Ramcharitmanas Ki Chaupai: दुराचार मामले में जोधपुर के जज ने मानस की जिस चौपाई को सुनाकर दी बड़ी सजा, जानें उसके सही मायने

जोधपुर की अदालत में एक ​जज ने दुराचार मामले में फैसला सुनाते समय मानस की जिस चौपाई का हवाला देते हुए कठोर दंड को जायज ठहराया है, उसका मर्म और मानस में महिलाओं के प्रति सम्मान को, समझने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

Ramcharitmanas Ki Chaupai: गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस सिर्फ भगवान राम के गुणों का गान करने वाला काव्य भर नहीं है, बल्कि इसकी चौपाई मुश्किलों से उबारने वाला मंत्र है. मनुष्य से जुड़ी ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसे दूर करने का उपाय मानस की चमत्कारी चौपाईयों में न समाहित हो. मानस की चौपाईयां हर असमंजस को दूर करके सही निर्णय लेने में मददगार बनती है, बिल्कुल वैसे ही जैसे जोधपुर की अदालत में एक जज ने दुराचार मामले में बड़ा फैसला लेते इसका विशेष रूप से जिक्र किया. रामायण की जिस चौपाई का उदाहरण देते हुए जज ने दुराचार के मामले में कठोर सजा को जायज ठहराया है, आइए उसके अर्थ और प्रसंग को विस्तार से जानते हैं. 

जज ने फैसला देते समय सुनाई ये चौपाई 

जोधपुर में पॉक्सो की विशेष अदालत में जज डॉ. दुष्यंत दत्त ने दुराचार के मामले को बेहद गंभीर बताते हुए इसके लिए कठोर दंड दिया जाना जरूरी बताया. जज ने रामचरित मानस के किष्किंधा काण्ड की उस चौपाई का जिक्र किया जिसमें भगवान राम कहते हैं कि 

'अनुजवधू भगिनी सुतनारी, कन्या सम एति चारि. 
एहि को देख कुदृष्टि से, ताहि बधे कछु पाप न होई.' 

अर्थात् छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्र की स्त्री और कन्या- ये चारों समान हैं. इन्हें यदि कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कोई भी पाप नहीं लगता है. 

बालि के सवाल पर प्रभु श्री राम ने दिया था जवाब

जोधपुर के जज ने जिस चौपाई का जिक्र किया है, वह रामायण काल में बाली द्वारा पूछे गये सवाल का जवाब है. भगवान राम जब छिपकर बाली पर बाण चलाकर उसे धराशायी कर देते हैं तो वह उनसे पूछता है कि — 

Advertisement

"मैं बैरी सुग्रीव पियारा 
कारण कौन नाथ मोहि मारा"

अर्थात् हे राम आखिर वो कौन सा कारण है कि आपने जो आपने मुझे मार दिया और सुग्रीव से आप इतना प्रेम करते हैं. तब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम "अनुजवधू भगिनी सुतनारी, कन्या सम एति चारि. एहि को देख कुदृष्टि से, ताहि बधे कछु पाप न होई." के जरिए इसे उचित ठहराते हैं. 

मानस में पराई स्त्रियों को माता के सम्मान आदरणीय बताते हुए कई चौपाईयों के जरिए लोगों से सीख दी गई हैं. जैसे —

Advertisement

"जननी सम जानहिं पर नारी-
तस सठ मिलइ न रामु पुरारी-"

अर्थ: जो पुरुष पराई स्त्री को माता के समान समझता है (वह भगवान को प्यारा है), लेकिन जो परस्त्री गामी (गलत दृष्टि डालने वाला) है, उसे राम और शिव जैसे भगवान भी नहीं मिलते.

"जो आपन चाहै कल्याना. सुजसु सुमति सुभ गति सुख नाना.
सो परनारि लिलार गोसाईं. तजउ चउथि के चंद कि नाईं."

अर्थात् जो मनुष्य अपना कल्याण, सुंदर यश, सद्बुद्धि, शुभ गति और तमाम तरह के सुख सौभाग्य को पाना चाहता हो, उसे परस्त्री के ललाट को बिल्कुल वैसे ही नहीं देखना चाहिए जैसे चौथ के चंद्रमा को नहीं देखा जाता है.

Featured Video Of The Day
Iran Israel War | वो 16 कदम... दुश्मन खत्म! कैमरे में पहली बार Khamenei का War Room | Kachehri
Topics mentioned in this article