Holika Ki Puja Kaise Karen: पंचांग के अनुसार इस साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 03 मार्च 2026 को पड़ेगी और इसी दिन शाम के समय 06 बजकर 08 मिनट से लेकर 08 बजकर 35 मिनट के बीच में होलिका पूजन किया जाएगा. जबकि रंग वाली होली अगले दिन 04 मार्च 2026 को खेली जाएगी. सदियों से चली आ रही होलिका दहन की परंपरा का हिंदू धर्म में काफी महत्व माना गया है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. जिस होलिका की अग्नि में सभी नकारात्मक उर्जा जल कर समाप्त हो जाती है और व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है, आइए उसकी पूजा की सरल सनातनी विधि को विस्तार से जानते हैं.
होलिका दहन की पूजा सामग्री
गंगा जल, शुद्ध जल, रोली, चंदन, चावल, पुष्प, माला, गुड़, साबुत हल्दी, बताशे, नारियल, गुलाल, गेहूं या जौ की बाली, कपूर, गाय के गोबर के उपले, पान का पत्ता, लौंग, इलायची, हवन सामग्री,
होलिका दहन के समय कैसे करें पूजा?
- सबसे पहले जिस स्थान पर होलिका दहन की पूजा करनी हो उसे साफ करने के बाद गंगाजल से पवित्र कर लें.
- इसके बाद तन और मन से पवित्र होकर होलिका दहन वाले स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके शुभ मुहूर्त में पूजा प्रारंभ करें.
- होलिका दहन वाले स्थान पर सबसे पहले गाय के गोबर से होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा बनाकर रखें.
- फिर वहां पर गोबर के उपले और लकड़ी के बीच रखने के बाद कच्चे सूत से चारों ओर परिक्रमा करते हुए सात बार लपेट दें.
- इसके बाद धूप-दीप, पुष्प, चंदन, अक्षत, गुड़, कपूर, साबुत हल्दी, नारियल, पान, लौंग, इलायची, लौंग, अबीर-गुलाल, कुमकुम आदि अर्पित करें.
- इसके बाद होलिका को गाय के गोबर से बनी उपलों वाली माला अर्पित करें. होलिका दहन के समय इसके अलावा पितरों, हनुमान जी, शीतलामाता और अपने परिवार के नाम से चार मालाएं और अर्पित करने का भी विधान है.
- इसके बाद भगवान नरसिंह भगवान का ध्यान करते हुए होलिका में अग्नि लगा दें.
- होलिका में आग लगाने के बाद अपने परिवार के लिए मंगलकामना करते हुए उसमें गेहूं, जौ,गुलाल, गोबर के उपले और शुद्ध जल अर्पित करके तीन बार परिक्रमा करें.
- होलिका दहन की राख ठंडी होने के बाद उसे प्रसाद स्वरूप अपने माथे पर लगाएं और घर लेकर जाएं.
होलिका दहन के नियम
- हिंदू मान्यता के अनुसार गर्भवती महिला, नवजात शिशु, पीरियड वाली महिलाओं, नई दुल्हनए नकारात्मक विचार वालों को और सास-बहू को एक साथ होलिका दहन नहीं देखना चाहिए.
- होलिका दहन के दौरान व्यक्ति को होलिका के साथ भक्त प्रह्लाद और उनके आराध्य देवता नृसिंह भगवान की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए.
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- होलिका दहन की पूजा के दौरान व्यक्ति को उसकी तीन परिक्रमा करनी चाहिए.
- हिंदू मान्यता के अनुसार संध्या के समय शुभ मुहूर्त में होलिका दहन का दर्शन एवं पूजन करने के बाद ही व्यक्ति को भोजन करना चाहिए.
- होलिका दहन वाले दिन व्यक्ति को पूरे परिवार के साथ फाल्गुन पूर्णिमा के चांद का दर्शन और पूजन करना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














