सावन के महीने के दौरान शिव भक्त 'कांवर यात्रा' में शामिल होते हैं. कांवड़िये उत्तराखंड में हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री और बिहार के सुल्तानगंज जैसे स्थानों पर गंगा नदी का पवित्र जल लाने के लिए जाते हैं. फिर वे उसी जल से भगवान की पूजा करते हैं.
- इस साल सावन का महीना 14 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त को खत्म होगा. इस दौरान चार सोमवार आते हैं- 18 जुलाई, 25 जुलाई, 1 अगस्त और 8 अगस्त.
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