Jaya Ekadashi Vrat Kab Hai: सनातन परंपरा में प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा एवं व्रत के लिए अत्यधिक फलदायी माना गया है. मान्यता है कि इस पावन तिथि पर विधि-विधान से व्रत रखने पर श्री हरि की कृपा बरसती है और साधक के जीवन से जुड़े सारे दोष दूर हो जाते हैं और उसे अनंत सुख की प्राप्ति होती है. माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी, जिसे जया एकादशी के नाम से जाना जाता है, वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजय और सफलता दिलाने वाली मानी गई है. आइए श्री हरि का आशीर्वाद और सुख-सौभाग्य बरसाने वाली जया एकादशी व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व को विस्तार से जानते हैं.
जया एकादशी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026, बुधवार की शाम 04:35 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 29 जनवरी 2026, गुरुवार को दोपहर 01:55 बजे समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026 को ही रखा जाएगा. जिस पारण के बगैर श्री हरि का एकादशी व्रत अधूरा माना जाता है, वह अगले दिन 30 जनवरी 2026 को प्रात:काल 06:41 से 08:56 बजे के बीच किया जा सकेगा.
जया एकदशी व्रत की विधि
जया एकदशी व्रत को करने के लिए व्यक्ति को दशमी की रात से ही नियम-संयम का पालन करना प्रारंभ कर देना चाहिए. इसके बाद एकादशी वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य देना चाहिए. फिर श्री हरि का ध्यान करने के बाद जया एकादशी व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद अपने पूजा घर में भगवान विष्णु को चंदन, पुष्प, फल, मिष्ठान, तुलसी दल, पंचामृत आदि अर्पित करने के बाद एकादशी व्रत की कथा कहनी या सुननी चाहिए. कथा सुनने के बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का अधिक से अधिक जप करना चाहिए. एकादशी व्रत वाले दिन अन्न का सेवन न करें और अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण करें.
जया एकादशी का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार जया एकादशी व्रत को नियम-संयम के साथ रखने वाले व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गये सारे पापों से मुक्ति् मिल जाती है और वत सुख-सौभाग्य का प्राप्त करता है. इस पावन एकादशी के पुण्य प्रताप से व्यक्ति का तन और मन शुद्ध होता है और अध्यात्मिक लाभ को प्राप्त करता है. यह व्रत अनेक यज्ञों के बराबर पुण्यफल प्रदान करता है. जिसे प्राप्त करके व्यक्ति सभी सुखों को भोगता हुआ अंत में विष्णु लोक को प्राप्त होता है.
जया एकादशी व्रत के नियम
- जया एकादशी व्रत वाले दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए.
- जया एकादशी व्रत को रखने वाले साधक को तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए.
- एकादशी व्रत में डिब्बा बंद जूस, कोल्ड ड्रिंकक्स आदि चीजें नहीं पीना चाहिए.
- एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को झूठ नहीं बोलना चाहिए और न ही किसी की निंदा या आलोचना करना चाहिए.
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- जया एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
- जया एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को किसी दूसरे का दिया हुआ अन्न नहीं खाना चाहिए.
- जया एकादशी व्रत का पारण द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














