Guru Pradosh Vrat Puja Vidhi: हिंदू मान्यता के अनुसार सूर्यास्त और रात्रि के संधिकाल को प्रदोषकाल कहा जाता है. यह प्रदोष काल शिव पूजन के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है. पंचांग के अनुसार किसी भी महीने के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष की पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि प्रदोष कहलाती है, जिसमें देवों के देव महादेव संग पूरे शिव परिवार की पूजा करने पर साधक को मनचाहे फल की प्राप्ति होती है. शिव के इस व्रत का पुण्यफल तब और बढ़ जाता है जब यह गुरुवार के दिन पड़ता है. आइए गुरु प्रदोष व्रत की पूजा के लिए उत्तम माने जाने वाले प्रदोष काल का समय, पूजा विधि और उपाय आदि के बारे में विस्तार से जानते हैं.
गुरु प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार पौष मास के शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि 01 जनवरी 2026, गुरुवर के दिन पूर्वाह्न 01:47 बजे प्रारंभ होकर रात्रि को 10:22 बजे समाप्त होगी. इस दिन महादेव की विधि-विधान से पूजा करने के लिए प्रदोष काल का समय सायंकाल 05:35 से लेकर रात्रि 08:19 बजे तक रहेगा. यानि शिवभक्तों को साल के पहले दिन शिवपूजा के लिए कुल 02 घंटे 44 मिनट मिलेंगे.
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गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि
गुरु प्रदोष व्रत को करने के लिए तन-मन से पवित्र होने के बाद शिव-पार्वती का ध्यान करते हुए इस व्रत को करने का संकल्प लेना चाहिए और प्रात:काल शिव भगवान को जल अर्पित करना चाहिए. इसके बाद पूरे दिन उपवास रखते हुए तथा शिव का ध्यान करते हुए आप अपने अन्य कार्य करें. शाम को प्रदोष काल के समय एक बार फिर तन और मन से पवित्र होने के बाद भगवान शिव का चंदन, भस्म, बिल्व पत्र, शमीपत्र, गंगाजल, फल-फूल आदि के माध्यम से पूजन करना चाहिए. इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा को कहें या सुनें और अधिक से अधिक शिव मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला से करें. प्रदोष व्रत की पूजा के बाद शिव भगवान की आरती करना बिल्कुल न भूलें.
गुरु प्रदोष व्रत का महाउपाय
गुरु प्रदोष व्रत वाले दिन गुडलक पाने के लिए नहाने के पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करें और भगवान शिव की पूजा पीले रंग के आसन पर बैठकर करें तथा भगवान शिव की पूजा में विशेष रूप से पीले रंग के पुष्प चढ़ाएं. साथ ही साथ आज के दिन पीले फल, पीले वस्त्र, गुड़ और चने का दाल दान करें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)














